NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
प्याज के बढ़ते दाम पर सियासत के बीच असल मुद्दा गायब!
साल दर साल बढ़ती प्याज की किल्लत, बारिश और भंडारन की समस्या का सरकार कोई समाधान निकालने में नाकाम रही है। सवाल यह है कि सरकार ऐसी नीतियाँ क्यों नहीं बनाती, जिससे किसानों को उचित दाम मिले और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध हो सके।
सोनिया यादव
07 Nov 2019
onion
Image courtesy: zeebiz

प्याज एक बार फिर बढ़ते दामों के कारण सुर्खयों में है। इस बार कीमतें 100 रुपए प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई हैं और खाद्य एवं आपूर्ति मामले के मंत्री रामविलास पासवान उपाय सुनिश्चित करने के बजाय लोगों से ही कीमतें कम करने के सुझाव मांग रहे हैं। उधर विपक्ष इसे सरकार की नाकामी करार देने में लगा हुआ है। लेकिन प्याज पर हो रही सियासत के बीच बढ़ते दामों की असल वजह क्या है इसकी परत खोलने की कोई ज़हमत नहीं उठा रहा है।

प्याज उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसके बावजूद अक्सर देश में प्याज की किमतें लोगों के आंसू निकाल देती है। बीते एक सप्ताह में दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में प्याज के दामों में तेजी से वृद्धि हुई है। दिल्ली में प्याज के दामों में लगभग 45 फीसदी का इज़ाफा हुआ है। इसके दामों में लगातार हो रही वृद्धि से लोगों के बजट पर फर्क पड़ना शुरू हो गया है। सरकार इससे निपटने के लिए भले ही कई दावे कर रही हो लेकिन तमाम सरकारी दावे बेअसर ही नज़र आ रहे हैं।

खाद्य मंत्रालय के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, एक अक्टूबर को प्याज का भाव 55 रुपये किलो था। लेकिन पिछले एक हफ्ते में प्याज का खुदरा मूल्य 45 प्रतिशत बढ़कर 80 रुपये किलो पहुंच गया, अब ये कुछ इलाकों में 100 के पार हो गया है। मुंबई में प्याज़ 59 रूपये किलो से बढ़कर 67 रू किलो हुआ, तो वहीं सबसे ज़्यादा 40 रूपये प्रति किलो की बढ़ोत्तरी पंचकुला में रिकार्ड की गई है जहां प्याज की खुदरा कीमत इन छह दिनों में 40 रू किलो से बढ़कर 80 रूपये किलोग्राम हो गई है। ये परिस्थिति पहली बार नहीं बनी है, इस संकट से कई बार हम और आप दोचार हो चुके हैं लेकिन सरकार जागती तब है जब समस्या विकट हो जाती है। उस समय समस्या का कोई तात्कालिक हल खोजा जाने लगता है।

बीते सितंबर माह में ही प्याज की कीमतों में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी देखने को मिली थी और सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी इसके निर्यात पर तुरंत रोक लगा लगा कर प्याज कारोबार से जुड़े व्यापारियों व आढ़तियों के यहां छापेमारी शुरू कर दी थी। सरकार के इन कदमों का असर दिखा और बाजार में प्याज पहले के मुकाबले ज्यादा उपलब्ध हुआ, तो कीमतें कुछ समय के लिए नीचे आती दिखाई देने लगी। इसके बाद सरकार इस मामले को ठंड़े बस्ते में डालकर फुर्सत से बैठ गई और यह मान लिया गया कि अब देश में प्याज का संकट समाप्त हो चुका है।

सरकारी एजेन्सियों को लगा कि जल्द ही प्याज की कीमतें गिरेंगी, क्योंकि नया प्याज बाज़ार में आ जाएगा। पर ऐसा नहीं हुआ, नया प्याज अभी बाज़ार तक नहीं पहुँचा है। हकीकत ये है कि प्याज की उपज कम है, इसलिए बाजार की आपूर्ति सिर्फ निर्यात पाबंदी से स्थाई तौर पर बढ़ने वाली नहीं थी, इसलिए यह संकट फिर लौट आया है।

सरकार ने बुधवार, 6 नवंबर को आनन-फानन में बैठक कर देश में प्याज की कीमतों और उपलब्धता की समीक्षा की। घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति सुधार के लिए धूम्र-उपचार (फ्यूमिगेशन) सहित कई नियमों को 30 नवंबर तक लचीला करने का एलान किया है। इसके साथ ही चार देशों अफगानिस्तान, इजिप्ट, तुर्की और ईरान से आयात करने का फैसला लिया गया। इसी बीच सरकार द्वारा पहले से मंगाई गई 2,500 टन प्याज की पहली खेप 12 नवंबर को भारत पहुंच जाएगी।

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि सरकार हर संभव कोशिश कर रही है और नवंबर के अंत तक या दिसंबर की शुरुआत में कीमतें घट सकती हैं। सवाल ये है कि जब अगस्त- सितंबर में ही प्याज की किल्लत शुरू होने लगी तो आखिर इसके बाद भी इसका निर्यात सरकार के प्रोत्साहन से क्यों जारी रहा और इस पर रोक अक्टूबर में मामला हाथ से बाहर निकलने के बाद क्यों लगी, क्या सरकार स्थिति से अवगत नहीं थी या और बिगड़ने का इंतजार कर रही थी। प्याज के आयात का फैसला लेने में भी सरकार ने इतनी देरी क्यों की। यदि अगस्त में ही निर्णय ले लिया गया होता तो शायद न तो इतनी किल्लत होती न कीमतें बढ़तीं।

एक सच्चाई ये भी है कि भारत में प्याज के भंडारण में भी दिक्कतें हैं। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में सिर्फ 2 फीसदी प्याज के भंडारण की ही क्षमता है। 98 फीसदी प्याज खुले में रखा जाता है। बारिश के मौसम में नमी की वजह से प्याज सड़ने लगता है। भंडारण की समस्या की वजह से करीब 30 से 40 फीसदी प्याज सड़ जाता है। प्याज की बर्बादी की वजह से भी इसकी कीमतें बढ़ती हैं।

Bulb-Onion-Farming-Greenlife-1600x800.jpg

हमारे सामने सवाल यह उठता है कि सरकार ऐसी नीतियाँ क्यों नहीं बनाती, जिससे किसानों को उचित दाम मिले और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर प्याज उपलब्ध हो सके। यह संतुलन क्यों नहीं बनता, क्यों हम आग लगने के बाद कुआं खोदने लगते हैं?

भारत में 2.3 करोड़ टन प्याज का उत्पादन होता है। इसमें 36 फीसदी प्याज महाराष्ट्र से आता है। इसके बाद मध्य प्रदेश में करीब 16 फीसदी, कर्नाटक में करीब 13 फीसदी, बिहार में 6 फीसदी और राजस्थान में 5 फीसदी प्याज का उत्पादन होता है। महाराष्ट्र जैसे प्याज उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के बाद मंडियों में प्याज की आपूर्ति पर असर पड़ा है। जिसके कारण राजधानी दिल्ली में इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आकंड़ों के मुताबिक, प्याज की कीमतों में पिछले साल की तुलना में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। नवंबर 2018 में खुदरा बाजार में प्याज का भाव 30-35 रुपये किलो था।

होल्कर ने कहा कि बारिश के कारण खरीफ की फसलों का नुकसान हुआ है। खेतों में प्याज सड़ गई हैं। कई जगह कटाई के बाद उनकी सही व्यवस्था ना होने के कारण ये मंडी तक पहुंच ही नहीं पा रही है। ऐसे में दाम बढ़ना लाज़मी है।

दिल्ली आजादपुर मंडी के कारोबारी और ऑनियन मर्चेंट एसोसिएशन के विकास शर्मा ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश के कारण प्याज की फसल खराब होने व नई फसल की तैयारी में विलंब हो जाने की आशंकाओं से प्याज की कीमतों को और सपोर्ट मिल रहा है। शर्मा ने बताया कि इससे पहले 2015 में प्याज का भाव 50 रुपये किलो से ऊपर चला गया था। हालांकि सरकार बार-बार कह रही है कि प्याज़ का पूरा स्टॉक है।

बढ़ती कीमतों के संदर्भ में प्याज कारोबारियों का कहना है कि पिछली फसल में प्याज का उत्पादन बहुत कम हुआ था। इस बार की फसल बेमौसम बारिश का शिकार हो गई है। सरकार की नीतियां भी इसे लेकर प्रतिकूल ही रही हैं। जिसे लेकर कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

किसान आंदोलनों में सक्रिय राजेंद्र चौधरी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'प्याज के दाम बढ़ने का मुख्य कारण केंद्र सरकार की नीति है। सरकार महाराष्ट्र की मजबूत प्याज लॉबी के दबाव में आकर प्याज निर्यात पर कई तरह के प्रोत्साहन देती है। जिसकी वजह से प्याज का निर्यात बढ़ता है, घरेलू बाज़ार में उपलब्धता घटती है और कीमत बढ़ जाती है'।

उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘सरकार पूरी कोशिश कर रही है कीमतों को नियंत्रण में लाने की। महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में नई फसल की आवक शुरू हो गई है, इसलिए आने वाले दिनों में प्याज के दाम में कमी आएगी। हालांकि, बेमौसम बारिश की वजह से इन्हें उपभोक्ता क्षेत्रों तक लाने में दिक्कत हो सकती है।’

कई सालों से प्याज की खेती कर रहे किसान राम लाल ने न्यूज़क्लिक से कहा, 'जब प्याज के दाम बढ़ जाते हैं तो हम किसान अगली फसल में ज्यादा एकड़ ज़मीन पर प्याज उगाते हैं, प्याज की ज्यादा उपज हो जाए तो कीमत फिर गिर जाती है और हमें वाजीब दाम नहीं मिलता। इससे हमें ही नुकसान होता है। हमें बढ़ी कीमत का फ़ायदा तो नहीं मिलता, पर गिरी कीमतों का नुक़सान जरूर उठाना पड़ता है'।

जानकारों का मानना है कि इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प भूमिका निर्यातकों और बिचौलियों की होती है। वे अपने हिसाब से कीमतें घटाते-बढ़ाते हैं, उन्हें अधिक मुनाफ़ा होता है, लेकिन वह मुनाफ़ा उस अनुपात में किसानों तक नहीं पहुँच पाता है। किसानों को प्रकृति की मार भी सहनी होती है और बाजार की भी।

गौरतलब है कि बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों को भारतीय प्याज का निर्यात होता था। भारत से प्याज की किल्लत होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, यानी प्याज की उपज में कमी की जो हमारी एक घरेलू समस्या थी, वह अब एक अंतरराष्ट्रीय संकट के रूप में सामने आ खड़ी है। अगर यही हाल रहा, तो प्याज की आपूर्ति तो सुधर सकती है, लेकिन इसकी कीमत बहुत ज्यादा नीचे आने की संभावना नहीं बनेगी।

Onion Crisis
Cost of Onions Rise
Onion Farmers
Export-Import onion
modi sarkar
farmer crises
Government Policy

Related Stories

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

मंत्रिमंडल ने तीन कृषि क़ानून को निरस्त करने संबंधी विधेयक को मंज़ूरी दी

कार्टून क्लिक: जो दरिया झूम के उट्ठे हैं तिनकों से न टाले जाएंगे...

देशभर में किसान मज़दूर मना रहे ‘काला दिवस’, जगह जगह फूंके जा रहे हैं मोदी सरकार के पुतले

विशेष: जब भगत सिंह ने किया किसानों को संगठित करने का प्रयास

शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट...! लेकिन हमें इतनी 'भलाई' नहीं चाहिए

प्रिय भाई नरेंद्र सिंह जी, काश… : कृषि मंत्री की चिट्ठी के जवाब में एक खुली चिट्ठी

सरकार, जनविरोध और चिरपरिचित लेबलबाज़ी!

यह पूरी तरह से कमज़ोर तर्क है कि MSP की लीगल गारंटी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार गड़बड़ा जाएगा!

पंजाब में किसान आंदोलनः राज्य की आर्थिक व राजनीतिक घेराबंदी करती केंद्र सरकार


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत
    14 May 2022
    देश में आज चौथे दिन भी कोरोना के 2,800 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। आईआईटी कानपूर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल कहा है कि फिलहाल देश में कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना नहीं है।
  • afghanistan
    पीपल्स डिस्पैच
    भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी
    14 May 2022
    आईपीसी की पड़ताल में कहा गया है, "लक्ष्य है कि मानवीय खाद्य सहायता 38% आबादी तक पहुंचाई जाये, लेकिन अब भी तक़रीबन दो करोड़ लोग उच्च स्तर की ज़बरदस्त खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यह संख्या देश…
  • mundka
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?
    14 May 2022
    मुंडका स्थित इमारत में लगी आग तो बुझ गई है। लेकिन सवाल बरकरार है कि इन बढ़ती घटनाओं की ज़िम्मेदारी कब तय होगी? दिल्ली में बीते दिनों कई फैक्ट्रियों और कार्यस्थलों में आग लग रही है, जिसमें कई मज़दूरों ने…
  • राज कुमार
    ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी से कैसे बचें?
    14 May 2022
    कंपनियां आपको लालच देती हैं और फंसाने की कोशिश करती हैं। उदाहरण के तौर पर कहेंगी कि आपके लिए ऑफर है, आपको कैशबैक मिलेगा, रेट बहुत कम बताए जाएंगे और आपको बार-बार फोन करके प्रेरित किया जाएगा और दबाव…
  • India ki Baat
    बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून
    13 May 2022
    न्यूज़क्लिक के नए प्रोग्राम इंडिया की बात के पहले एपिसोड में अभिसार शर्मा, भाषा सिंह और उर्मिलेश चर्चा कर रहे हैं बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून की। आखिर क्यों सरकार अड़ी हुई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License