NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
फिल्में
भारत
अंतरराष्ट्रीय
पैड वुमन : हापुड़ से लॉस एंजेलिस तक का सफ़र
पीरियड/माहवारी, सेनेटरी नैपकिन या पैड की बात करना आज भी हमारे देश में सहज नहीं है। लेकिन इसी को लेकर हापुड़ के काठीखेड़ा की महिलाएं काम कर रही हैं। इन्हीं के जीवन और काम पर बनी है फिल्म ‘पीरियड,एंड ऑफ सेन्टेंस’ (Period. End of Sentence), जो सिनेमा के सबसे बड़े अवार्ड ऑस्कर के लिए बेस्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में नामित हुई है। न्यूज़क्लिक ने इस फिल्म और काम से जुड़े मुख्य किरदारों से बात की।
न्यूज़क्लिक टीम
15 Feb 2019

पीरियड/माहवारी, सेनेटरी नैपकिन या पैड की बात करना आज भी हमारे देश में सहज नहीं है। गांवों में तो बिल्कुल नहीं। हमारे पितृसत्तात्मक समाज में इसे लेकर आज भी बहुत सी बंदिशें और भ्रम हैं। आज भी हमारे देश में बड़ी महिला आबादी माहवारी के दिनों में कपड़े का ही इस्तेमाल करती है। जिससे उन्हें तमाम तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है। इसी को लेकर तमिलनाडु के कोयम्बतूर के अरुणाचलम मुरुगनाथम ने एक सस्ती मशीन बनाने का सपना देखा था और उसे फिर साकार किया और आज उसी लड़ाई को आगे ले जा रही हैं देशभर की तमाम औरतें। इसी में शामिल है सामाजिक संस्था एक्शन इंडिया। जिसने हापुड़ की महिलाओं को जोड़कर सबला समिति बनाई और जेंडर इक्वलिटी का कार्यक्रम शुरू किया और फिर हापुड़ के गांव काठीखेड़ा में पैड बनाने की एक मशीन स्थापित कर महिलाओं को स्वरोजगार और सस्ता पैड उपलब्ध कराया। आज ये महिलाएं खुद पैड बनाकर उसे इस्तेमाल भी कर रही हैं और बेच भी रही हैं। रियल पैडमैन मुरुगनाथम की ज़िंदगी और काम पर फिल्म बनी पैडमैन और इन रियल पैड वुमन के काम पर फिल्म बनी है ‘पीरियड,एंड ऑफ सेन्टेंस’ (Period. End of Sentence), जो सिनेमा के सबसे बड़े अवार्ड ऑस्कर के लिए बेस्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में नामित हुई है। इस फिल्म की निर्माता गुनीत मोंगा और निर्देशक Rayka Zehtabch हैं। फिल्म को फेमिनिस्ट मेजॉरिटी फाउंडेशन (Feminist Majority Foundation) और गर्ल्स लर्न इंटरनेशनल (GLI- Girls Learn International) के सहयोग से बनाया गया है। अब इसी फिल्म के असल किरदार अमेरिका के लॉस एंजेलिस में होने वाले 91वें एकेडमी अवार्ड समारोह में शामिल होने जा रहे हैं। न्यूज़क्लिक ने इन्हीं मुख्य किरदारों से बात कर इस फिल्म और उनके असल जीवन की चुनौतियों और काम पर बात की।  

film
education
Period
Period. End of Sentence
OSCAR AWARDS
91st academy awards
Hapur
pad-making
action india
menstrual health
Muruganantham
Padman of India
Padwoman

Related Stories

भारत और मुसलमानों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का महत्व

‘हमारी फिल्मों का ‘ऑस्कर’ वाला ख्व़ाब’!

‘करुणामय संघर्ष’ : बौद्ध काल की स्वतंत्रचेत्ता महिलाओं की कहानी

समानांतर सिनेमा के जनक मृणाल सेन नहीं रहे

‘हाशिये के लोगों’ को समर्पित होगा छठा उदयपुर फ़िल्म फेस्टिवल

पांडिचेरी फिल्मोत्सव में 100 से अधिक फिल्में

शिक्षा पर RSS के दोहरे हमले का करें विरोध


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License