NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न्यायिक सेवाओं में विभिन्न जातियों का प्रतिनिधित्व आज भी सपना भर है
पिछले साल नवम्बर में केंद्र सरकार ने देश के 24 उच्च न्यायालयों को चिट्ठी लिख उनके न्यायक्षेत्र में एससी, एसटी और ओबीसी का कितना प्रतिनिधित्व है, इसका ब्यौरा माँगा थाI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Feb 2018
judiciary

हाल ही की एक रिपोर्ट से उजागर हुए निचली अदालतों में जजों की संख्या के आँकड़े देश की न्यायिक सेवाओं में विभिन्न तबकों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हैंI

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक, निचली अदालतों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों का प्रतिनिधित्व आज भी बहुत कम हैI

पिछले साल नवम्बर में केंद्र सरकार ने देश के 24 उच्च न्यायालयों को चिट्ठी लिख उनके न्यायक्षेत्र में एससी, एसटी और ओबीसी का कितना प्रतिनिधित्व है, इसका ब्यौरा माँगा थाI

रिपोर्ट से पता लगता है कि सिर्फ 11 राज्यों ने ही जवाब भेजा और वो भी ज़्यादातर छोटे राज्यों ने I

निचली अदालतों में कुल न्यायाधीशों में से सिर्फ 12% ही ओबीसी हैंI एससी का प्रतिनिधित्व 14% और एसटी का महज़ 12% हैI

2011 की जनगणना के मुताबिक देश की जनसँख्या में 16.6% एससी और 8.6% एसटी हैंI देशभर में ओबीसी की जनसँख्या का कोई एक आँकड़ा मौजूद नहीं, लेकिन ज़्यादातर राज्यों में इनकी संख्या 27% से अधिक है I

ऊँची अदालतों में एस, एसटी और ओबीसी के प्रतिनिधित्व का ब्यौरा सरकार के पास खुद भी  उपलब्ध नहीं है I

संसद में एक सांसद ने ऊँची अदालतों में एससी और एसटी के प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल किया, जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि, “उच्चतम न्यायालय में जजों की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत होती हैI इस अनुच्छेद में जाति और वर्ग आधारित किसी भी तरह आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है I”

लेकिन सरकार का यह जवाब आरक्षण की संवैधानिक स्थिति की अधूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 335 साफ़-साफ़ कहता है कि, “संघ या किसी राज्य के कार्यकलाप से सम्बंधित सेवाओं और पदों के लिए नियुक्तियाँ करने में, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के दावों का प्रशासन की दक्षता बने रखने की संगति के अनुसार ध्यान रखा जायेगाI”

अनुसूचित जाति के लिए राष्ट्रीय आयोग ने राष्ट्रपति के पास एक ख़ास रिपोर्ट दर्ज़ की, जिसे 11 दिसम्बर 2014 को संसद पटल पर रखा गया I

इस दस्तावेज़ में साफ़-साफ़ कहा गया है कि ऊँची अदालतों में आरक्षण दिया जाना चाहिए और ऐसा करने की कोई मनाही नहीं हैI

आरक्षण
न्यायालय
एससी
एसटी
ओबीसी

Related Stories

महाराष्ट्र के हिंसक मराठा आंदोलन के लिये कौन जिम्मेदार है?

दलितों आदिवासियों के प्रमोशन में आरक्षण का अंतरिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी (पीओए) कानून में किया परिवर्तन लेकिन, केंद्र इस पर चुप क्यों?

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद प्रकरण: क्या सर्वोच्च न्यायालय में धर्मनिरपेक्षता का विस्तार होना चाहिए?

विफल गुजरात मॉडल


बाकी खबरें

  • AUKUS May put NATO’s Future into Question
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    नाटो के भविष्य को संकट में डाल सकता है एयूकेयूएस 
    25 Sep 2021
    इस डील के परिणामस्वरूप दो ऐतिहासिक साझीदारों, अमेरिका एवं फ्रांस के संबंधों में गंभीर दरार आ गई है। इससे नाटो को भी आनुषांगिक रूप से घाटा हो सकता है।
  • Tamil Nadu
    नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु के मछुआरे समुद्री मत्स्य उद्योग विधेयक के ख़िलाफ़ अपना विरोध तेज़ करेंगे
    25 Sep 2021
    मछुआरे समुदाय का आरोप है कि विधेयक और ब्ल्यू इकॉनमी मसौदा नीति कॉर्पोरेट संस्थाओं के हितों का पक्षपोषण करती है।
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या शांति की ओर बढ़ रहा है अफ़ग़ानिस्तान?
    25 Sep 2021
    अफ़गान अर्थव्यवस्था को उबारने में चीन की तत्परता एक बिल्कुल नया कारक है। अब बाइडेन प्रशासन अफ़गानिस्तान और मध्य एशिया में और अधिक उलझावों में शामिल नहीं होना चाहता है, इन हालत में अफ़गानिस्तान के पड़ोसी…
  • Kannur University
    सुचिंतन दास
    नहीं पढ़ने का अधिकार
    25 Sep 2021
    नफ़रत और कट्टरता से भरी बातों को पढ़ने से इनकार कर के कन्नूर विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस सिलेबस की समीक्षा करने और इसके ज़रिये शासन की विस्तारात्मक नीति का  विरोध कर अहम राजनीतिक कार्य को अंजाम…
  • Harshil farmers
    वर्षा सिंह
    हर्षिल के सेब किसानों की समस्याओं का हल क्यों नहीं ढूंढ पायी उत्तराखंड सरकार
    25 Sep 2021
    हर्षिल के काश्तकारों ने इस महोत्सव का सीधे तौर पर बायकॉट कर दिया। महोत्सव शुरू होने के चार रोज़ पहले से ही हर्षिल में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया था। महोत्सव के दिन हर्षिल में किसानों ने ढोल-दमाऊं जैसे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License