NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
दिल्ली में 25 नवंबर को श्रमिकों की हड़ताल, ट्रेड यूनियनों ने कहा - 6 लाख से अधिक श्रमिक होंगे हड़ताल में शामिल
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन के रूप में 26,000 रुपये के साथ-साथ असंगठित मज़दूरों को 7,500 रुपये की मासिक नगद सहायता शामिल है।
रौनक छाबड़ा
24 Nov 2021
strike

दिल्ली: केंद्रीय ट्रेड यूनियंस (सीटीयू) की दिल्ली इकाइयों ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कामकाजी आबादी की हो रही उपेक्षा के विरोध में 25 नवंबर को एक दिवसीय हड़ताल में दिल्ली भर में 6 लाख से अधिक श्रमिकों को भाग लेंगे। .

बारह ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने मंगलवार को संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजधानी ने स्थायी प्रकृति की नौकरियों में अनुबंध (ठेका) और निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स टर्म) में वृद्धि देखी है। जिस वजह से  मज़दूरों या श्रमिकों  की मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम है। जबकि दूसरी तरफ आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है।

कॉन्फ्रेंस के बाद जारी एक बयान में यूनियनों ने कहा,"मजदूरों-कर्मचारियों की पीड़ा-कठिनाइयों के सम्बंध में मजदूर संगठनों द्वारा किए गए अनेक पत्राचारों पर सरकार द्वारा उनके प्रति दिखाई गई संवेदनहीनता ने  मजदूर संगठनों को हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर किया है। मजदूर पीड़ित है मगर लाचार नहीं है। आगामी 25 नवम्बर 2021 की हड़ताल के जरिए कुर्बानियों से हासिल किए ‘‘कलेक्टिव बारगेनिंग‘‘ के अपने हथियार हड़ताल को मजदूर एकताबद्ध हो असर्ट करेगा, आंदोलन को और तीखा करेगा। "

 

इस बयान पर सीटू, एटक, ऐक्टू, एचएमएस, इंटक, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एलपीएफ, सेवा, यूटीयूसी, एमईसी और आईसीटीयू ने हस्ताक्षर किए हैं।


बीटीआर भवन में आयोजित इस सम्मेलन में यूनियनों के नेतृत्व ने भाग लिया। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के दिल्ली राज्य सचिव अनुराग सक्सेना ने कहा, "25 नवंबर को 6 से 7 लाख से अधिक कार्यकर्ता हड़ताल में शामिल होंगे।"  

सक्सेना ने कहा “दोनों दलों ने कोविड की अवधि के दौरान और उसके बाद भी कामकाजी आबादी के मुद्दों की अनदेखी की है। दिल्ली में, श्रम मंत्री मनीष सिसोदिया और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने पिछले दो वर्षों से ट्रेड यूनियनों के साथ एक भी बैठक नहीं बुलाई है, जबकि हमने कम से कम चार संयुक्त पत्र भेजा हैं।”

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के मुकेश सिंह ने कहा कि दिल्ली में श्रमिकों की आबादी 60 लाख से अधिक होगी और उनमें से लगभग सभी, असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा “इन श्रमिकों के लिए, कोई श्रम नियम नहीं हैं और उन्हें मासिक भुगतान के रूप में जो मिलता है वह अक्सर न्यूनतम मजदूरी से भी कम होता है। फिर भी, श्रम विभाग इस वास्तविकता से आंखें मूंद लेता है ”।

हाल ही में, दिल्ली में श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी महंगाई भत्ते में वृद्धि के बाद बढ़ाई गई थी। जिसके अनुसार, इस बार वृद्धि के बाद, दिल्ली में अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 15,908 रुपये से बढ़ाकर 16,604 रुपये कर दिया गया है; जबकि अर्ध कुशल श्रमिकों की 17,537 रुपये से 17,693 रुपये; और, कुशल श्रमिकों की 19,291 रुपये से 19,473 रुपये तक।

हालांकि एटक के सिंह ने कहा कि "रिकॉर्ड-उच्च" मुद्रास्फीति को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है । उन्होंने कहा, “जब न्यूनतम मजदूरी को धरातल पर लागू नहीं किया जाता है, तो उन्हें बढ़ाने का क्या मतलब है”।

दिल्ली की ट्रेड यूनियनें अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन के रूप में 26,000 रुपये और असंगठित मज़दूरों को 7,500 रुपये की मासिक नकद सहायता की मांग कर रही हैं। इसके अलावा, वे आप के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में विवादास्पद 4 श्रम संहिताओं को लागू नहीं करने की भी मांग कर रहे हैं।

हिंद मजदूर सभा (HMS) के नारायण सिंह ने कहा “हम यह भी चाहते हैं कि दिल्ली सरकार ठेके की व्यवस्था को समाप्त करने के अपने वादे को न भूलें। AAP को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रम विनियमन तंत्र को मजबूत करने के लिए श्रम विभागों में पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।"  

 

ट्रेड यूनियनों की अन्य मुख्य मांगे इस प्रकार है  -

-  8000 रुपये मासिक पेंशन प्रदान की जाए। 

-  घोषित न्यूनतम वेतन 16,064 रुपये प्रति माह (8 घंटे काम के लिए) सख्ती से लागू किया जाए। इस सम्बंध में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर न्यूनतम वेतन से कम वेतन दिए जाने के सभी विवाद का 3 माह में निपटान किया जाए। 

- जरूरत अनुसार श्रम अधिकारियों की भर्ती कर श्रम विभाग को केन्द्र व दिल्ली में मजबूत बनाया जाए । 

-  विशेष अभियान चलाकर अगले 6 माह में ई.एस.आई. व प्रोविडेंट फंड स्कीम के दायरे में सभी मजदूरों को इसकी कवरेज प्रदान की जाए। 

-  दिल्ली सरकार केन्द्र सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक तरीके से पास किए गए गुलामी की ओर धकेलने वाले चारों लेबर कोड रद्द करो।

-  सरकारी संस्थानों का निजीकरण रदेद किया जाए। रोजगार सृजन की नीति अपनाई जाए। 

-  स्थायी स्वरूप के कार्य में संलग्न ठेका कर्मियों को पक्का किया जाए। समान काम का समान वेतन दिया जाए।

- सरकारी विभागों में खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए। 

-  असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को तय दिहाड़ी की दर सुनिश्चित की जाए। 

-  ई-पोर्टल पर सभी का पंजीकरण कर आई कार्ड जारी किया जाए, ईलाज, पेंशन, बच्चों को स्कॉलरशिप, प्रसूति के दौरान लाभ इत्यादि के दायरे में ला जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाए।  

-  ट्रेड यूनियनों के गठन पर हमला बंद किया जाए।

-  कोरोना काल में हुए बेरोजगारों सहित, सभी बेरोजगारों के लिए 7500 रुपये प्रति माह की सरकार से सहायता मांगी थी। मगर सरकार द्वारा कोई मदद नहीं दी गई। 

- हमारे द्वारा दाल, चावल, आटा, चीनी, नमक, तेल, चाय पत्ती की मांग की गई थी लेकिन सरकार ने सिर्फ गेहूं और चावल ही बांटा। महंगाई को नियंत्रित करने व आम जन को राहत देने के लिए हम इस मांग को दोहराते हैं।

 

  

Central Trade Unions
One Day Strike
CITU
AITUC
hms
Delhi
AAP
BJP
minimum wage

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • डॉ. राजू पाण्डेय
    बढ़ती लैंगिक असमानता के बीच एक और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
    08 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1975 में मान्यता दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर नियमित रूप से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की 2022 की थीम 'जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो' चुनी गई है…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश का चुनाव कौन जीत रहा है? एक अहम पड़ताल!
    07 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा उत्तर प्रदेश में आखिरी चरण के मतदान पर बात कर रहे हैं। साथ ही चर्चा कर रहे हैं एक वायरल वीडियो पर जिसके बाद सभी दल द्वारा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाये जा रहे…
  • varanasi
    विजय विनीत
    यूपी चुनावः सत्ता की आखिरी जंग में बीजेपी पर भारी पड़ी समाजवादी पार्टी
    07 Mar 2022
    बनारस में इस बार पीएम मोदी ने दो बार रोड शो किया और लगातार तीन दिनों तक कैंप किया, फिर भी जिले की आठ में से चार सीटें भाजपा जीत ले तो यह वोटरों की बक्शीश मानी जाएगी। यह स्थिति भाजपा के लिए बुरी तो है…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी का रण: आख़िरी चरण में भी नहीं दिखा उत्साह, मोदी का बनारस और अखिलेश का आज़मगढ़ रहे काफ़ी सुस्त
    07 Mar 2022
    इस चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 54.18 फ़ीसदी मतदान हुआ। बनारस में कुल 52.95 फ़ीसदी वोट हुआ। आज़मगढ़ में इससे भी कम मतदान हुआ। जबकि चंदौली में 60 फ़ीसदी के आसपास वोट हुआ है। अंतिम आंकड़ों का…
  • ukraine russia war
    नाज़मा ख़ान
    यूक्रेन से सरज़मीं लौटे ख़ौफ़ज़दा छात्रों की आपबीती
    07 Mar 2022
    कोई बीमारी की हालत में ख़ुद को शॉल में लपेटे था, तो कोई लगातार खांस रहा था। कोई फ़ोन पर परिवार वालों को सुरक्षित वापस लौट आने की ख़ुशख़बरी दे रहा था। तो कुछ के उड़े चेहरों पर जंग के मैदान से बच कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License