NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेलंगाना: वित्तीय स्थिति की उदासीन तस्वीर
टीआरएस शासन में ऋण और ब्याज़ भुगतान का बढ़ना जारी है, फिर भी 2016-17 में राजकोषीय घाटा लेखांकन के गंभीर उल्लंघन करते हुए 2,500 करोड़ रुपये ही दिखाया गयाI
पृथ्वीराज रूपावत
12 Nov 2018
Translated by महेश कुमार
TRS government

तारीख 2 जून, 2014 को आंध्र प्रदेश के आधिकारिक विभाजन के बाद, तेलंगाना ने के. चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सरकार के तहत वर्ष 2014-15 में 7,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व के साथ शुरू की थी। चार साल बाद कई रिपोर्ट बताती हैं कि धोखाधड़ी और गबन ने राज्य की वित्तीय प्रणाली के लिए खतरे खड़े कर दिए हैं।

न्यूज़क्लिक  पहले बता चुका है कि टीआरएस शासन के तहत पिछले चार वर्षों में शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पर राज्य ने कैसे काम किया है। जब राज्य में वित्त के प्रबंधन की बात आती है तो राज्य सरकार में अनियमितताओं के रिकॉर्ड टूट जाते हैं। शायद बढ़ते राजस्व की भूलभुलैया को पेश करने के चक्कर में, सरकार ने राजस्व अतिरिक्त/अधिशेष को 2016-17 में 6,778 करोड़ रुपये बताया था, जबकि वास्तविक राजस्व अधिशेष केवल 1,386 करोड़ रुपये था, इस साल की शुरुआत में जारी एक सीएजी (भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक) की रिपोर्ट ने इसका खुलासा किया है।

इसी तरह, लेखा परीक्षकों ने पाया कि 2016-17 के दौरान राज्य के राजकोषीय घाटे को 2,500 करोड़ कम करके दिखाया गया है, यह लेखांकन का बहुत ही गंभीर उल्लंघन।

राज्य ने बजट अनुमानों और वास्तविक व्यय के बीच असमान अंतर को बनाए रखा है। 2016-17 के दौरान, पूँजीगत व्यय का अनुमान लगाया गया 29,313 करोड़ रुपये, जो वास्तव में 33,371 करोड़ रुपये हो गया - लगभग 4,000 करोड़ अतिरिक्त रुपयेI इसी तरह 2014 से 2016 के बीच भी राज्य ने अपने आबंटित 6,184 करोड़ रुपये से ज़्यादा व्यय कियाI इस पर सवाल उठता है कि यह भारी व्यय कहां गया?

सीएजी ने इंगित किया है कि खराब परियोजना कार्यान्वयन और धन के उपयोग न किये जाने के कारण, सरकार की कई नीतिगत पहल या तो पूरी नहीं की गयी हैं, या फिर उन्हे आंशिक रूप से निष्पादित किया गया है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उप-योजनाओं के तहत आवंटित धन पर विचार करें। टीआरएस सरकार इन महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत आवंटित धन के बड़े हिस्से का उपयोग करने में असफल रही है। 2016-17 के दौरान, अनुसूचित जाति उप-योजना की लगभग 60 प्रतिशत निधि और एसटी उप-योजना की 57 प्रतिशत निधि को बिना इस्तेमाल किए छोड़ दिया गया। यह कहानी सभी राज्यों में उप-योजनाओं के मामले में एक जैसी है।

बजट और खर्च

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 2015-16 के दौरान तेलंगाना के विकास सम्बन्धी व्यय, कुल व्यय का 72.8 प्रतिशत था। 2016-17 में यह थोड़ा बढ़कर 75.4 प्रतिशत हो गया। 2017-18 के बजट अनुमानों के मुताबिक यह 74.9 प्रतिशत हो गया है।

TRS1.jpg

स्रोत: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया

जैसा कि उपरोक्त तालिका बताती है, राज्य ने महत्वपूर्ण शिक्षा क्षेत्र पर अपने व्यय को कम कर दिया है, जबकि चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के कुल खर्च में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि इसका हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत रहा है। 2017-18 के दौरान सरकार ने सामाजिक क्षेत्र के व्यय पर कुल व्यय का 45.7 प्रतिशत खर्च किया था, लेकिन 2018-19 के बजट अनुमानों में इसमें 42.6 प्रतिशत तक की गिरावत आई है।

कर्ज़ और ब्याज़ का भुगतान

तेलंगाना को कुल ऋण का 49 प्रतिशत चुकाना होगा, जो करीब अगले 7 वर्षों में 56,388 करोड़ रुपये बैठती है, सीएजी ने इसका खुलासा किया है। राज्य सरकार का कर्ज वर्षों से काफी हद तक बढ़ गया है। जबकि ऋण रुपये था। जबकि 2015 में 72,660 करोड़ रुपये था, यह अब 2018 में बढ़कर 1,53,200 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य सरकार ने 2016-17 में 21,860 करोड़ रुपये और 2017-18 में 24,600 करोड़ रुपये बाजार से उधार उठाने के माध्यम से कर्ज़ की राशि बढ़ा दी है। ऋण अदा करने में वृद्धि ने ब्याज़ भुगतान पर राज्य के व्यय में वृद्धि कर दी है। राज्य सरकार ने 2015-16 में ब्याज़ भुगतान पर 7,557.5 करोड़ रुपये और 2016-17 में 7,706.4 करोड़ रुपये खर्च किए और 2017-18 के लिए बजट अनुमानों के अनुसार, कुल ब्याज़ भुगतान 11,138.6 करोड़ रुपये हो जाएगा।

टीआरएस शासन ने गैर-निष्पादित निवेश पर सार्वजनिक धन कओ निवेश करने की प्रवृत्ति भी शुरू कर दी है। 2016-17 के दौरान, राज्य सरकार ने वैधानिक निगमों, सरकारी कंपनियों, संयुक्त स्टॉक कंपनियों और सहकारी समितियों में अपने निवेश पर 0.54 प्रतिशत की कम वापसी हुयी। इन निवेशों को मुख्य रूप से 7.4 प्रतिशत की ब्याज़ पर उधार के माध्यम से वित्त पोषित किया गया था, जो अब बढ़कर 2016-17 में 13,075 करोड़ रुपये हो गया है।

चूंकि प्रमुख संकेतक ऊपर दर्शाए गए हैं, टीआरएस शासन के तहत सबसे कम उम्र वाले राज्य को पहले से ही अपने अस्तित्व के पहले चार वर्षों में वित्तीय चूक की जटिलताओं में उलझा दिया है।

Telangana
Telengana elections 2018
Assembly elections 2018
TRS
KCR

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

यूपी: दाग़ी उम्मीदवारों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, लेकिन सच्चाई क्या है?

2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य

तेलंगाना की पहली सुपर थर्मल पावर परियोजना को हरी झंडी देने में अहम मुद्दों की अनदेखी?

कोविड-19: लॉकडाउन की मार से बुरी तरह से बेहाल ओला-उबर चालकों ने वित्तीय सहायता की मांग की है 

यूनियन ने कहा यूपी में चुनाव ड्यूटी पर 1621 की मौत, तेलंगाना में किसानों का प्रदर्शन और अन्य ख़बरें

लोकसभा, विधानसभा उप चुनावों का क्या रहा परिणाम  

कोविड-19 : अस्पतालों में भारी भीड़ों से तेलुगू सरकारें ख़ौफ़ में 

तेलंगाना: नागार्जुन सागर उपचुनाव में टीआरएस का पलड़ा भारी


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License