NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
पश्चिम एशिया
न्यूजीलैंड
न्यूज़ीलैंड नरसंहार : मुस्लिमों को विलेन बनाने की साज़िश का नतीजा
“बहुत लम्बे समय से पूरी दुनिया में मुस्लिमों को खलनायक के तौर पर पेश करने का कारोबार चल रहा है। यह कारोबार इतना बड़ा हो चुका है कि दुनिया आर्थिक संकट से गुजरी है और इसके लिए दुनिया में मौजूद राइट विंग पार्टियां मुस्लिमों को दोषी मानती हैं।”
अजय कुमार
16 Mar 2019
newzealand
image courtesy- daily express

 

आतंक का गहरा अर्थ नफरत होता है और नफ़रत एक तरह की ऐसी प्रवृत्ति है जो दुनिया के हर हिस्से में मौजूद होती है। 

ऐसा सोचना मुश्किल हो रहा है कि मानव विकास सूचकांक में 16वें रैंक पर मौजूद  न्यूज़ीलैंड जैसे देश में भी दिल दहला देने वाली आतंकी घटना घटेगी।

लेकिन दुनिया की हकीकतें बदल रही हैं, जिसमें नफरत हावी हो रही है।

यह नफरत इतनी हावी हुई है कि शुक्रवार को कुछ लोग हाथ में बंदूक लेकर न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में घुस गए और अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें तकरीबन 49 लोगों की जान चली गयी और कई लोग घायल हुए। मस्जिद में मौजूद लोगों में ज्यादातर लोग दुनिया में अपने मूल निवास के हिस्से से परेशान होकर न्यूज़ीलैण्ड में रहने आये थे। यानी ज्यादातर प्रवासी थे और शरणार्थी के तौर पर न्यूज़ीलैण्ड में रह रहे थे।

इस हमले में शामिल चार लोगों को अभी तक  गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें से एक ऑस्ट्रेलिया का नागरिक भी शामिल है। उसने हमले से पहले ही हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी।  जिस पोस्ट में 74 पेज का मेनिफेस्टो है और इस मेनिफेस्टो में प्रवासियों और शरणार्थियों के खिलाफ नफरत से जुडी विचारधारा से भरे शब्द हैं। इस तरह से उसकी नस्लवादी और एंटी इमिग्रेंट विचारधारा इस हमले के लिए अपराधी के तौर पर सामने आती है। इनकी नफरत इतनी भयावह थी कि हमलावर में से एक  इस दर्दनाक घटना का फेसबुक लाइव कर रहा था। अभी इससे जुड़े वीडियो को इंटरनेट से हटा लिया गया है। पुलिस ने यह आदेश दिया है कि इस घटना से जुड़े वीडियो को न फैलाया जाए। इतनी बड़ी आतंकी घटना न्यूज़ीलैण्ड के अब तक के इतिहास में कभी भी नहीं हुई थी। 

प्रवासन समय के हर दौर में होता रहा है।  लेकिन  मौजूदा समय में होने वाला प्रवासन एक जटिल परिघटना के तौर पर सामने आया है। लोग गृह युद्ध, आंतरिक कलह,  गरीबी, तबाही, पर्यावरण संकट, धार्मिक कट्टरता, नृजातीय हिंसा की वजह से अपने मूल  स्थान को छोड़कर ऐसे देशों में जाने के मजबूर हुए हैं, जहाँ पर शांति से अपनी जिंदगी गुजार सकें।

ये हकीकत है कि विकसित देशों की केवल खुद को फायदा पहुँचाने वाले नीतियों ने विश्व के एक बहुत बड़े हिस्से को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। नव उपनिवेशवाद की वजह से मध्य एशिया के देशों को हमेशा मौजूद रहने वाला आंतरिक कलह पैदा हुआ है। इसके मूल में विकसित देशों का आर्थिक लाभ छुपा होता है जबकि गरीब देश की जनता पहचान के आधार पर एक दूसरे लड़ती रहती है।

साल 2018 की वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट के तहत दुनिया भर में इस समय तकरीबन 244 मिलियन लोग प्रवासी के तौर पर मौजूद हैं। यह आबादी दुनिया की कुल आबादी की  तकरीबन 3.3  फीसदी है। साल 2018 में यूरोप और एशिया में दोनों महादेशों  में तकरीबन 150 मिलियन लोग प्रवासी के तौर पर मौजूद है।  यह संख्या कुल प्रवासी आबादी की तकरीबन 62 फीसदी है। ओसनिया यानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड देशों में यह प्रवासियों की संख्या कुल प्रवासियों की तकरीबन 3 फीसदी है।  प्रवासी की तौर पर आये लोग दूसरे देशों में अपना जीवन गुजारने के लिए काम करते हैं। इनका काम करना वहाँ की आम जनता द्वारा उनका रोजगार हड़पना समझा जाता है। उनके जीवन शैली में दखल अंदाजी मानी जाती है। इस भावना को राइट विंग पार्टियां हवा देती है। इस पर ही अपनी राजनीति  करती हैं। और नफरत की बयार जमकर बहती है। इन सारी स्थितियों की जिम्मेदार प्रवासन की मजबूरियां तो होती ही हैं, इसके साथ इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया की खस्ताहाल हो रही अर्थव्यवस्थाएं भी हैं।  जहाँ से रोजगार पैदा होना बंद हो गया है और दुनिया की सारी सम्पति कुछ लोगों के हाथों में कैद होती जा रही है। साल 2015 में हर मिनट तकरीबन 24 लोग काम की तलाश में अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए। यह स्थिति तब और खतरनाक लगती है जब यह आंकड़ा सामने  आता है कि दुनिया के कुल शरणार्थियों में आधी आबादी 18 साल से कम की है। यानी इनके साथ सही से डील नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और खराब होने की सम्भवना है। 

जहाँ तक न्यूज़ीलैण्ड की बात है तो इस पर वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के रे ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ पर लिखते हैं, “यदि हम न्यूज़ीलैंड का इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य देखें, तो भले ही वहां घनघोर राइट विंग पार्टियों की नकारात्मक और ख़तरनाक वैचारिकी सत्ता या संसद में सीधे तौर पर मौजूद नहीं रही है, पर हमेशा ही ऐसे तत्व, हाशिये पर ही सही, पर सक्रिय रहे हैं। लेबर पार्टी की मौजूदा सरकार में घटक दल के रूप में शामिल ‘न्यूज़ीलैंड फर्स्ट’ पार्टी भी ख़ुद को राष्ट्रवादी और पॉपुलिस्ट के रूप में चिह्नित करती है। इस पार्टी की मुख्य विचारधारा प्रवासन नीतियों को कठोर बनाने और क़ानून-व्यवस्था को मज़बूत बनाने पर आधारित है। पिछले महीने ‘एनज़ेड सॉवरेनिटी’ नामक संगठन के बैनर तले संयुक्त राष्ट्र के प्रवासन समझौते का विरोध किया गया था। इस संस्था से जुड़े लोग दूसरे देशों से आनेवाले लोगों, विशेष रूप से शरणार्थियों, पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।”

 इन देशों में प्रवासन के खिलाफ होने वाली हिंसक कार्रवाइयों को घरेलू दक्षिणपंथी आतंकियों की कार्रवाई की जगह साधारण आपराधिक कार्रवाई माना जाता है और आतंकी महज़ एक हत्यारे के तौर पर देखा जाता है। इसे कोई खुलकर आतंकी कार्रवाई नहीं कहता है।  इस तरह से अपना वक्तव्य जाहिर करने के लिए न्यूज़ीलैण्ड की प्रधानमंत्री जसिंडा आर्डर्न की सरहाना की जा रही है।  प्रधानमंत्री कहती हैं, “जिन लोगों को मौत हुई वह शरणार्थी और प्रवासी थे, उन्होंने एक खुशहाल जिंदगी के लिए न्यूज़ीलैण्ड को चुना था।  ये हमारे अपने लोग थे।  जिन लोगों ने यह हमला किया है वे हमारे लोग नहीं है। इस तरह के लोगों के लिए हमारे देश में कोई जगह नहीं है।” 

जब इस घटना को न्यूज़क्लिक के हमारे सहयोगी और वैश्विक मामलों के  जानकार प्रशांत के सामने रखा गया और पूछा गया कि आख़िरकार ऐसा क्या है कि पूरी दुनिया में मुस्लिम लोगों के साथ ऐसी दर्दनाक घटनाएं बार-बार देखने को मिल रही हैं? तो प्रशांत ने कहा कि विकसित देशों ने हमेशा से दुनिया में अपना  साम्राज्य फैलाने की कोशिश की है और इसमें सबसे पहला शिकार मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग रहे हैं। इस समय की नव उपनिवेशवाद की नीतियां तो ऐसी है कि मुस्लिम देश पूरी तरह से विकसित देशों के उपनिवेश बन चुके हैं। इसके साथ बहुत लम्बे समय से पूरी दुनिया में मुस्लिमों को खलनायक के तौर पर पेश करने का कारोबार चल रहा है। यह कारोबार इतना बड़ा हो चुका है कि दुनिया आर्थिक संकट से गुजरी है, और इसके लिए दुनिया में मौजूद राइट विंग पार्टियां मुस्लिमों को दोषी मानती हैं। इसलिए प्रवासन की समस्या तो है ही लेकिन मुस्लिमों का शिकार बनना  इस बात से भी जुड़ा है कि उनके लिए पूरी दुनिया में एक तरह की खलनायक वाली राय भी गढ़ दी गयी है। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

New Zealand's Christchurch
new zealand
terror attack
Hate Crime
migration
anti migration
anti sematic
muslim hate
Anti Muslim
demonistaion of msulim

Related Stories

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

उत्तराखंड : चार धाम में रह रहे 'बाहरी' लोगों का होगा ‘वेरीफिकेशन’

लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन

मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बढ़ती नफ़रत के ख़िलाफ़ विरोध में लोग लामबंद क्यों नहीं होते?

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

दिल्ली पुलिस का ये कहना कि धर्म संसद में हेट स्पीच नहीं हुई, दुर्भाग्यपूर्ण है: पूर्व आईपीएस अधिकारी

नफ़रत के बीच इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम के’’

‘हेट स्पीच’ के मामले 6 गुना बढ़े, कब कसेगा क़ानून का शिकंजा?

बाबा साहेब की राह पर चल देश को नफ़रती उन्माद से बचाने का संकल्प

नफ़रत का डिजिटलीकरण


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    ‘’मुसलमानों के लिए 1857 और 1947 से भी मुश्किल आज के हालात’’
    05 Apr 2022
    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव रहमानी ने आज के दौर को 1857 और 1947 के दौर से ज़्यादा घातक बताया है।
  • भाषा
    ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की
    05 Apr 2022
    यह कुर्की मुंबई में एक 'चॉल' के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन की जांच से संबंधित है। 
  • सोनया एंजेलिका डिएन
    क्या वैश्वीकरण अपने चरम को पार कर चुका है?
    05 Apr 2022
    पहले कोरोना वायरस ने एक-दूसरे पर हमारी आर्थिक निर्भरता में मौजूद खामियों को उधेड़कर सामने रखा। अब यूक्रेन में जारी युद्ध ने वस्तु बाज़ार को छिन्न-भिन्न कर दिया है। यह भूमंडलीकरण/वैश्वीकरण के खात्मे…
  • भाषा
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया
    05 Apr 2022
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने भाई बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त करने के बाद उन्हें नियुक्त किया था।
  • भाषा
    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
    05 Apr 2022
    हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मनोहर लाल द्वारा पेश प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘यह सदन पंजाब विधानसभा में एक अप्रैल 2022 को पारित प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करता है, जिसमें सिफारिश की गई है कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License