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पहले ‘विकास’ को बेचा, अब राष्ट्र को बेच रहे हैं!
पर वह मज़मा लगाने वाला बडा चालाक है। वह इस बार फिर एक नया तेल ले कर आया है, राष्ट्र भक्ति ब्रांड का दर्द निवारक तेल।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
21 Apr 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Siasat.pk

अभी पांच एक साल पहले हमारे शहर में एक मज़मा लगाने वाला आया। वह तेल बेचता था। सिर दर्द का तेल, बाल काले करने का तेल, सिर पर बाल उगाने का तेल। हर मर्ज़ के लिए एक ही तेल। उसका कहना था, सिर की सारी समस्याओं की वजह है, महंगाई, बेकारी, बेचारी और भ्रष्टाचार। और उसका इलाज है उसका ये तेल। उसने नारा दिया "सबको तेल, एक जैसा तेल"। लोग उसके बहकावे में आ गए। सबको लगा अब तो सारी समस्याएं हल हो जाएंगी। सबके अच्छे दिन आ जायेंगे। उसके "विकास" ब्रांड सिर के तेल की करोड़ों शीशियां बिक गयी। लोग तब से अपने सिर पर तेल मले जा रहे हैं, मले जा रहे हैं,पर न किसी का सिर दर्द खत्म हुआ, न सिर पर बाल उगे और न ही बाल काले हुए। किसी के अच्छे दिन नहीं आये।

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पिछले पांच साल में वह मज़मेबाज सारे के सारे विश्व में घूम आया। वह मज़मा लगाने वाला जापान भी हो आया पर वहां लोगों ने उसके तेल से ज्यादा उसकी बुलेट ट्रेन में दिलचस्पी ली। और अमेरिका ने तो साफ़ कह दिया कि उन्हें तेल में तो दिलचस्पी है पर उस मदारी के तेल में नहीं, इराक और ईरान के तेल में। हाँ, अमरीकी व्यापारियों ने जरूर थोड़ी दिलचस्पी दिखाई वह भी तब जब उसने ये वादा किया कि उन्हें यह तेल मुँह-मांगी कीमत पर बेचने दिया जायेगा और खूब सारा मुनाफा कमाने दिया जायेगा।

इधर, देश में लोगों में असंतोष हुआ जा रहा था। वह तेल किसी को भी फायदा नहीं दिखा रहा था। किसी के भी दिन नहीं फिर रहे थे। पर वो मज़मे लगाने वाला भी कम नहीं था। वह जादुई वाशिंग पाउडर ले आया। "स्वच्छता" ब्रांड वाशिंग पाउडर, एक ऐसा वाशिंग पाउडर जिससे आपका तन-मन साफ़ हो या न हो, पर घर, सड़क, मोहल्ला, शहर, राज्य और देश सभी साफ हो जाये। उस मदारी की तन या मन की सफाई में कोई रुचि थी भी नहीं। उसको तो बस मज़मा लगाना था। तेल बिकना कम हो गया तो वाशिंग पाउडर का मज़मा लगा लिया। और कहा अब तो सबके अच्छे दिन आ ही जायेंगे।  उस वाशिंग पाउडर की सरकारी खरीद के लिए वाशिंग पाउडर टैक्स भी लगा दिया गया। हजारों करोड़ रुपये का वाशिंग पाउडर खरीद लिया गया। पर सफाई न होनी थी न हुई। अच्छे दिन न आने थे न आये।

 

अब फिर मज़मे वाले को लगा कि कोई नया मज़मा लगाना चाहिए। कोई नया खेल दिखाना चाहिए। उस मज़मे वाले ने कहा कि वह एक ऐसी मशीन बनानी शुरू करेगा कि सब कुछ यहीं, देश में ही बनने लगेगा। सभी को नौकरी मिलेगी। नौकरियों की ऐसी बाढ़ आयेगी कि एक-एक आदमी अपने दो-दो हाथों से अलग अलग नौकरी कर सकेगा। यहां तक कि नौकरी निर्यात भी कर सकेंगे। सबके दिन बहुरेंगे। पर रफ़ाल जो यहां बनना था वह भी वहीं बन रहा है। किसी के दिन न बहुरे, न बहुरेंगे। अच्छे दिन न आने थे न आये।

अब उसे एक और मज़ाक सूझा। उस मज़मा लगाने वाले ने सबसे कहा खड़े हो जाओ। सब खड़े होंगे तो सबको हर्ष होगा, उल्लासित होंगे, चहुँ ओर खुशियां ही खुशियां होंगी। सबके अच्छे दिन आयेंगे। किसान-मजदूर, जवान-बूढ़े, सारा का सारा देश अच्छे दिनों के इंतजार में खड़ा हो गया। खुशियाँ आयेंगी, समृद्धि लायेंगी। खड़े खड़े टांगें सूख गयीं, घुटने सूज गये। दर्द के मारे हाल बुरा हो गया। पर समृद्धि न आनी थी न आयी। अच्छे दिन न आने थे न आये।

पर वह मज़मा लगाने वाला बडा चालाक है। वह इस बार फिर एक नया तेल ले कर आया है, राष्ट्र भक्ति ब्रांड का दर्द निवारक तेल। एक ऐसा तेल जो आपके घुटने की सूजन कम कर दे। जो टांगों की रंगत वापस लौटा दे। सारा का सारा दर्द हर ले। वो दर्द जो उसने ही सबको दिया है। उसे पता है  आज भी वह अपने इस नये तेल को करोड़ों की संख्या में बेच सकता है। उसका ब्रांड सबसे अच्छा भले ही न हो, सबसे बड़ा तो है ही। उसका तेल भले ही न दर्द हर सके न सूजन कम कर सके, पर बिक तो जायेगा ही। अच्छे दिन न आने थे न आये,  और न ही आयेंगे। पर लगता है, जुमले बाज का जुमला तो इस बार भी चल ही जायेगा।

चलते चलते : पहले विकास को बेचा, अब राष्ट्र को बेच रहे हैं। ये कुछ भी बेच सकते हैं, बस खरीदने वाला चाहिये। कहते हैं काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती। पर हमारा देश विचित्र है। यहां काठ की हांडी दोबारा ही नहीं, बार बार चढ़ सकती है। पहले कांग्रेस की चढ़ती रही, अब भाजपा की चढ़ रही है।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

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