NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने बढ़ते विरोध के बीच अपने सैनिकों को स्थानांतरित करने का फैसला किया
हालांकि आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है लेकिन इस क्षेत्र में इराकी विद्रोहियों की मजबूत उपस्थिति के मद्देनज़र अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित शिविरों में स्थानांतरित करना महत्वपूर्ण कारणों में से एक माना जाता है।
पीपल्स डिस्पैच
17 Mar 2020
अमेरिका ने बढ़ते विरोध के बीच अपने सैनिकों को स्थानांतरित करने का फैसला किया
Image courtesy: bbc

अमेरिका ने इराक में तीन प्रमुख ठिकानों को खाली करने और उन्हें इराकी सेना को सौंपने का फैसला सोमवार 16 मार्च को किया है। अमेरिकी सेना इन ठिकानों को छोड़ देगी और अपने सैनिकों शेष पांच ठिकानों पर स्थानांतरित कर देगी। तीन ठिकानों की पहचान इराक-सीरिया सीमा के पास अल-क़इम, क़ायरा एयरफ़ील्ड वेस्ट और किरकुक के रूप में की गई है।

प्रेस टीवी के अनुसार इराकी सेना ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा है और शनिवार 14 मार्च को की गई कई पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) या हसद अल-शाबी शिविरों पर अमेरिकी हमलों की निंदा की है।

पीएमएफ शिविरों पर हमले ताजी शिविर पर हुए हमलों के बाद किए गए थे जिसमें 3 विदेशी सैनिकों की मौत हो गई थी। इराकी सेना द्वारा जारी बयान के अनुसार अमेरिकी सैनिकों पर हमले सरकार की अनुमति के बिना इराक के अंदर हमले करने के क्षमा योग्य नहीं हो सकते।

यूएस सेक्रेट्री ऑफ स्टेट माइक पोम्पिओ ने पहले किसी भी हमले का बदला लेने के अपने अधिकारों का दावा किया है। हालांकि, शिविरों से सैनिकों को वापस लेने का सोमवार का निर्णय इराक में अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत है।

अमेरिका द्वारा 3 जनवरी को कमांडर अबू मेहदी अल-मुहांदिस की हत्या के बाद पीएमएफ ने कई मौकों पर अमेरिकी सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा है।

5 जनवरी को इराकी संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें सभी विदेशी सैनिकों को देश छोड़ने के लिए कहा गया था।

अमेरिका और अन्य विदेशी सैनिकों ने तब से अपने ठिकानों पर कई रॉकेट हमलों का सामना किया और इन हमलों में कई सैनिक मारे गए और घायल हुए।

अमेरिका ने वर्ष 2003 में इराक पर आक्रमण किया और बड़ी संख्या में अपने सैनिकों को वहां तैनात किया। हालांकि बाद में अधिकांश सैनिकों को वापस बुला लिया गया था लेकिन उनकी उपस्थिति को 2014 में इस्लामिक स्टेट या आईएसआईएस के उदय के बाद बढ़ा दिया गया। देश में इस समय लगभग 5200 अमेरिकी सैनिक हैं। 2017 में इस्लामिक स्टेट की हार के बाद से इराक में सैनिकों की उपस्थिति एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

 साभार : पीपल्स डिस्पैच

America
Iraq
US-Iraq
International news
US Army
Donand Trump

Related Stories

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

अमेरिका में महिलाओं के हक़ पर हमला, गर्भपात अधिकार छीनने की तैयारी, उधर Energy War में घिरी दुनिया

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

दुनिया भर की: सोमालिया पर मानवीय संवेदनाओं की अकाल मौत

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें

यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    कच्चे तेल की तलाश की संभावनाओं पर सरकार ने उचित ख़र्च किया है?
    08 Apr 2022
    कच्चे तेल को लेकर भारत की स्थिति क्या है? क्या वाक़ई ऐसा है कि कच्चा तेल निकालने से जुड़े वह सारे उपाय किये जा चुके हैं, जिसके बाद यह कहा जा सके कि भारत में कच्चे तेल उत्पादन को लेकर कोई बहुत बड़ी…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,109 नए मामले, 43 मरीज़ों की मौत
    08 Apr 2022
    देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 492 रह गयी है।
  • कुशल चौधरी, गोविंद शर्मा
    नोएडा की झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजना ख़त्म, अब भी अधर में लटका है ग़रीबों का भविष्य
    08 Apr 2022
    एक दशक तक ख़राब तरीक़े से लागू किये जाने के बाद झुग्गी पुनर्वास योजना ख़त्म हो गयी है। इस योजना के तहत नये बने फ्लैटों में से महज़ 10% फ़्लैट ही भर पाये हैं।
  • अब्दुल रहमान
    बुका हमले के बावजूद रशिया-यूक्रेन के बीच समझौते जारी
    08 Apr 2022
    रूस ने आरोप लगाया है कि पश्चिमी देशों और मीडिया ने जानबूझकर उन तथ्यों की अनदेखी की है जो बुचा हत्याओं में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हैं क्योंकि उनका एकमात्र उद्देश्य शांति वार्ता में अब तक हुई…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मानवाधिकार के असल मुद्दों से क्यों बच रहे हैं अमित शाह?
    07 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं गृह मंत्री अमित शाह की जिसमे उन्होंने लोक सभा में मानवाधिकार की बात उठाई। अभिसार इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License