NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अंतरराष्ट्रीय
अफ्रीका
सत्ता हस्तांतरण की मांग के विरोध के बाद लीबिया में तेल उत्पादन बाधित
लीबिया की संसद ने प्रधान मंत्री अब्दुल हामिद दबेबा की जगह फाति बाशागा को चुन लिया है, इसके बावजूद दबेबा ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है।
पीपल्स डिस्पैच
20 Apr 2022
libya
लीबिया का राष्ट्रीय तेल निगम। (फ़ोटो: लीबिया एक्सप्रेस)

लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई वाली शांति प्रक्रिया के लिए खतरे का एक और संकेत तब मिला,जब देश की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी नेशनल ऑयल कंपनी (NOC) ने सोमवार, 18 अप्रैल को ऐलान कर दिया कि ‘अगले नोटिस तक’ तेल के उत्पादन और निर्यात को निलंबित कर दिया गया है। देश के पूर्वी हिस्से के क्षेत्रों और उसके आसपास के बड़े इलाक़ों में एनओसी की ओर से चलाये जा रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद यह क़दम उठाया गया है।

इस युद्धग्रस्त देश में शांति बनाये रखने को लेकर महत्वपूर्ण माने जाने वाले 5 + 5 संयुक्त सैन्य आयोग में सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आने के कुछ दिनों बाद ये विरोध प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर आदिवासी नेताओं और स्थानीय लोगों ने सड़कों को जाम कर दिया और अलग-अलग जगहों पर काम को बंद कर देने के लिए मजबूर कर दिया।

रविवार को यह कहने के बाद कि इसका "एल फील ऑयल फ़ील्ड लोगों के एक समूह के दाखिल होने और श्रमिकों को उत्पादन जारी रखने से रोकने के चलते मनमाने ढंग से बंद कर दिया गया था", एनओसी ने अपने सोमवार को दिये एक बयान में कुछ पर "अप्रत्याशित परिस्थितियों" की घोषणा की। इसके निर्यात अनुबंधों को लेकर इसका कहना है कि श्रमिकों को ज़ुइटीना टर्मिनल में इसकी निर्यात सुविधा पर काम करने से रोक दिया गया था। एनओसी ने कहा कि उसे अपने सबसे बड़े तेल क्षेत्र शरारा सहित अपने ज़्यादतर तेल क्षेत्रों से तेल की पंपिंग बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अप्रत्याशित परिस्थितियां एक ऐसा क़ानूनी शब्द है, जो पक्षों को अनुबंध के तहत उनके दायित्वों से तब मुक्त कर देता है, जब उत्पादन "प्राकृतिक आपदा या युद्ध जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों" के कारण असंभव हो जाता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, देश में कुल तेल उत्पादन प्रतिदिन 1.2 बिलियन बैरल से घटकर 800 मिलियन बैरल तक कम हो गया है।

राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत

एनओसी का यह ऐलान 5+5 संयुक्त सैन्य समिति के पूर्वी सदस्यों की ओर से समिति के कामकाज में अपनी भागीदारी को निलंबित किये जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है। उन्होंने देश में तेल उत्पादन बंद करने और देश के पूर्वी क्षेत्रों को पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ने वाली सड़क को अवरुद्ध करने की मांग की थी। उनका यह ऐलान प्रधान मंत्री अब्दुल हामिद दबीबा के फाति बाशागा के पक्ष में सत्ता सौंपने से इनकार करने पर आधारित थी। बाशागा को फ़रवरी में पूर्वी शहर टोब्रुक में स्थित लीबिया की संसद की ओर से प्रधान मंत्री के रूप में चुन लिया गया था।

लीबिया की संसद का  कहना था कि चूंकि दबीबा सरकार निर्धारित समय के मुताबिक़ राष्ट्रीय चुनाव करा पाने में विफल रही थी, इसलिए उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह भी आरोप लगाया गया है कि दबेबा भ्रष्टाचार में लिप्त थे और अपने निजी और सियासी फ़ायदे के लिए राज्य की शक्ति का दुरुपयोग करते रहे हैं।

फरवरी 2021 में देश को संक्रमणकालीन अवधि की अगुवाई करने के लिए लीबिया पॉलिटिकल डायलॉग फ़ोरम (LPDF) नामक संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया में दबेबा को प्रधानमंत्री के रूप में चुन लिया गया था। उनकी सरकार को दिसंबर 2021 में राष्ट्रीय चुनाव कराने का जनादेश मिला था। चुनावी क़ानून पर असहमति के कारण अब चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिये गये हैं। 

दबीबाह का कहना है कि वह केवल एक निर्वाचित सरकार को सत्ता सौंपेंगे और उन्होंने सैन्य परिषद के सदस्यों को समिति के शेष सदस्यों के साथ बैठक में राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए कहा था।

2011 में नाटो की अगुवाई वाले हमले के बाद शुरू हुए देश में युद्ध के चलते राष्ट्रीय आय का एक प्रमुख स्रोत तेल के उत्पादन सहित ज़्यादतर आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। 2020 के आख़िर में युद्धविराम के ऐलान के बाद कई महीनों के बाद एनओसी ने उत्पादन फिर से शुरू कर दिया था, क्योंकि इसके ज़्यादतर तेल क्षेत्र देश के पूर्वी हिस्से में हैं।

लीबिया के पास अफ़्रीका का सबसे बड़ा तेल भंडार है और दुनिया का यह सबसे बड़ा तेल भंडार है। इसका कच्चा तेल दुनिया के अन्य हिस्सों में उत्पादित ज़्यादतर कच्चे तेल की तुलना में सस्ता और बेहतर गुणवत्ता वाला होता है। लीबिया में तेल उत्पादन में आ रहा यह व्यवधान वैश्विक क़ीमतों को प्रभावित कर सकता है, जो पहले से ही यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण बढ़ रहे हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2022/04/19/oil-production-disrupted-in-libya-following-protests-demanding-transfer-of-power/

libya
South Africa
NATO

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

सातवें साल भी लगातार बढ़ा वैश्विक सैन्य ख़र्च: SIPRI रिपोर्ट

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर


बाकी खबरें

  • एम.ओबैद
    नक्शे का पेचः भागलपुर कैंसर अस्पताल का सपना अब भी अधूरा, दूर जाने को मजबूर 13 ज़िलों के लोग
    11 Apr 2022
    बिहार के भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल के 13 ज़िलों के लोग आज भी कैंसर के इलाज के लिए मुज़फ़्फ़रपुर और प्रदेश की राजधानी पटना या देश की राजधानी दिल्ली समेत अन्य बड़े शहरों का चक्कर काट…
  • रवि शंकर दुबे
    दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए
    11 Apr 2022
    रामनवमी और रमज़ान जैसे पर्व को बदनाम करने के लिए अराजक तत्व अपनी पूरी ताक़त झोंक रहे हैं, सियासत के शह में पल रहे कुछ लोग गंगा-जमुनी तहज़ीब को पूरी तरह से ध्वस्त करने में लगे हैं।
  • सुबोध वर्मा
    अमृत काल: बेरोज़गारी और कम भत्ते से परेशान जनता
    11 Apr 2022
    सीएमआईए के मुताबिक़, श्रम भागीदारी में तेज़ गिरावट आई है, बेरोज़गारी दर भी 7 फ़ीसदी या इससे ज़्यादा ही बनी हुई है। साथ ही 2020-21 में औसत वार्षिक आय भी एक लाख सत्तर हजार रुपये के बेहद निचले स्तर पर…
  • JNU
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !
    11 Apr 2022
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो साल बाद फिर हिंसा देखने को मिली जब कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से संबद्ध छात्रों ने राम नवमी के अवसर कैम्पस में मांसाहार परोसे जाने का विरोध किया. जब…
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी
    11 Apr 2022
    "18 अक्तूबर, 2014 को मोदी सरकार ने डीज़ल पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर इसका बोझ आम जनता पर डाल दिया। तब से लेकर आज तक सरकारी लूट चालू है। बड़ा सवाल यह है कि क्या तेल की कीमतों में लगातार इजाफा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License