NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ओडिशा माली पर्वत खनन: हिंडाल्को कंपनी का विरोध करने वाले आदिवासी एक्टिविस्टों को मिल रहीं धमकियां
ओडिशा के आदिवासी और दलित किसान, पर्यावरणीय व धार्मिक कारणों के चलते माली पर्वत में होने वाले खनन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने खनन कंपनी की सार्वजनिक सुनवाई का विरोध किया तो कंपनी के लठैतों ने गुंडागर्दी की। आदिवासी एक्टिविस्टों को भी जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
सुमेधा पाल
25 Sep 2021
Odisha
Image Courtesy: The Caravan

ओडिशा के आदिवासी और दलित किसान पिछले दो दशकों से उनके पवित्र स्थल माली पर्वत पर बॉक्साइट खनन का विरोध कर रहे हैं। 270 एकड़ में फैला माली पर्वत दक्षिण ओडिशा के कोरापुट जिले में पड़ता है। साल 2007 में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ के खनन लाइसेंस की अवधि ख़त्म हो गई थी। इसके बाद आदिवासियों के कड़े विरोध के चलते आगे खनन रोक दिया गया था। अप्रैल में कंपनी के खनन लाइसेंस की अवधि को 50 साल और बढ़ा दिया गया और कंपनी ने नई पर्यावरण अनुमति के लिए आवेदन किया है।

जब जनजातीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 22 सितंबर को कंपनी की सार्वजनिक सुनवाई का विरोध किया, तो उनमें से कुछ को जान से मारने की धमकी दी गई। सामाजिक कार्यकर्ता श्रंया नायक ने न्यूज़क्लिक को बताया, "खनन की अनुमति देने वाले पर्यावरणीय प्रभाव विश्लेषण (EIA) के खिलाफ़ 325 प्रतिक्रियाएं आईं थीं।"

नायक ने हमें बताया कि कैसे सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने तय किया कि उसमें किसी भी तरह का विरोध ना हो। नायक कहती हैं, "डोलियामाबा गांव के लोग सुनवाई में हिस्सा लेने के लिए तैयार थे। प्रस्तावित खनन के खिलाफ़ करीब़ 700 लिखित आपत्तियां थीं। लेकिन पुलिस, कंपनी के अधिकारियों और भाड़े के गुंडों ने कार्यक्रम स्थल तक जाने वाली तीन सड़कों को बंद कर दिया। अधिकारियों ने तय समय 11 बजे के पहले बैठक शुरू कर दी, ताकि किसी तरह का कोई विरोध ना हो।"

ये भी पढ़ें: माली पर्वत बचाओ: अपनी जमीन बचाने के लिए एक और संघर्ष की तैयारी में ओडिशा के आदिवासी

नायक का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी और उनके द्वारा भाड़े पर लगाए हुए लोग खनन और सार्वजनिक सुनवाई का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को धमकियां दे रहे हैं। नायक कहते हैं, "ऐसे ही एक सामाजिक कार्यकर्ता और माली पर्वत सुरक्षा समिति के सचिव अभी सदेपेल्ली और उनकी पत्नी को क्षेत्र में खनन का समर्थन ना करने की स्थिति में जान से मारने की धमकी दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मौजूदा धमकियों के खिलाफ़ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है।"

जब 2007 में हिंडाल्को को लीज़ दी गई थी, तब EIA की रिपोर्ट में माली पर्वत पर किसी तरह के जलीय आकार के ना होने की बात कही गई थी।
द हिंदू के मुताबिक़, हिंडाल्को 2011 तक खनन नहीं कर पाई और उसकी पर्यावरणीय अनुमति अपनी अवधि को पार कर गई। लेकिन कंपनी ने 2012-14 के बीच पर्यावरणीय अनुमति के बिना ही अवैध खनन चालू कर दिया। जिसका आदिवासियों ने विरोध किया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ना तो कंपनी और ना ही राज्य सरकार ने खनन का गांव वालों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताया है। गांव वालों का कहना है कि विमटा लेबोरेटोरी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा बनाई गई EIA रिपोर्ट जल स्त्रोतों पर खनन के प्रभाव और इससे कृषि व बागवानी पर पड़ने वाले प्रभावों को नहीं बताती।

ये भी पढ़ें: स्टील से भी सख्त: ओडिशा के ग्रामीण दशकों से अपनी जमीन का रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं

गांव वालों का कहना है कि खनन से 44 से ज़्यादा गांव प्रत्य़क्ष और 200 गांव अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित होंगे। EIA रिपोर्ट बताती है कि पर्वत पर कोई जलीय स्त्रोत नहीं है, जबकि गांव वालों का कहना है कि उस पहाड़ी पर 32 धाराएं हैं और चार नहरें निकलती हैं। 44 गांवों में रहने वाले करीब़ 2500 परिवार खेती के लिए इस पानी पर निर्भर रहते हैं, उनके ऊपर इस खनन का बुरा असर पड़ेगा क्योंकि इससे पानी और मिट्टी की आर्द्रता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। खनन के दूसरे नतीजों में तेल, स्नेहक (ल्यूब्रिकेंट) और दूसरे अपशिष्ट पदार्थों के निष्पादन के चलते होने वाला मृदा औऱ जल प्रदूषण शामिल है।

इसके अलावा EIA की रिपोर्ट में बड़े स्तर पर होने वाले भूमि निम्नीकरण का जिक्र नहीं है। ओडिशा खनन और वनों की कटाई से सबसे ज़्यादा भूमि अपरदन से प्रभावित होने वाले राज्यों में शामिल है। कोरापुट में देवमाली समेत दूसरी बॉक्साइट खदानें भी हैं। गंभीर मृदा अपरदन और भूमि निम्नीकरण से इस क्षेत्र में प्रतिकूल असर पड़ा है।

ये भी पढ़ें:  ओडिसा: जबरन जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रही आदिवासी महिला नेता को किया नज़रबंद

खनन विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी आंदोलनों के समर्थक राजन कहते हैं, "नवीन पटनायक सरकार हिंडाल्को और दूसरे खनन उद्योगों की कठपुतली की तरह काम कर रही है। यह आदिवासी और दलित किसानों के खिलाफ़ है। माली पर्वत सुरक्षा समिति के नेताओं को परेशान किया जा रहा है और माली पर्वत पर प्रस्तावित खनन का विरोध करने के चलते धमकियां दी जा रही हैं।"

राजन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि जनसंपर्क अधिकारी और कंपनी के स्टाफ गांवों में झगड़े शुरू करवा रहे हैं। वह कहते हैं, "कोरापुट का स्थानीय प्रशासन और पुलिस, जो कंपनी के साथ हैं, वे खनन का विरोध करने वाले गांव वालों और जनजातीय नेताओं पर गलत धाराओं में  मुक़दमा दर्ज कर रहे हैं।"

पर्यावरणीय चिंताओं के अलावा, गांव वालों की इस पहाड़ी से धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। माली पर्वत में आदिवासियों का एक पूजा स्थल है, जिसे पाकुली पहाड़ गुफा कहा जाता है। गुफा में स्थित देवता की अलीगांव, काचीगुड़ा, दालेईगुड़ा, राजानीगुडा, पाखीझोला और मनिया के गांव वाले पूजा करते हैं। अगर खनन दोबारा चालू होता है, तो यह पुरातन पूजा स्थल मिट जाएगा। हिंडाल्को से संपर्क करने के न्यूज़क्लिक के प्रयासों को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Odisha Tribal Activists Opposing Hindalco Bauxite Mining get Death Threats

Odisha
Mali Parbat Mining
Tribals India
Bauxite mining
hindalco
Public hearings
Dongria Kondh

Related Stories

लाखपदर से पलंगपदर तक, बॉक्साइड के पहाड़ों पर 5 दिन

ओडिशा के क्योंझर जिले में रामनवमी रैली को लेकर झड़प के बाद इंटरनेट सेवाएं निलंबित

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

स्पेशल रिपोर्ट: पहाड़ी बोंडा; ज़िंदगी और पहचान का द्वंद्व

आरटीआई अधिनियम का 16वां साल: निष्क्रिय आयोग, नहीं निपटाया जा रहा बकाया काम

माली पर्वत बचाओ: अपनी जमीन बचाने के लिए एक और संघर्ष की तैयारी में ओडिशा के आदिवासी

स्टील से भी सख्त: ओडिशा के ग्रामीण दशकों से अपनी जमीन का रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं

ओडिसा: जबरन जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रही आदिवासी महिला नेता को किया नज़रबंद

निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या काफी कम : रिपोर्ट

पुरी एयरपोर्ट : भूमि अधिकारों के लिए दलित एवं भूमिहीन समुदायों का संघर्ष जारी


बाकी खबरें

  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यदि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर आज वोट हो, तो क्या वो पास होगा?
    07 Oct 2021
    क्या संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता अब भी वही है जिस मकसद के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी? या संयुक्त राष्ट्र संघ केवल ताकतवर देशों की कठपुतली बनकर रह गया है?
  •  David MacMillan,  Benjamin,
    भाषा
    अणुओं को बनाने का ‘हरित’ तरीका विकसित करने वाले लिस्ट, मैकमिलन को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार
    07 Oct 2021
    आणविक निर्माण का एक ‘‘सरल’’ नया तरीका खोजने के लिए दो वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की बुधवार को घोषणा की गई
  • Lakhimpur Kheri
    सबरंग इंडिया
    लखीमपुर खीरी: पत्रकार की मौत सुर्खियों में क्यों नहीं आ पाई?
    07 Oct 2021
    रमन कश्यप का परिवार न्याय चाहता है, उन पर कथित तौर पर राजनीतिक दबाव था
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 22,431 नए मामले, 318 मरीज़ों की मौत
    07 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.72 फ़ीसदी यानी 2 लाख 44 हज़ार 198 हुई | 
  • Lakhimpur Kheri
    डॉ. राजू पाण्डेय
    लखीमपुर खीरी की घटना में निहित चेतावनी को अनदेखा न करें!
    07 Oct 2021
    जब देश का शासन चला रहे महानुभाव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपने आलोचकों के विरुद्ध हिंसा के लिए अपने समर्थकों को उकसाने लगें तो देश की जनता का चिंतित एवं भयभीत होना स्वाभाविक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License