NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ऑनलाइन व्यवस्था के खिलाफ खड़े हुए हरियाणा के लाखों मज़दूर
जबसे हरियाणा सरकार ने मज़दूरों को मिलने वाली सुविधाओं को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है, मजदूर दर-दर भटक रहे हैं। किसी का ऑनलाइन डाटा नहीं चढ़ाया जा रहा है। मज़दूरों का कहना है कि दो साल से बेनीफिट के फार्म पेंडिग पड़े हैं, उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा।
मुकुंद झा
27 Feb 2019
workres

हरियाणा के लाखों निर्माण मज़दूर ऑनलाइन पंजीकरण के खिलाफ खड़े हो गए हैं। वे निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड कानून को बचाने और कारीगर-मज़दूरों के रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर भवन निर्माण कामगार यूनियन की राज्य कमेटी हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर 21 फरवरी से धरना-प्रदर्शन कर रही है। यह विरोध प्रदर्शन 6 मार्च तक यह जारी रहेगा।

दरअसल जबसे हरियाणा सरकार ने मज़दूरों को मिलने वाली सुविधाओं को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है, मजदूर दर-दर भटक रहे हैं। किसी का ऑनलाइन डाटा नहीं चढ़ाया जा रहा है। मज़दूरों का कहना है कि दो साल से बेनीफिट के फार्म पेंडिग पड़े हैं,उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा। इस बीच सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण के नाम पर लाखों मज़दूरों का पंजीकरण ही रद्द कर दिया है, अधिकतर निर्माण मज़दूर अनपढ़ हैं या नाम मात्र पढ़े हैं। इसलिए उन्हें  ऑनलाइन के माध्यम से कैसे फार्म भरना और अपना पंजीकरण कैसे करना नहीं आ रहा है।

IMG-20190227-WA0025_0.jpg

मज़दूर पिछले कई महीनों से अपने अधिकार और मिलने वाले लाभ से वंचित है। कई मज़दूरों ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण के नाम पर कई लोगों ने उनसे पैसे भी ले लिये लेकिन कुछ नहीं हुआ। 

ऐसे ही एक मज़दूर  सूबे सिंह,जो जींद ज़िले के देवरड़ गाँव से हैं, उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी की है। आज उनकी बेटी-बच्चे भी हो गए है लेकिन उन्हें आजतक निर्माण मज़दूर को मिलने वाली कन्यादान राशि जो कि हरियाणा में एक लाख रुपये है, वो नहीं दी गई है। 

इसे भी पढ़े :- दिल्ली में निर्माण मजदूर संकट में, मोदी और केजरीवाल दोनों सरकारें चुप

सोचिए एक मज़दूर जो दैनिक 200 से 300 रुपये तक मज़दूरी करता है, उसके लिए एक लाख रुपये का कितना महत्व है। सूबे सिंह ने अपनी बेटी की शादी में इस उम्मीद में कहीं से पैसों का इंतज़ाम कर पैसे खर्च किए कि उन्हें बाद में रुपये मिल जाएंगे,जिससे वो अपनी देनदारी  खत्म कर लेंगे, लेकिन शादी के इतने समय बाद तक भी उन्हें अब तक कोई लाभ नहीं दिया गया है।

ये सिर्फ एक सूबे सिंह की कहानी नहीं ऐसे कई मज़दूर हैं जिन्हें ऐसे लाभ मिलने हैं चाहे वो मज़दूर के बच्चों को स्कूल में मिलने वाली छात्रवृति हो या दुर्घटना के बाद मिलने वाली सहायता राशि या फिर छोटे-मोटे काम के लिए मिलने वाला लोन हो। वो सरकार और प्रशासन तंत्र के गैरज़िम्मेदारना रैवये के कारण नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कल्याण बोर्ड के पास धन की कमी है। उसके पास आज भी सैकड़ों करोड़ का बजट है।  

भवन निर्माण कामगार यूनियन ने इन्हीं मांगों को लेकर हजारों की तादाद में जिला उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। जिला उपायुक्त से यूनियन के पदाधिकारियों की और श्रम विभाग के अधिकारियों से भी बातचीत हुई। इस दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह बाद श्रम विभाग से सम्बन्धित कार्य सुचारू रूप से तहसील वाइज सरल केंद्र पर किए जाएंगे और किसी भी वर्कर को किसी भी प्रकार कि दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

इसे भी पढ़े :- प्रदूषण के लिए सब ज़िम्मेदार, लेकिन मार सिर्फ निर्माण मज़दूरों पर, कामबंदी से रोज़ी-रोटी का संकट

लेकिन सरकार के इन आश्वासनों पर मज़दूर यूनियनों का कहना है कि ऑनलाइन के नाम पर सरकार आम जनता को धोखा दे रही है। पहले राशन कार्ड ऑनलाइन, फिर मनरेगा और अब निर्माण मजदूरों का पंजीकरण ऑनलाइन। जिसमें कहीं अंगूठा का निशान न मिलने से तो कहीं नेटवर्क की दिक्कत होने की बात कहकर मजदूरों व गरीब लोगों को गुमराह किया जाता है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि हमने फैसला लिया है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे और न मज़दूरों का शोषण करने वाली सरकार को बैठने देंगे।

इसी प्रदर्शन क्रम में 25 फरवरी से भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा के आह्वान पर भिवानी-चरखी दादरी के हजारों निर्माण मजदूर कारीगरों ने ऑनलाईन के विरोध में व ऑफलाईन कार्य शुरू करने, पंजीकरण में तेजी लाने, समय पर सविधाएं जारी करने, बकाया सुविधा फार्मो की राशि जारी करने, सभी गांवों में मनरेगा का काम चालू करने आदि मांगों के समर्थन में जिला उपायुक्त कार्यालय भिवानी पर जोरदार प्रदर्शन किया व तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्ंयमंत्री व उपायुक्त भिवानी के नाम पर ज्ञापन सौंपा। इस विरोध को तहसील स्तर तक ले जाने का निर्णय किया है।

IMG-20190227-WA0024_0.jpg

अखिल भारतीय निर्माण मजदूर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने 24 दिसम्बर को 427 सुविधाएं ऑनलाइन करने का निर्णय लिया था। जिसके चलते निर्माण मजदूरों के बोर्ड ने भी 26 दिसम्बर को पंजीकरण, नवीनीकरण, सुविधा फार्मों के कार्यों को बिना तैयारीयों के ऑनलाईन करने का निर्णय ले लिया जिसके बाद से पिछले दो माह से निर्माण मजदूर-कारीगर मारे-मारे फिर रहे हैं। सभी तरह के कार्य बन्द हो चुके हैं, मगर कोई भी अधिकारी इनकी सुध लेने वाला नहीं हैं। उन्होंने ने कहा कि हरियाणा सरकार व अधिकारी मजदूरों के पंजीकरण की बजाय पहले से पंजीकृत मजदूरों के पंजीकरण को रद्द कर रहे हैं। पिछले 8 माह से निर्माण मजदूर कारीगरों के 10 हजार से ज्यादा सुविधा फार्म जमा होने के बावजूद सुविधा राशि खातों में नही डाली जा रही हैं। और न ही नये निर्माण मजदूर कारीगरों के पंजीकरण किये जा रहे हैं। हरियाणा सरकार ने हरियाणा के निर्माण मजदूर कारीगरों को बाजार भरोसे छोड दिया हैं जहां पर दलाल इनका भारी आर्थिक शोषण कर रहे हैं। भाजपा सरकार महंगाई, भ्रष्टाचार, बेराजगारी पर लगाम लगाने मे पूरी तरह से विफल हुई है।

मज़दूर कल्याण बोर्ड के धन का दुरुपयोग?

मज़दूर कल्याण बोर्ड में कई सौ करोड़ रुपये हैं जो मज़दूरों के हैं और उनके कल्याण के लिए खर्च होने हैं।  परन्तु मज़दूरों के इस पैसे को किसी अन्य मद में खर्च करने का आरोप सरकार पर लगता रहा है। एक मज़दूर का कहना है कि हमारे हक के पैसे सरकार अन्य कार्य में खर्च कर रही है, परन्तु हमारे हक के पैसे नहीं दे रही है। इसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा।

इसे भी पढ़े :-निर्माण मज़दूर : शोषण-उत्पीड़न की अंतहीन कहानी

इसके अलवा निर्माण मज़दूर यूनियन का कहना है कि मज़दूरों के हिस्से के पैसों को लगातार श्रम अधिकारयों के द्वारा आपस में बंदर बाट कर घपला  किया जा रहा है। इसके बारे में सुखबीर सिंह ने बताया कि सरकार मज़दूरों के पैसो से अपना गुणगान और प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रही है। हरियाणा में सरकार मज़दूरों को सिलाई मशीन देती है, उसे देने के लिए श्रम मन्त्री एक आयोजन करता है कुछ को मशीन दी भी जाती है परन्तु मशीन देने में लाखों रुपये गायब कर दिए जाते हैं। अगर कुछ देना है तो उनको पैसा दे मज़दूर को जो लेना है वो ले लेगा लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती है|

देश के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निर्माण मज़दूरों को सभी सरकारों ने अनदेखा किया है। यह सिर्फ हरियाणा की ही कहानी नहीं है। यही हाल देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम राज्यों का है। मज़दूरों के साथ हो रहे इस अन्याय पर केंद्र सहित सभी राज्य सरकारें चुप हैं।

constructions workers
nirman mazdoor
labor
labor welfare board
BJP
Haryana
haryana govt.
manohar laal khattar
CITU

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग


बाकी खबरें

  • poonam
    सरोजिनी बिष्ट
    यूपी पुलिस की पिटाई की शिकार ‘आशा’ पूनम पांडे की कहानी
    16 Nov 2021
    आख़िर पूनम ने ऐसा क्या अपराध कर दिया था कि पुलिस ने न केवल उन्हें इतनी बेहरमी से पीटा, बल्कि उनपर मुकदमा भी दर्ज कर दिया।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी : जनता बदलाव का मन बना चुकी, बनावटी भीड़ और मेगा-इवेंट अब उसे बदल नहीं पाएंगे
    16 Nov 2021
    उत्तर-प्रदेश में चुनाव की हलचल तेज होती जा रही है। पिछले 15 दिन के अंदर यूपी में मोदी-शाह के आधे दर्जन कार्यक्रम हो चुके हैं। आज 16 नवम्बर को प्रधानमंत्री पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने…
  • Ramraj government's indifference towards farmers
    ओंकार सिंह
    लड़ाई अंधेरे से, लेकिन उजाला से वास्ता नहीं: रामराज वाली सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता
    16 Nov 2021
    इस रामराज में अंधियारे और उजाले के मायने बहुत साफ हैं। उजाला मतलब हुक्मरानों और रईसों के हिस्से की चीज। अंधेरा मतलब महंगे तेल, राशन-सब्जी और ईंधन के लिए बिलबिलाते आम किसान-मजदूर के हिस्से की चीज।   
  • दित्सा भट्टाचार्य
    एबीवीपी सदस्यों के कथित हमले के ख़िलाफ़ जेएनयू छात्रों ने निकाली विरोध रैली
    16 Nov 2021
    जेएनयूएसयू सदस्यों का कहना है कि एक संगठन द्वारा रीडिंग सत्र आयोजित करने के लिए बुक किए गए यूनियन रूम पर एबीवीपी के सदस्यों ने क़ब्ज़ा कर लिया था। एबीवीपी सदस्यों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कार्यक्रम…
  • Amid rising tide of labor actions, Starbucks workers set to vote on unionizing
    मोनिका क्रूज़
    श्रमिकों के तीव्र होते संघर्ष के बीच स्टारबक्स के कर्मचारी यूनियन बनाने को लेकर मतदान करेंगे
    16 Nov 2021
    न्यूयॉर्क में स्टारबक्स के कामगार इस कंपनी के कॉर्पोरेट-स्वामित्व वाले स्टोर में संभावित रूप से  बनने वाले पहले यूनियन के लिए वोट करेंगे। कामगारों ने न्यूयॉर्क के ऊपर के तीन और स्टोरों में यूनियन का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License