NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
निदा नवाज़ : कश्मीर और शेष भारत के बीच कविता का पुल
कश्मीर आज कैसा है, कल कैसा था। ये सब डॉ. निदा नवाज़ की कविताओं में साफ़ दिखता है। वे इसके चश्मदीद गवाह हैं। उनकी ज़्यादातर कविताएं कश्मीर की पीड़ा और विस्थापन की कविताएं हैं।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
06 Nov 2019

कश्मीर आज कैसा है, कल कैसा था। ये सब डॉ. निदा नवाज़ की कविताओं में साफ़ दिखता है। वे इसके चश्मदीद गवाह हैं। उनकी ज़्यादातर कविताएं कश्मीर की पीड़ा और विस्थापन की कविताएं हैं। उनकी कविता अपने आप में अक्स और आईना दोनों हैं। सन् 1963 में कश्मीर के पुलवामा में जन्में डॉ. निदा नवाज़ की अब तक कई किताबें आ चुकी हैं। हिंदी कविता में 1997 में 'अक्षर अक्षर रक्त भरा’, 2015में 'बर्फ़ और आग' और अभी 2019 में 'अँधेरे की पाज़ेब' संग्रह आए। इसके अलावा भी सिसकियां लेता स्वर्ग (डायरी), हिंदी डायरी (उर्दू कविता संग्रह) और अन्य रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपने बहुत सी कश्मीरी कविताओं और कहानियों का भी हिंदी में अनुवाद किया है। आप आकाशवाणी श्रीनगर केंद्र के संपादकीय कार्यक्रम 'आज की बात' का पिछले 30 वर्षों से एक फ्रीलांसर के रूप में लेखन कर रहे हैं। न्यूज़क्लिक ने उन्हें विशेष तौर पर आमंत्रित किया और बातचीत करते हुए आपके लिए कविताएं रिकार्ड कीं।

Kashmir
Article 370
Article 370 Scrapped
Article 35A
Article 35A Scrapped

Related Stories

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

...तो ऐसे होगा कश्मीर का विकास जैसे यूपी, बिहार, झारखंड का हुआ!

सिर्फ़ कश्मीर नहीं, यह समूचा देश तुम्हारा हो...


बाकी खबरें

  • Privatisation
    अजय कुमार
    महाशय आप गलत हैं! सुधार का मतलब केवल प्राइवेटाइजेशन नहीं होता!
    12 Dec 2021
    भारत के नीतिगत संसार में सुधार का नाम आने पर प्राइवेटाइजेशन को खड़ा कर दिया जाता है। इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत की बीहड़ परेशानियां प्राइवेटाइजेशन की वजह से खड़ी हुई गरीबी की वजह से जस की तस बनी…
  • god and man
    शंभूनाथ शुक्ल
    ईश्वर और इंसान: एक नाना और नाती की बातचीत
    12 Dec 2021
    मैंने अगला प्रश्न किया, कि क्या तुम मानते हो कि दुनिया में कोई ईश्वर है? अब वह थोड़ा झिझका और बोला, ‘कोई है तो जो हम सब को बनाता है’। मैंने एक जिज्ञासा उठाई, कि मनुष्य का पैदा होना एक बायोलॉजिकल…
  • unemployment
    रूबी सरकार
    ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ के नारों के साथ शिक्षित युवा रोज़गार गारंटी बिल की उठाई मांग
    12 Dec 2021
    युवाओं का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के 3 माह के भीतर सरकार को नौकरी मुहैया कराना चाहिए अथवा जब तक शिक्षित को नौकरी न मिले, तब तक सरकार की ओर से स्किल्ड लेबर की न्यूनतम मजदूरी के बराबर करीब साढ़े नौ…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    खुशहाली की बजाय बेहाली,संविधान से उलट राजसत्ता और यूपी का रिकार्ड
    11 Dec 2021
    वैश्विक असमानता रिपोर्ट के नये तथ्य और आंकड़े भारत की सामाजिक आर्थिक स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करते हैं. आखिर आजादी के इन चौहत्तर वर्षो में हमारे समाज में इस कदर असमानता और दुर्दशा क्यों बढ़ी है?…
  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: किसानो, कुछ तो रहम करो...लिहाज करो!
    11 Dec 2021
    मनाएं, किसान अपनी जीत का जश्न। बस, सरकार को हराने का शोर नहीं मचाएं। इस शोर से दुनिया भर में छप्पन इंच की छाती वालों की बदनामी होगी सो होगी, देश में मजदूरों-वजदूरों और न जाने किस-किस को कैसा गलत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License