NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश में सपा-आरएलडी के गठबंधन के बाद बीजेपी को नहीं मिलेगा स्पष्ट बहुमत - विशेषज्ञों का दावा
अखिलेश और जयंत की साझेदारी से जाट और मुस्लिम क़रीब आ सकते हैं और इससे बीजेपी का संतुलन ख़राब हो सकता है।
अब्दुल अलीम जाफ़री
26 Nov 2021
Akhilesh Yadav

लखनऊ: मंगलवार को समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बहुचर्चित गठबंधन पर मुहर लग गई। सूत्रों के मुताबिक़ आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी की अखिलेश यादव के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 30-36 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सहमति लग गई है। इन सीटों में मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और बागपत की सीटें शामिल हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा विवादित कृषि कानूनों द्वारा अचानक लिए जाने के बाद इस बैठक में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हालातों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ फोटो साझा करने से पहले कहा कि गठबंधन की औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी। 

अखिलेश यादव ने छोटी और जाति आधारित पार्टियों के साथ गठबंधन का इशारा भी किया है, उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का बड़ी पार्टियों के साथ जुड़ने का अनुभव अच्छा नहीं रहा है (2019 में बहुजन समाज पार्टी और 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन में पार्टी चुनाव लड़ी थी।) बीजेपी के जीतने के बाद कांग्रेस और एसपी ने अपने अलग-अलग रास्ते पकड़ लिए थे। 

श्री जयंत चौधरी जी के साथ बदलाव की ओर pic.twitter.com/iwJe8Onuy6

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 23, 2021

बढ़ते कदम! pic.twitter.com/NqYFSz4MV1

— Jayant Singh (@jayantrld) November 23, 2021

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ना पट्टी में आरएलडी की मजबूत पकड़ है, खासकर यह जयंत चौधरी की किसान आंदोलन में सक्रियता से यह और भी ज़्यादा मजबूत हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक वक़्त बेहद प्रभावशाली रही आरएलडी, अब अपनी ज़मीन को दोबारा तेजी से बनाने का प्रयास कर रही है, इसके लिए वह किसान आंदोलन की लहर को इस्तेमाल करने की कोशिश में है। पार्टी का मुख्य वोटर समाज जाट इस आंदोलन के केंद्र में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के असंतोष में आरएलडी को चुनावों में अपने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नज़र आती है। 

मेरठ में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार वसीम अकरम त्यागी का कहना है कि एसपी और आरएलडी का गठबंधन जाटों और मुस्लिमों को एकसाथ ला सकता है, जिससे इलाके में बीजेपी का संतुलन खराब हो सकता है। 

उन्होंने न्यूज़क्लिक से कहा, "2013 के मुजफ्फरनगर दंगों ने हिंदुओं, खासकर जाटों और मुस्लिमों के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संबंधों को खराब कर दिया था। इससे जाट वोटर बीजेपी और मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी की तरफ भी खिसक गए और इलाके में ध्रुवीकरण बढ़ गया। लेकिन किसान आंदोलन के बाद, खासकर उन इलाकों में जहां जाट प्रभुत्वशाली हैं, वहां बीजेपी नेता जाने से बच रहे हैं। जयंत के उभार के चलते बीजेपी का नुकसान हो रहा है।"

2017 के चुनाव और गठित पर त्यागी कहते हैं, "सिवलखास विधानसभा को ही देखिए, जो मेरठ संभाग के तहत आती है, जहां जाट प्रभुत्वशाली स्थिति में हैं। 2017 में बीजेपी इस सीट को 6000 मतों से जीतने में कामयाब रही थी। इसी तरह बीजेपी सिर्फ़ 150 वोटों से मीरापुर विधानसभा भी जीती थी, जो मुजफ्फरनगर जिले में पड़ती है। दोनों ही सीटों पर एसपी दूसरे पायदान पर रही थी। नए गठबंधन और जाटों के बीजेपी से दूर होने से अखिलेश यादव को फायदा होगा।" 

त्यागी ने यह भी कहा कि अगर जाट प्रत्याशी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र होकर लड़ते हैं,  तो वे जीतने की स्थिति में नहीं होंगे। लेकिन वे मत हस्तांतरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, "टिकैत बंधुओं को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रभाव है और लोग उनके खिलाफ़ एक शब्द नहीं सुन सकते। इसी तरह बीजेपी के पाले में रहे जाट अब जयंत के पाले में आ रहे हैं और अपने ट्रेक्टर महापंचायत में भेज रहे हैं।" 

त्यागी का कहना है कि मुजफ्फरनगर दंगों के पहले मुस्लिम-जाट एकता को इस तथ्य से समझा जा सकता है, कि जाटों ने कई मुस्लिम नेताओं को चुना, जिनमें मुस्ताक चौधरी को एमएलसी बनाया जाना और महमूद मदनी को राज्यसभा सदस्य बनाया जाना शामिल है। त्यागी कहते हैं,"किसान आंदोलन के बाद और चूंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन चुका है, लोगों में एक बदलाव देखा जा रहा है, बीजेपी से 75 फ़ीसदी जाट नाराज़ हैं और वे एसपी-आरएलडी के गठबंधन की तरफ देख रहे हैं। बीजेपी के लिए अब स्पष्ट बहुमत संभव नहीं है।"

image

एक दूसरे राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि राकेश और नरेश टिकैत ने जाटों और मुस्लिमों को 8 साल बाद मुजफ्फरनगर महापंचायत में साथ ला दिया, इसमें उन्होंने 2013 को जख़्मों पर मलहम लगाने की बात भी कही है। मुस्लिम और जाट मतदाताओं की एकजुटता और बीजेपी के खिलाफ़ नाराज़गी, समाजवादी पार्टी के पक्ष में जा सकती है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

No Clear Majority for BJP in UP Polls after SP-RLD Alliance, say Experts

Uttar pradesh
UP Assembly Polls
SAMAJWADI PARTY
Rashtriya Lok Dal
SP
RLD
Jayant Chaudhary
AKHILESH YADAV
muzaffarnagar riots
meerut
mathura
Bulandshahr
aligarh
Bagpat
Jats
Muslims
Western UP
farmers protest
Kisan Mahapanchayat
pre-poll alliance
SP-RLD alliance
BSP
BJP
Congress

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License