NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
दिल्ली में सेहत पर चौंकाने वाला ख़र्च : सर्वेक्षण
सीपीसीबी के वायु गुणवत्ता के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में पिछले चार वर्षों (2015 से 2018) में केवल पांच 'अच्छे' दिन थे। आंकड़़ें दर्शाते हैं कि श्वसन संबंधी रोगों के कारण होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है।
दित्सा भट्टाचार्य
26 Nov 2019
pollution
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Courtesy: AP

साल 2019 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 41 प्रतिशत परिवारों ने निजी अस्पतालों/क्लिनिकों में इलाज कराया और 12% ने सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज कराया है। ये आंकड़ा ग़ैर लाभकारी संगठन ने प्रजा डॉट ओआरजी पर प्रकाशित किया है।

दिल्ली में 25,041 परिवारों का सर्वेक्षण करने के बाद ये आंकड़ा इकट्ठा किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार 47% परिवारों ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया। हालांकि रिपोर्ट बताती है कि "यह स्वास्थ्य पर कुल पारिवारिक ख़र्च में परिलक्षित नहीं होता है जो निरंतर उच्च स्तर पर है।"

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में कई सुविधाएं होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करने का मामला एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। दिल्ली में परिवार औसतन अपने कुल आय का 9.8% स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं जिसे सकल घरेलू उत्पाद के मुताबिक प्रति व्यक्ति आय के अनुसार गणना की जाए तो एक वर्ष में इलाज पर प्रति परिवार कुल 1,16,887 रुपये खर्च करते हैं।

एमसीडी और राज्य के बजटों को एक साथ मिलाकर दिल्ली का स्वास्थ्य पर ख़र्च 2017-18 में 6,590 करोड़ रुपये और 2018-19 के लिए 8,549 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इस शहर पर बीमारियों का बोझ बहुत ज़्यादा है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही दिल्ली डेंगू और मलेरिया से निपटने में सक्षम रही है लेकिन जल-जनित बीमारियां जैसे कि दस्त और टाइफाइड को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है। यह शहर में पानी की आपूर्ति की ख़राब गुणवत्ता को दर्शाता है।

वर्ष 2014-15 और 2018-19 के बीच सरकारी चिकित्सालयों और अस्पतालों में मलेरिया के मामलों की संख्या में 63% की कमी आई है। ये आंकड़ा 7,723 से घटकर 2,874 हो गया है। 2015-16 के प्रकोप के बाद डेंगू के मामलों की संख्या में भी काफी कमी आई है। इस साल 27,119 मामले सामने आए थे। वर्ष 2018-19 में इसकी संख्या 6,699 थी। टीबी के मामलों की संख्या भी 2014-15 में 75,008 से घटकर 68,722 हो गई है। हालांकि, ये संख्या अभी भी बहुत बड़ी है।

वर्ष 2018-19 में डायरिया के 5,14,052 मामलों के साथ यह राजधानी दिल्ली में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। डायरिया के मामलों की इतनी बड़ी संख्या शहर में पानी की आपूर्ति की ख़राब गुणवत्ता को दर्शाती है जो वर्ष 2018 में दिल्ली जल बोर्ड में पंजीकृत 36,426 जल प्रदूषण की शिकायतों में भी परिलक्षित हुई थी। पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में हैजा के कुल मामलों में कमी आई है। ये आंकड़ा 3,521 से घटकर 1,526 हो गया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, डायरिया, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, टीबी और टाइफाइड पिछले पांच वर्षों में सरकारी अस्पतालों और चिकित्सालयों में शीर्ष पांच संवेदनशील रोग रहे हैं। इस अवधि में औसतन दिल्ली में लोग मधुमेह के बाद सबसे अधिक डायरिया से पीड़ित हुए हैं। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि "यह ध्यान देने वाली बात है कि इन बीमारियों में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं हुआ है और इन घटनाओं को कम करने के लिए अधिकारियों द्वारा इन बीमारियों को रोकने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए गए है।"

graph_1.JPG

रिपोर्ट के अनुसार, चिंता का अन्य बड़ा कारण इन वर्षों में सांस से होने वाली बीमारी के चलते मौतों की बढ़ती संख्या है जो वर्तमान लोक स्वास्थ्य आपात को दर्शाती है जिससे शहर जूझ रहा है। प्रजा द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के माध्यम से एकत्र किए गए वायु गुणवत्ता डेटा से पता चलता है कि दिल्ली में पिछले चार वर्षों (2015 से 2018) में केवल पांच ’अच्छे' वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिन थे। दिल्ली में औसत एक्यूआई का स्तर पिछले चार वर्षों में 'खराब’ रहा है जिसमें कम से कम तीन महीने की वायु गणवत्ता बहुत खराब दर्ज की गई है।

श्वसन संबंधी बीमारियों के डेटा पर एक नज़र डालें जो वायु प्रदूषण के कारण और बढ़ रहे हैं। यह एक गंभीर खतरे को दर्शाता है जिसका दिल्ली के लोग रोज़ाना सामना करते हैं। उदाहरण के लिए साल 2017 में श्वसन और इंट्राथोरेसिक अंगों के कैंसर के कारण 551 मौतें हुईं; सांस की अन्य बीमारियों और संक्रमण के कारण 9,321 मौतें हुईं। इसका मतलब यह कि साल 2017 में प्रति दिन लगभग 27 मौतें हैं जो श्वसन संबंधी बीमारियों और बीमारियों के कारण हुईं, जबकि साल 2016 में 33 मौतें प्रति दिन हुई थी।

इस रिपोर्ट में कहा गया है, “एक सशक्त रोग निगरानी तंत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी करने और लोगों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। राजधानी नई दिल्ली इस संबंध में अन्य भारतीय शहरों के लिए एक अग्रणी बन सकता था पर इसके बजाय यह सत्ता की अस्वीकार्य और अस्पष्ट निगरानी संस्कृति की तस्वीर पेश कर रहा है।"

इस शहर में मौतों के कारणों को लेकर जो आंकड़ा उपलब्ध है वह केवल संस्थागत मौतों का है जो साल 2017 में कुल दर्ज की गई मौतों का 66% था। रिपोर्ट बताती है कि “बीमारियों की गंभीरता को समझने के लिए मौत के कारणों के बारे में आंकड़ों को समझना महत्वपूर्ण है। इससे सरकार को नीतिगत एजेंडा निर्धारित करने में मदद मिल सकती है कि किन बीमारियों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।” चूंकि यह आंकड़ा समय पर उपलब्ध नहीं होता है इसलिए बीमारी की प्रवृत्ति को वास्तविक रूप से ठीक से मॉनिटर नहीं किया जा सकता है और न ही इलाज के लिए समय पर कदम उठाया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि "उपलब्ध बुनियादी ढांचे और भारी भरकम सरकारी ख़र्च के बावजूद केंद्रीय निगरानी तंत्र की कमी और स्वास्थ्य संबंधी नीतियों को लागू करने के लिए कोई उचित ढांचा नहीं होने के कारण इसके प्रभाव का बदतर सबूत लोगों के सामने है।"

उदाहरण के लिए मुहल्ला क्लिनिक की शुरुआत सामुदायिक स्तर पर प्राथमिक स्तर के इलाज के साथ-साथ सस्ता इलाज प्रदान करने के अच्छे इरादे से की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना की सही निगरानी नहीं की जा रही है। यह बताता है कि “सबसे पहले यह कि इसके आंकड़ों को रखने के जिलों में कोई एकरूपता नहीं है। दूसरा, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशालय (डीएचएस) के पास मुहल्ला क्लीनिकों का डेटा उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा मोहल्ला क्लीनिकों को मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों को रोगियों के बीमारी के अनुसार आंकड़ा प्रदान करने के लिए अनिवार्य नहीं किया जाता है जो शहर में बीमारी की बदतर निगरानी व्यवस्था को दर्शाता है।"

इसमें कहा गया है कि "स्थिति में सुधार लाने के लिए यह ज़रुरी है कि चुने हुए प्रतिनिधि सक्रिय हो जाएं और शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराएं। सरकार को अपनी ओर से प्रदूषण और दूषित पानी जैसे स्वास्थ्य निर्धारकों के लिए सख्त नीतिगत कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, शहर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एक समान और पारदर्शी प्रणाली की आवश्यकता है, जिससे लोगों को सस्ती सुविधा उपलब्ध हो सके।”

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Household Expenditure on Health Phenomenally High in Delhi: Survey

Praja.org
State of Health in Delhi report
Public Healthcare
Mohalla clinics
AAP
Delhi

Related Stories

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

दिल्ली में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है : स्वास्थ्य मंत्री

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

EXCLUSIVE: सोनभद्र के सिंदूर मकरा में क़हर ढा रहा बुखार, मलेरिया से अब तक 40 आदिवासियों की मौत

दिल्ली के छठे सीरो सर्वे में 90% से ज्यादा लोगों में मिली एंटीबॉडी

जानलेवा दिल्ली की हवा, 75 प्रतिशत बच्चों को सांस लेने में परेशानी

कोविड-19 से पैदा हुआ दर्द : निजी क्षेत्र और नीति आयोग के लिए एक 'मौक़ा'?

दिल्ली में कोविड के कारण 2029 बच्चों ने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया: सर्वेक्षण


बाकी खबरें

  • कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र अब व्हाट्सऐप पर उपलब्ध होगा
    भाषा
    कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र अब व्हाट्सऐप पर उपलब्ध होगा
    09 Aug 2021
    “अब कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र तीन आसान चरणों में ‘माईगोव कोरोना हेल्पडेस्क’ से प्राप्त करें। संपर्क नंबर +91 9013151515 को सेव करें। व्हाट्सऐप पर ‘कोविड सर्टिफिकेट’ टाइप कर भेजें। ओटीपी प्रविष्ट…
  • जाने-माने अभिनेता अनुपम श्याम का निधन
    भाषा
    जाने-माने अभिनेता अनुपम श्याम का निधन
    09 Aug 2021
    63 साल के अनुपम श्याम इन दिनों धारावाहिक ‘मन की आवाज: प्रतिज्ञा’ में काम कर रहे थे। वह फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ और ‘बैंडिट क्वीन’ में भी नजर आ चुके हैं।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 35,499 नए मामले, 447 मरीज़ों की मौत
    09 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 35,499 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.25 फ़ीसदी यानी 4 लाख 2 हज़ार 188 हो गयी है।
  • डूरंड लाइन पर फेंसिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। अफ़ग़ानिस्तान के साथ खैबर सीमा में तैनात पाकिस्तानी सैनिक
    एम. के. भद्रकुमार
    अफ़ग़ानिस्तान को सताता सीरिया का भूत
    09 Aug 2021
    मिली रिपोर्टों के मुताबिक अगर सुरक्षा परिदृश्य गंभीर रूप से बिगड़ता है, तो कोई भी रूसी कार्रवाई "सीरिया पर की गई कार्रवाई के समान" हो सकती है, जिसमें हवाई हमले और विशेष सुरक्षा अभियान बलों की तरफ़ से…
  • गठबंधन की राजनीति देश की हक़ीक़त का प्रतिबिम्ब है
    न्यूज़क्लिक टीम
    गठबंधन की राजनीति देश की हक़ीक़त का प्रतिबिम्ब है
    08 Aug 2021
    चल रहे मॉनसून सेशन में देश की विभिन्न विपक्षी दलों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए जनता के मुद्दों को उठाया है। इतिहास के पन्ने के इस अंक में इसी पहलू पर नज़र डालते हुए नीलांजन बात कर रहे हैं देश में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License