'वन नेशन : वन इलेक्शन' के एजेंडे पीछे क्या है सरकार की मंशा? क्या निकट भविष्य में संविधान की मूल भावना और संरचना में बदलाव की कोशिश होगी? इन्हीं कुछ सवालों पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण।
दोबारा सत्ता में वापसी के बाद ' न्यू इंडिया ' के उद्घोष के साथ मोदी सरकार ने ' वन नेशन : वन इलेक्शन ' के एजेंडे को अपनी प्राथमिकता में शुमार किया है! बेरोजगारी , बेहाली , बीमारी , पेयजल संकट और सांप्रदायिक विभाजन जैसी बड़ी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श के बजाय सरकार ने पहली सर्वदलीय बैठक ' एक साथ इलेक्शन ' के सवाल पर बुलाई! समग्र चुनाव-सुधार की बात होती तो समझा जा सकता था! इसके पीछे क्या है सरकार की मंशा ? क्या निकट भविष्य में संविधान की मूल भावना और संरचना में बदलाव की कोशिश होगी ? इन्हीं कुछ सवालों पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण।
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