NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
ऑनलाइन की छूट कहीं देश को ही न लूट ले!
बढ़ते ऑनलाइन कारोबार से भारत के खुदरा व्यापारी के सामने संकट खड़ा हो गया है। फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं और आपत्तियों से अवगत कराया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Nov 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: google

देश में बढ़ते  ऑनलाइन व्यापार और विदेशी थोक के बढ़ते हुए कदमों से भारत का परंपरागत खुदरा व्यापारी एवं छोटा दुकानदार सहमा हुआ है और उसे अपना और अपने परिवार का भविष्य अंधकार में नज़र आ रहा है। इसे लेकर यह व्यापारी काफी उद्वेलित और आंदोलित हैं। अब फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं और आपत्तियों से अवगत कराया है। फेडरेशन ने चिंता जताई है कि विदेशी ऑनलाइन कारोबारी खुदरा व्यापार को नष्ट करने के साथ साथ  भारत की आर्थिक स्वतंत्रता का हनन भी कर सकते हैं।

ऑनलाइन ने दुनिया की हकीकत को बदलना शुरू कर दिया है। अब बाजार के मतलब में से ‘जगह’ का तत्व गायब होता जा रहा है। यानी विक्रेता और क्रेता के बीच खरीदारी के लिए किसी दुकान की जरूरत नहीं है। अब ऑनलाइन सामान और सेवाओं की सूची बनती है। ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से सामान और सेवाओं को चुनता है, ऑर्डर करता है और ऑनलाइन ही भुगतान कर देता है। जैसे-जैसे लोग इंटरनेट के जाल में फंसते जा रहे हैं ऑनलाइन कारोबार बढ़ता जा रहा है। साल 2026 तक अनुमान है कि भारत की तकरीबन 59 करोड़ जनता इंटरनेट सेवाओं की उपभोक्ता बन जायेगी। यानी अभी से जो कारोबारी ऑनलाइन माध्यमों पर अपना नाम और काम बनाते जा रहे हैं वह एक ही बार में करोड़ों ग्राहकों के विक्रेता बनने की तरफ भी बढ़ रहे हैं। यही ऑनलाइन व्यापार से पैदा होने वाली सबसे बड़े परेशानी है, जिससे खुदरा व्यापार दम तोड़ता जा रहा है और आने वाले समय में लाखों खुदरा व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए इस समय ऑनलाइन बिजनेस में सबसे आगे बने हुए विक्रेता आने वाले भविष्य के लिए खुद को सुरसा के मुंह की तरह बनाने में लगे हुए हैं, जिसका भविष्य के बाजार पर एकाधिकार हो।

इसे ऐसे समझा जा सकता है कि ऑनलाइन बिजनेस में सबसे आगे माने जाने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठान अमेजन को अपने ऑनलाइन बिजनेस से अभी केवल अमेरिका के बाजार में ही लाभ मिलता है, अन्य देशों के बाजार में इसे नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसे पता है कि भविष्य ऑनलाइन बाजार का ही है, इसलिए घाटे में रहने के बाद भी यह अपने कारोबार में बढ़ोतरी करने पर लगा हुआ है। साधारण शब्दों में इसे ऐसे समझिये कि एक व्यक्ति के बहुत अधिक पैसा है, उसे पता है कि आने वाले   भविष्य में सारे ग्राहक एक ही दुकान पर आने वाले हैं, इसलिए अभी चाहे जितना नुकसान हो सबको सहन कर लिया जाए, क्योंकि सबकी भरपाई आने वाले भविष्य में हो जाएगी। इसके साथ ऑनलाइन बाजार में खरीद बिक्री की वजह से अथाह डाटा की भी आवाजाही हो रही है। यानी डाटा से जाना जा सकता है कि ग्राहकों की पसंद क्या है और उस पसंद में किस तरह से बदलाव किया जाए। मतलब यह है कि ऑनलाइन बिजनेस में राज करने वाले उपक्रमों के पास बाजार से बाजार बनाने की भी ताकत है।

इसलिए फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल द्वारा बढ़ते हुई ऑनलाइन व्यापार पर चिंता जताई गयी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा कर हस्तक्षेप की अपील की है। फेडरेशन का मुख्य आरोप है कि विदेश ऑनलाइन विक्रेता व्यापार करने के मकसद से व्यापार नहीं कर रहे हैं बल्कि उपभोक्ताओं को मोटा डिस्काउंट देकर भारत के परम्परागत एवं वैभवशाली खुदरा एवं लघु व्यवसाय को समाप्त करने का काम कर रहे हैं। फेडरेशन ने चिंता जताई है कि विदेशी ऑनलाइन कारोबारी भारत की आर्थिक स्वतंत्रता का हनन भी कर सकते हैं। फेडरेशन ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन कारोबारी भारत के विभिन्न कानून का उल्लंघन भी कर रहे हैं और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न भी कर रहे हैं, क्योंकि 90%  उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन खरीद से सम्बंधित होती हैं। फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने बताया कि उक्त ऑनलाइन कंपनियां भयंकर घाटे के बावजूद अपना व्यापार बढाने में एवं विस्तार करने में लगी हुई हैं।

भारत में बढ़ते  हुए ऑनलाइन व्यापार एवं विदेशी थोक के बढ़ते हुए कदमों से भारत का खुदरा व्यापारी एवं छोटा दुकानदार स्तब्ध स्थिति में है और यह नहीं  समझ पा रहा है कि उसका  एवं उस पर आश्रित 44 करोड़ से भी ज्यादा लोगों का जिनकी आजीविका खुदरा  एवं लघु व्यापारियों से चलती है, का भविष्य क्या होने वाला है।

फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल ऑनलाइन बिजनेस को लेकर कई तरह की आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

1. भारत में कारोबार कर रही प्रमुख ऑनलाइन कारोबारी, फ्लिपकार्ट का 2018 का व्यापारिक घाटा 3222 करोड़ रहा जो वर्ष 2017 में 1883  करोड़ था और वह भी तब जब बिक्री 17822  करोड़ से बढ़ कर 24717 करोड़ हो गयी । यही कुछ हालत चीन की अलीबाबा द्वारा वित्त पोषित पेटीएम मॉल की भी है और अमेरिकन अमेज़न भी इसी हालात से गुजर रहा है।

 2. यह विदेशी ऑनलाइन अपनी बिक्री बढ़ाने हेतु भारतीय कानून पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 का भी खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं क्योंकि इस कानून के अनुसार यह कम्पनिया कैश ऑन  डिलीवरी के माध्यम से माल नहीं बेच सकती और वास्तविकता यह है कि इन कंपनियों की आधी बिक्री कैश ऑन  डिलीवरी के माध्यम से ही होती है ।

 3 .   कुछ समय पहले इन ऑनलाइन कारोबारियों द्वारा ग्राहकों को 60 हजार रुपये तक की बिक्री को ब्याजमुक्त 6 मासिक किस्तों में भुगतान की पेशकश की गयी है। यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रावधानों का उल्लंघन है और गैर कानूनी है।

 4 .   हाल ही में प्रकाशित एक समाचार पत्र के अनुसार भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज़ शिकायतों में 90% शिकायत ऑनलाइन विक्रेताओं के विरुद्ध है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ऑनलाइन विक्रेता भारत के गरीब उपभोक्ताओं के साथ छल कर रहे है, जो देश हित में नहीं है।

 5.  सूचना अनुसार यह जानकारी प्राप्त  हुई है कि ऑनलाइन विक्रेता, वस्तुओं के निर्माता से न्यूनतम मूल्यों पर वस्तु खरीदते हैं और अनुबंध करते है कि उक्त कंपनी बाजार में सीधे सीधे अपना कोई उत्पाद नहीं बेचेगी। इसका दुष्परिणाम यह है कि उक्त कंपनी को अपने सेल्स और मार्केटिंग के कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ रही है।

गौर करने वाली बात यह है कि व्यापार का मूल सिद्धांत लाभ अर्जित करना है। कोई भी व्यापारी लघु अवधि में तो घाटा वहन कर सकता है पर यदि घाटा साल दर साल बढ़ता जाए, तो कोई भी व्यापारी व्यापार बंद करने को मजबूर हो जायेगा और दिवालिया हो जायेगा। इन विदेशी कंपनियों के कार्य कलापों से यह स्पष्ट है कि यह कंपनियां भारत में व्यापार करने के लिए तो कतई नहीं आई है बल्कि इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय की परंपरागत अर्थव्यवस्था को समाप्त  करने का प्रतीत हो रहा है।

e commerce
online business
monopoly by online business
indian government and online business
revenue and loss of online business

Related Stories

जारी रहेगी पारंपरिक खुदरा की कीमत पर ई-कॉमर्स की विस्फोटक वृद्धि

ई-फ़ार्मेसी पर रोक : बिना नियम-कायदे के दवा की बिक्री ख़तरनाक़

अलिबाबा भारतीय खुदरा बाज़ार में एकाधिकार हासिल करने में जुटी


बाकी खबरें

  • Mehsi oyster button industry
    शशि शेखर
    बिहार: मेहसी सीप बटन उद्योग बेहाल, जर्मन मशीनों पर मकड़ी के जाल 
    26 Oct 2021
    बिहार के पूर्वी चंपारण के मेहसी स्थित विश्व प्रसिद्ध सीप-बटन उद्योग की मशीनों पर मकड़ी के जाले लग चुके हैं। बिजली की सप्लाई नहीं है। उद्योग यूनिट दर यूनिट बंद हो रहे हैं। इस उद्योग के कारीगर पंजाब-…
  • coal crisis
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोयला संकट से होगा कुछ निजी कंपनियों को फायदा, जनता का नुकसान
    26 Oct 2021
    कोयले के संकट से देश में बिजली की किल्लत हो रही है। इस किल्लत की वजह क्या है? इस संकट से किसको फायदा और किसको नुकसान होगा? जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने बात की पूर्व कोयला सचिव अनिल स्वरुप से
  • Biden’s Taiwan Gaffe Meant no Harm
    एम. के. भद्रकुमार
    ताइवान पर दिया बाइडेन का बयान, एक चूक या कूटनीतिक चाल? 
    26 Oct 2021
    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले गुरुवार को सीएनएन टाउन हॉल में यह कहा है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो वाशिंगटन उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों का स्थायी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी दी
    26 Oct 2021
    लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी दिल्ली के तीनों नगर निगम में अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। राजधानी में डेंगू और अन्य ऐसी महामारी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद ये ठेके प्रथा के तहत कार्यरत…
  • instant loan
    शाश्वत सहाय
    तत्काल क़र्ज़ मुहैया कराने वाले ऐप्स के जाल में फ़ंसते नौजवान, छोटे शहर और गाँव बने टार्गेट
    26 Oct 2021
    इन ऐप्स के क़र्ज़ वसूली एजेंटों की ओर से किये जा रहे उत्पीड़न के चलते 2020 और 2021 के बीच पूरे भारत में कम से कम 21आत्महत्याएं हुई हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License