NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
"मौन-विरोध विरोध का एक रूप, लेकिन मौन एक विकल्प नहीं”: पत्रकार संगठनों ने पत्रकारिता पर हमले के खिलाफ़ किया प्रदर्शन
इस प्रदर्शन का आह्वान प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, भारतीय महिला प्रेस कोर और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने किया था। पत्रकारों ने काले फीते लगाकर और पोस्टरों द्वारा अपना विरोध दर्ज किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Feb 2021
त्रकार संगठनों ने पत्रकारिता पर हमले के खिलाफ़ किया प्रदर्शन

देश में लगातार स्वतंत्र पत्रकारिता पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ आज प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के बाहर पत्रकारों ने मौन विरोध प्रदर्शन किया। वे काले फीते लगाकर और पोस्टरों द्वारा अपना विरोध दर्ज करवा रहे थे। इस प्रदर्शन का आह्वान प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, भारतीय महिला प्रेस कोर और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने किया था। इस प्रदर्शन में राजदीप सरदेसाई, आशुतोष, परंजॉय, उर्मिलेश, टी के राजलक्ष्मी और सुजाता जैसे कई जाने-माने पत्रकारों ने भी शिरकत की और उन्होंने पत्रकारिता पर लगातार हो रहे हमलों की निंदा की।

आपको बता दें इस विरोध प्रदर्शन का आव्हान हाल ही में स्वतंत्र न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सौ घंटे से अधिक के छापे, मनदीप पुनिया को काम करने के दौरान गिरफ़्तार करने और वायर के संपादक सिद्धर्थ वर्धराजन और कई अन्य पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह के मुक़दमे दायर होने के आलोक में दिया गया था।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने पत्रकारिता और स्वतंत्र आवाजों पर सरकारी तंत्रों द्वारा हो रहे हमले की निंदा की।

विरोध प्रदर्शन में उपस्थित, प्रेस क्लब के सदस्य के० अमरनाथ ने कहा: “यह सरकार आलोचना और असंतोष की आवाज़ को कुचल रही है। न्यूज़क्लिक उन लोगों को आवज़ दे रहा है जिन्हें मीडिया ने अपने स्पेस से बाहर कर दिया है। जब कोई न्यूज़ पोर्टल ऐसा करने का प्रयास करता है तो उसकी आवाज़ को बंद करने के उपाय किए जा रहे हैं। लोगों को यह बताने का इरादा है कि सिर्फ सत्तारूढ़ की कथा चलेगी, और उसके खिलाफ लोगों को चुप करा दिया जाएगा। मैं यहां उसके खिलाफ खड़ा हूं, इसलिए मैं आज यहां हूं।

पिछले हफ्ते, न्यूज़क्लिक के कार्यालय और इसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के घर और उसके कई सदस्यों पर ईडी ने छापा मारा था। मीडिया बिरादरी के पत्रकारों पर छापेमारी और अन्य गिरफ्तारी को स्वतंत्र पत्रकारिता, जो ज़मीनी आंदोलनों की आवाज़ बन रही है, पर हमला माना जा रहा है।

प्रेस स्वतंत्रता स्वतंत्र तालिका पर प्रकाश डालें तो “भारत में पत्रकारों और अन्य असंतुष्ट आवाज़ों के लिए उत्पीड़न का डर बढ़ रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तहत, केवल पांच वर्षों में, रिपोर्टरों के बिना रिपोर्टर्स इंडिपेंडेंस इंडेक्स में भारत का स्थान 2015 से 2020 में 136 वें स्थान से गिरकर 142 वें स्थान पर आ गया। भारत अपने अधिकांश पड़ोसी देशों से पीछे है, जिनमें म्यांमार (139), अफगानिस्तान (122) भूटान (67), नेपाल (112) और श्रीलंका (127), शामिल हैं।"

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की महसचिव ने कहा, “हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करते हैं, लेकिन आज हम उन प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला कर रहे हैं जो हाशिए पर रहने वाले लोगों की आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा यह सिर्फ एक आउटलेट को शांत करने का प्रयास नहीं है, लेकिन उससे बहुत अधिक है। सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता करना मुश्किल कर दिया है।”

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, जो हाल ही में सत्ता के हमले का शिकार हुए थे। उन्होंने कहा: "मौन-विरोध विरोध का एक रूप है लेकिन मौन एक विकल्प नहीं है।"

कई वरिष्ठ सदस्यों के बीच मौजूद, आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य और पत्रकार आशुतोष ने कहा: “ये छापेमारी सिर्फ न्यूज़क्लिक या किसी एक संस्थान पर नहीं बल्कि पूरी बिरादरी को एक संदेश भेजना था। सरकार यह कहना चाहती है कि अगर आप भी ऐसा ही करेंगे तो आज न्यूज़क्लिक है कल यह आप हो सकते हैं। लेकिन हमारे लिए, प्रेस स्वतंत्रता पर हमले का विरोध करने का यह गांधीवादी तरीका है। प्रेस का काम सच्चाई रिपोर्ट करना है। जो हमें दिखता है, उसे रिपोर्ट करना हमारा धर्म है। एक पत्रकार का एकमात्र काम सच्चाई की रिपोर्ट करना है।”

Delhi Union of Journalists
Indian Women's Press Corps
Press club of india
journalist
Press freedom
Newsclick
Newsclick ED Raid

Related Stories

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव

पत्रकार हत्याकांड- कैसे मेडिकल माफिया का अड्डा बन गया छोटा सा कस्बा बेनीपट्टी?

यूपी के चंदौली में 50 दिन से धरने पर बैठा है एक पत्रकार, लेकिन कोई सुनवाई नहीं

एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब, सीपीजे ने न्यूज़क्लिक पर ईडी की कार्रवाई की निंदा की

न्यूज़क्लिक पर सरकारी छापेमारी : हम ख़ामोश नहीं होंगे

यूपी : नहीं मिली सदफ़ ज़फ़र को ज़मानत, पुलिस पर मारने-पीटने का आरोप

क्या यूपी पुलिस नाकामी छिपाने के लिए छात्रों, पत्रकारों, एक्टविस्ट को निशाना बना रही है?


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM
    17 Mar 2022
    हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि एक करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य में मुस्लिम आबादी का 35 प्रतिशत हैं, वे अब अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि बहुसंख्यक हैं।
  • सौरव कुमार
    कर्नाटक : देवदासियों ने सामाजिक सुरक्षा और आजीविका की मांगों को लेकर दिया धरना
    17 Mar 2022
    कलबुर्गी, विजयपुरा, विजयनगर, रायचूर, दवेंगेरे, बागलकोट, बल्लारी, यादगीर और कोप्पल ज़िलों की लगभग 1500 देवदासियों ने पुनर्वास की मांग को लेकर बेंगलुरु शहर में धरना दिया।
  • UKRAIN
    क्लाउस उलरिच
    गेहूं के निर्यात से कहीं बड़ी है यूक्रेन की अर्थव्यवस्था 
    17 Mar 2022
    1991 में सोवियत संघ से स्वतंत्रता मिलने के बाद, यूक्रेन का आर्थिक विकास भ्रष्टाचार, कैपिटल फ्लाइट और सुधारों की कमी से बाधित हुआ। हाल ही में हुए सुधारों से अब देश में रूस के युद्ध की धमकी दी जा रही…
  • भाषा
    दिल्ली हिंसा में पुलिस की भूमिका निराशाजनक, पुलिस सुधार लागू हों : पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह
    17 Mar 2022
    ‘पुलिस के लिये सबसे सशक्त हथियार नागरिकों का भरोसा एवं विश्वास होता है । नागरिक आपके ऊपर भरोसा तभी करेंगे जब आप उचित तरीके से काम करेंगे । ऐसे में लोगों को साथ लें । सामान्य जनता के प्रति संवेदनशील…
  • तान्या वाधवा
    कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के दौड़ में गुस्तावो पेट्रो
    17 Mar 2022
    अलग-अलग जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक़ कोलंबिया में आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए प्रगतिशील नेता गुस्तावो पेट्रो पसंदीदा उम्मीदवार हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License