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भारत
राजनीति
नोएडा सैमसंग फैक्टरी के सामने मजदूरों और किसानों का आंदोलन जारी
सीआईटीयू ने कहा कि मज़दूर नेता व अन्य 47 साथियों को गौतमबुध्दनगर नोएडा प्रशासन द्वारा 6 दिन जेल में रखे जाने के बाद बिना शर्त रिहा कर दिया गया। ये मजदूरों और किसानो के संघर्ष की जीत हुई । रोजगार पाने के लिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Aug 2018
citu

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेए-इन ने नोएडा सेक्टर 81 में सैमसंग के विस्तारित फैक्ट्री का उद्घाटन किया था | यह हर महीने सबसे ज्यादा उपकरणों को बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन उत्पादन इकाई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी दावा किया था कि इस इकाई में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन अब वो सिर्फ उनके अनेक जुमलों की तरह एक और जुमला साबित होते दिख रहा है। 

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का दमन 47 लोगो को गिरफ्तार कर जेल भेजा :

21 अगस्त को सैमसंग कंपनी के बाहर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों ग्रामीण ,युवा और किसानों को काफी मेहनत के बाद पुलिस काबू कर पाई  और करीब 80 से ज्याद लोगों को पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया था। तकरीबन 40 से ज्यादा लोगो को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। 

सेंट्रल फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन ने अपने प्रेस रिलीज़ में कहा कि स्थानीय लोगों के आंदोलन के आगे जिला प्रशासन को घुटने टेकने पड़े। साथी गंगेशवर दत शर्मा, उपाध्यक्ष सीटू दिल्ली राज्य कमेटी, साथी रूपेश वर्मा युवा जुझारू किसान नेता व अन्य 47 साथियों को गौतमबुध्दनगर नोएडा प्रशासन द्वारा 6 दिन जेल में रखे जाने के बाद  26 अगस्त  की देर रात बिना शर्त रिहा कर दिया गया। ये मजदूरों और किसानो के संघर्ष की जीत हुई ।

आगे वो अपने प्रेस रिलीज में कहते हैं कि रोजगार पाने के लिए हमारा  आंदोलन जारी रहेगा।आज फिर जिला कार्यालय सुरजपुर ग्रेटर नोएडा पर मजदूर-किसान बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं।सैमसंग कंपनी के वादा खिलाफी और अपने अधिकार को लेकर पिछले मंगलवार सैंकड़ों  किसान व उनके बच्चों  ने सेंटर ऑफ़  इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू) और किसान सभा के नेतृत्व में  सेक्टर 81 स्थित सैमसंग इकाई पर पहुँचे और अपने लिए रोजगार की मांग करने लगे | प्रदर्शन कर रहे लोगो का कहना था कि हमारी जमीन अधिग्रहण करते समय हम लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, यह वायदा आजतक पूरा नही किया गया है, जिस कारण आज सैकड़ों की संख्या में हम सड़कों पर उतरे हैं और विरोध कर रहे है। 

सवाल यह है की सरकार वादा करने के बाद भी ग्रामीणों को नौकरी क्यों नहीं दे रही हैं?

गंगेशवर दत्त शर्मा, उपाध्यक्ष सीआईटीयू दिल्ली राज्य कमेटी ने न्यूज़ क्लिक से बात करते हुए कहा कि "हमने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थापित कारखानों में नौकरियां दी जाएं। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गयी थी, उनके बच्चों को भी नौकरियां दी जानी चाहिए। बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थानीय युवाओं को नौकरियां नहीं देती हैं। और वे कहती हैं कि जिन किसानों का जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है उनके परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाएगी, लेकिन सैमसंग इकाई अपना वादा पूरा नहीं कर रही है।  

शर्मा ने कहा कि "हमारी दूसरी मांग 20,000 रुपये की न्यूनतम मासिक मजदूरी है। जब तक सरकार इसे अनुमोदित नहीं करती है तब तक हमने मांग की है कि श्रमिकों को दिल्ली में प्रति माह न्यूनतम मजदूरी के समान मजदूरी का भुगतान किया जाए | उत्तर प्रदेश में, प्रति माह न्यूनतम वेतन केवल 7,600 रुपये है, जो कि बहुत ही कम हैं |"

क्या यह ‘इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर मजदूरों के शोषण का एक और उदाहरण है ?

सैमसंग ने इस इकाई  के विस्तार में 4,915 करोड़ रुपये लगाए हैं, यह इकाई ऐसे उत्पाद भी बनाती है जो न केवल भारत में बेची जाएंगी बल्कि यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका को भी निर्यात की जाएगी। मौजूदा इकाई में 35 एकड़ तक का विस्तार किया गया है। कंपनी वर्तमान में भारत में 67 मिलियन स्मार्टफोन बना रही है और नए संयंत्र के चालू होते ही इससे लगभग 120 मिलियन मोबाइल फोन बनाने की उम्मीद है।  केवल मोबाइल ही नहीं बल्कि  रेफ्रिजरेटर और फ्लैट पैनल टीवी की उत्पादन क्षमता भी  दोगुनी  होने की उम्मीद है। सैमसंग, भारत में 20 वर्षों से है, इसके दो कारख़ाने एक नोएडा और दूसरा तमिलनाडु में है, जहां से बने हुए 90 फीसदी हेंडसेट देश में ही बिक जाते हैं। यह लगभग 45,000 कर्मचारियों को रोजगार देता है।

न्यूजक्लिक से बात करते हुए गंगेशवर दत शर्मा ने नोएडा में सैमसंग कारखाने में श्रमिकों की स्थितियों के बारे में बात करते हुए कहा कि कर्मचारियों को अक्सर 12 घंटे तक काम करने के लिए मज़बूर किया जाता है। कारखाने में लगभग 1000  अनुबंध कर्मचारी हैं, जिन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जाती है और स्थायी श्रमिकों को दिए जाने वाला किसी भी प्रकार का लाभ नहीं दिया जाता है। जिन श्रमिकों ने अतीत में संघटन बनाने का प्रयास किया है,वे कंपनी द्वारा निकाल दिए गए थे और वर्तमान में कारखाने में कोई संघ नहीं है।

ग्रेटर नोएडा में ही एक अन्य फैक्ट्री एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में श्रमिकों की स्थितियों के बारे में, पीयूडीआर ने 2016 में एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में, पीयूडीआर ने वहां काम करने वाले लोगों की स्थितियों के बारे में बताया है । रिपोर्ट के अनुसार मजदूरों को उनके काम का पूरा वेतन नहीं दिया जाता है और उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जाता हैं|

इस रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि कैसे फैक्ट्री मालिक मजदूरों के मौलिक अधिकार यानी कि यूनियन बनाने के अधिकार को कुचलते है | क्योंकि वो जानते हैं की मज़दूर संगठित होंगे तो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे। इसलिए जैसे ही कोई संग्ठन निर्माण की कोशिश करता है तो कम्पनियाँ उसे चिन्हित कर परेशान और प्रताड़ित करती हैं.

इन सब में अपने पूंजीपति मित्रो की मदद के लिए मोदी सरकार ने‘इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ के के तहत श्रम कानूनों को कमजोर कर  दिया है, जो कंपनियों को श्रमिकों का शोषण का करने की खुली छुट देती हैं।

CITU
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peasants
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