NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
ओडिशा: अयोग्य शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होंगे शिक्षक
शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध 8 कॉलेजों में 62 फैकल्टी हैं, जिनमें से सिर्फ 20 रेगुलेटरी बॉडी की योग्यता के मानदंडों को पूरा करते हैं।
सुबोध वर्मा
07 May 2022
Translated by महेश कुमार
Teachers
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: BT

केंद्र सरकार द्वारा संचालित रेगुलेटरी बॉडी (नियामक संस्था) द्वारा स्पष्ट रूप से बताए गए पात्रता के मानदंडों के बावजूद ओडिशा में राज्य सरकार द्वारा संचालित आठ शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज अयोग्य फैकल्टी के साथ काम कर रहे हैं और कई पद खाली भी पड़े हैं। कई शिक्षकों के पास बी.एड की डिग्री नहीं है फिर भी वे छात्रों को बी.एड पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं। ये कॉलेज छात्रों को अभ्यास-संबंधी पाठयक्रम सहित विभिन्न विषयों और शिक्षण विधियों में गहन प्रशिक्षण प्रदान करके शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।

राजस्थान के एक सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ जितेंद्र शर्मा ने बताया है कि, "यदि भविष्य के शिक्षक खुद कम योग्य शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होते हैं, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि वे छात्रों की आने वाली पीढ़ियों को किस गुणवत्ता की शिक्षा देंगे।” इन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कई आवेदन किए और जवाब हासिल किए जिससे उक्त शिक्षा की दयनीय स्थिति का पता चला है।

ये आठ सरकारी कॉलेज है जो ओड़िशा में बी.एड और एम.एड. डिग्री प्रदान करते हैं। नतीजतन, ये अत्यधिक महत्वपूर्ण संस्थान हैं और प्रमुख संस्थान माने जाते हैं। संकाय या फैकल्टी सदस्यों की संख्या और योग्यता की स्थिति का विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

यह स्थिति कई जगहों पर शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में हो रही अराजकता और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक संकेत देता है। वॉक-इन इंटरव्यू के बाद कॉलेजों में गेस्ट शिक्षकों को पढ़ाने के लिए आमंत्रित करने की खबरें आम हैं, जबकि मानदंड स्पष्ट रूप से कहते हैं कि पूर्णकालिक और योग्य शिक्षकों को नियुक्त करने की जरूरत है। सिलाई और लकड़ी के काम के लिए शिल्प प्रशिक्षकों को संबद्ध विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्त किया गया है, भले ही ये क्षेत्र शिक्षण के लिए निर्धारित नहीं हैं! सैकड़ों छात्रों को अपने करियर में पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित करके ये कॉलेज समाज में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, यहां उस भूमिका की धज्जियां उड़ाकर मानदंडों का उलंघन किया जा रहा है।

पात्रता के मानदंड क्या हैं?

शिक्षकों से संबंधित प्रशिक्षण कॉलेजों को दिल्ली में मौजूद मुख्यालय जो शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है और जिसका एक अखिल भारतीय नियामक निकाय, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) है, के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह अंतिम और एकमात्र प्राधिकरण है जो ऐसे कॉलेजों को शिक्षकों के लिए विस्तृत पात्रता शर्तों और कॉलेज में उपलब्ध भौतिक स्थान, छात्रों की योग्यता, उपकरण उपलब्धता और विविध पहलुओं सहित अन्य मानदंडों के आधार पर मान्यता देता है। एनसीटीई की चार क्षेत्रीय समितियां हैं – और ये समितियां उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी के माध्यम से कार्य करती है। ओडिशा पूर्वी क्षेत्रीय समिति (ईआरसी) के अंतर्गत आता है।

शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए पात्रता शर्तें 2014 में राजपत्र में अधिसूचित विनियमों की धारा 5.2 में दी गई हैं। वे निम्नलिखित हैं:

सरल भाषा में, ये मानदंड क्या कहते हैं कि शिक्षकों के पास स्नातकोत्तर डिग्री और मास्टर ऑफ एजुकेशन (एम.एड.) डिग्री या, उपरोक्त (बी) के लिए, शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री (एमए॰एड) होनी चाहिए और शिक्षा स्नातक (बी.एड.) की डिग्री होनी चाहिए। उपरोक्त सभी डिग्रियों में आवेदक के कम से कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

शारीरिक शिक्षा, दृश्य कला और प्रदर्शन कला जैसे विशेष पाठ्यक्रमों के लिए पात्रता शर्तें निम्न हैं:

आरटीआई से पता चला कि इन कॉलेजों के कई शिक्षकों ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया है। इसके अलावा, अधिकांश कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा, दृश्य कला या प्रदर्शन कला के शिक्षक नहीं हैं। शर्त यह है कि ऐसे शिक्षकों को एनसीटीई से मान्यता प्राप्त करने के लिए कॉलेजों में नियुक्त किया जाना चाहिए।

एनसीटीई ऐसे कॉलेजों को कैसे मान्यता देती है?

इस विचित्र स्थिति की पिछली कहानी और भी चौंकाने वाली है। 2020 में, इन कॉलेजों की मान्यता, क्षेत्रीय समिति द्वारा मानदंडों के ठीक ऐसे ही और अन्य उल्लंघनों के लिए रद्द कर दी गई थी। जैसा कि इन मामलों में होता है, कॉलेजों से कहा गया था कि यदि वे अपनी मान्यता बहाल करना चाहते हैं तो उल्लंघनों को ठीक करें।

इसके बाद, कॉलेजों ने जुलाई 2021 में मान्यता की बहाली के लिए आवेदन किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि उनके द्वारा जमा किए गए संकाय के प्रोफार्मा विवरण अभी भी नाकाफी थे। फिर भी, क्षेत्रीय समिति ने इन उल्लंघनों से आंखें मूंद लीं और अगस्त 2021 में मान्यता की बहाली की अनुमति दी। यह सब रिकॉर्ड की बात है।

संक्षेप में, एनसीटीई ने, अपनी क्षेत्रीय समिति के माध्यम से, कॉलेजों को कार्य करने के लिए अधिकृत किया है, भले ही वे एनसीटीई के मानदंडों का उल्लंघन करते हैं जो सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होते हैं और इस प्रकार इसके पीछे कानून की ताक़त होती है।

यह बदलाव कैसे और क्यों हुआ - कोई नहीं जानता। इस बीच, कॉलेज ऐसे शिक्षक बनाने के लिए अयोग्य शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग करना जारी रखे हुए है जो आने वाले वर्षों में सैकड़ों छात्रों को पढ़ाएंगे।

डॉ शर्मा का कहना है कि इस तरह का उल्लंघन कथित तौर पर अन्य जगहों पर भी होता है। उन्होंने इसके लिए "राजनीतिक तिकड़म" को जिम्मेदार ठहराया है।

शर्मा कहते हैं कि, “यह एक मानव निर्मित नाकामी है। सभी एजेंसियों, जिनसे विनियमों के पालन का आश्वासन देने की अपेक्षा की जाती है, ने जानबूझकर अपनी आंखें मूंद ली हैं। इन कॉलेजों की मान्यता तुरंत वापस ली जानी चाहिए और मान्यता की बहाली और संबद्धता देने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्यवाई होनी चाहिए”।

आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज नीचे संलग्न हैं:

Hindi Teacher TE PoS.pdf117.38 KBFile

DPIASE BEHRAMPUR PoS.pdf167.5 KB

ParticularsofStaffDRPMIASE.pdf190.04 KB

RadhaNathIASEPoS.pdf190.49 KB

NKCCTE Angul PoS.pdf1.09 MB

CTE Bolangir PoS.pdf831.45 KB

Nalini Devi PoS.pdf541.06 KB

PoS CTE BALASORE .pdf1.97 MB

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Odisha: Unqualified Teachers Train Would-Be Teachers

RTI
National Council for Teacher Education
MINISTRY OF EDUCATION
school teachers
Unqualified Faculty

Related Stories

इस साल और कठिन क्यों हो रही है उच्च शिक्षा की डगर?

निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या काफी कम : रिपोर्ट

शिक्षा मंत्रालय रिपोर्ट, महामारी का आम आदमी की जेब पर असर और अन्य ख़बरें

दिल्ली : विश्वविद्यालयों को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में  लिया

“सर्वोत्कृष्टता के संस्थान” या “बहिष्कार के संस्थान”

दिल्ली : लॉकडाउन में वेतन में हुई देरी से 20 हज़ार गेस्ट टीचर परेशान!

बिहार : लगभग 4.5 लाख शिक्षक हड़ताल पर लेकिन सरकार को फर्क नहीं पड़ रहा!

बिहार में नियोजित शिक्षक की आत्महत्या ने खड़े किए कई सवाल

गेस्ट टीचर्स ने अब सीधे केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला, राजनाथ के घर का होगा घेराव


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    लखीमपुर खीरी कांड : एसआईटी ने दाखिल किया 5000 पन्नों का आरोप पत्र
    03 Jan 2022
    आपको बता दें कि 3 अक्टूबर, 2021 को गाड़ियों से कुचलकर चार किसानों की जान लेने के मामले में एसआईटी को 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना था। आज आख़िरी ही दिन था। इसका स्वागत किया जाना चाहिए...हालांकि…
  • energy
    प्रबीर पुरकायस्थ
    यूरोप में गैस और बिजली के आसमान छूते दाम और भारत के लिए सबक़
    03 Jan 2022
    सर्दियों में यूरोपीय यूनियन में गैस के दाम आकाश छूने लगते हैं, जैसा कि पिछले साल हुआ था और इस बार फिर से हुआ है।
  • Savitribai Phule
    राज वाल्मीकि
    मौजूदा दौर में क्यों बार बार याद आती हैं सावित्री बाई फुले
    03 Jan 2022
    जयंती पर विशेष: आज सावित्री बाई को इसलिए भी याद किया जाना जरूरी है कि जिस मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़कर सावित्री बाई फुले ने औरतों के लिए जगह बनाई थी, वही आज दोबारा हावी हो रही है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    सावधान : देश में तीन महीने बाद कोरोना के 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए
    03 Jan 2022
    देश में कोरोना के मामलों में बहुत तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के 33,750 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वहीं ओमीक्रॉन के मामलो की संख्या बढ़कर 1,700 हो गयी है।
  • UNEMPLOYMENT
    सुबोध वर्मा
    बिना रोज़गार और आमदनी के ज़िंदा रहने को मजबूर कई परिवार
    03 Jan 2022
    नवीनतम सीएमआईई आंकड़ों से पता चलता है कि काम करने वाले दो सदस्यों वाले परिवारों की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है। इसका मतलब है कि लोग बहुत कम आय पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License