NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
पहले ‘विकास’ को बेचा, अब राष्ट्र को बेच रहे हैं!
पर वह मज़मा लगाने वाला बडा चालाक है। वह इस बार फिर एक नया तेल ले कर आया है, राष्ट्र भक्ति ब्रांड का दर्द निवारक तेल।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
21 Apr 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Siasat.pk

अभी पांच एक साल पहले हमारे शहर में एक मज़मा लगाने वाला आया। वह तेल बेचता था। सिर दर्द का तेल, बाल काले करने का तेल, सिर पर बाल उगाने का तेल। हर मर्ज़ के लिए एक ही तेल। उसका कहना था, सिर की सारी समस्याओं की वजह है, महंगाई, बेकारी, बेचारी और भ्रष्टाचार। और उसका इलाज है उसका ये तेल। उसने नारा दिया "सबको तेल, एक जैसा तेल"। लोग उसके बहकावे में आ गए। सबको लगा अब तो सारी समस्याएं हल हो जाएंगी। सबके अच्छे दिन आ जायेंगे। उसके "विकास" ब्रांड सिर के तेल की करोड़ों शीशियां बिक गयी। लोग तब से अपने सिर पर तेल मले जा रहे हैं, मले जा रहे हैं,पर न किसी का सिर दर्द खत्म हुआ, न सिर पर बाल उगे और न ही बाल काले हुए। किसी के अच्छे दिन नहीं आये।

tirchi najar after change new_10.png

पिछले पांच साल में वह मज़मेबाज सारे के सारे विश्व में घूम आया। वह मज़मा लगाने वाला जापान भी हो आया पर वहां लोगों ने उसके तेल से ज्यादा उसकी बुलेट ट्रेन में दिलचस्पी ली। और अमेरिका ने तो साफ़ कह दिया कि उन्हें तेल में तो दिलचस्पी है पर उस मदारी के तेल में नहीं, इराक और ईरान के तेल में। हाँ, अमरीकी व्यापारियों ने जरूर थोड़ी दिलचस्पी दिखाई वह भी तब जब उसने ये वादा किया कि उन्हें यह तेल मुँह-मांगी कीमत पर बेचने दिया जायेगा और खूब सारा मुनाफा कमाने दिया जायेगा।

इधर, देश में लोगों में असंतोष हुआ जा रहा था। वह तेल किसी को भी फायदा नहीं दिखा रहा था। किसी के भी दिन नहीं फिर रहे थे। पर वो मज़मे लगाने वाला भी कम नहीं था। वह जादुई वाशिंग पाउडर ले आया। "स्वच्छता" ब्रांड वाशिंग पाउडर, एक ऐसा वाशिंग पाउडर जिससे आपका तन-मन साफ़ हो या न हो, पर घर, सड़क, मोहल्ला, शहर, राज्य और देश सभी साफ हो जाये। उस मदारी की तन या मन की सफाई में कोई रुचि थी भी नहीं। उसको तो बस मज़मा लगाना था। तेल बिकना कम हो गया तो वाशिंग पाउडर का मज़मा लगा लिया। और कहा अब तो सबके अच्छे दिन आ ही जायेंगे।  उस वाशिंग पाउडर की सरकारी खरीद के लिए वाशिंग पाउडर टैक्स भी लगा दिया गया। हजारों करोड़ रुपये का वाशिंग पाउडर खरीद लिया गया। पर सफाई न होनी थी न हुई। अच्छे दिन न आने थे न आये।

 

अब फिर मज़मे वाले को लगा कि कोई नया मज़मा लगाना चाहिए। कोई नया खेल दिखाना चाहिए। उस मज़मे वाले ने कहा कि वह एक ऐसी मशीन बनानी शुरू करेगा कि सब कुछ यहीं, देश में ही बनने लगेगा। सभी को नौकरी मिलेगी। नौकरियों की ऐसी बाढ़ आयेगी कि एक-एक आदमी अपने दो-दो हाथों से अलग अलग नौकरी कर सकेगा। यहां तक कि नौकरी निर्यात भी कर सकेंगे। सबके दिन बहुरेंगे। पर रफ़ाल जो यहां बनना था वह भी वहीं बन रहा है। किसी के दिन न बहुरे, न बहुरेंगे। अच्छे दिन न आने थे न आये।

अब उसे एक और मज़ाक सूझा। उस मज़मा लगाने वाले ने सबसे कहा खड़े हो जाओ। सब खड़े होंगे तो सबको हर्ष होगा, उल्लासित होंगे, चहुँ ओर खुशियां ही खुशियां होंगी। सबके अच्छे दिन आयेंगे। किसान-मजदूर, जवान-बूढ़े, सारा का सारा देश अच्छे दिनों के इंतजार में खड़ा हो गया। खुशियाँ आयेंगी, समृद्धि लायेंगी। खड़े खड़े टांगें सूख गयीं, घुटने सूज गये। दर्द के मारे हाल बुरा हो गया। पर समृद्धि न आनी थी न आयी। अच्छे दिन न आने थे न आये।

पर वह मज़मा लगाने वाला बडा चालाक है। वह इस बार फिर एक नया तेल ले कर आया है, राष्ट्र भक्ति ब्रांड का दर्द निवारक तेल। एक ऐसा तेल जो आपके घुटने की सूजन कम कर दे। जो टांगों की रंगत वापस लौटा दे। सारा का सारा दर्द हर ले। वो दर्द जो उसने ही सबको दिया है। उसे पता है  आज भी वह अपने इस नये तेल को करोड़ों की संख्या में बेच सकता है। उसका ब्रांड सबसे अच्छा भले ही न हो, सबसे बड़ा तो है ही। उसका तेल भले ही न दर्द हर सके न सूजन कम कर सके, पर बिक तो जायेगा ही। अच्छे दिन न आने थे न आये,  और न ही आयेंगे। पर लगता है, जुमले बाज का जुमला तो इस बार भी चल ही जायेगा।

चलते चलते : पहले विकास को बेचा, अब राष्ट्र को बेच रहे हैं। ये कुछ भी बेच सकते हैं, बस खरीदने वाला चाहिये। कहते हैं काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती। पर हमारा देश विचित्र है। यहां काठ की हांडी दोबारा ही नहीं, बार बार चढ़ सकती है। पहले कांग्रेस की चढ़ती रही, अब भाजपा की चढ़ रही है।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
BJP
Narendra modi
Hindutva Agenda
Hindu Nationalism
General elections2019
2019 Lok Sabha elections

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: RSS और PFI की दुश्मनी के चलते पिछले 6 महीने में 5 लोगों ने गंवाई जान
    23 Apr 2022
    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हत्याओं और राज्य में सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने की कोशिशों की निंदा की है। उन्होंने जनता से उन ताकतों को "अलग-थलग करने की अपील की है, जिन्होंने सांप्रदायिक…
  • राजेंद्र शर्मा
    फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!
    23 Apr 2022
    कटाक्ष: इन विरोधियों को तो मोदी राज बुलडोज़र चलाए, तो आपत्ति है। कोर्स से कवियों को हटाए तब भी आपत्ति। तेल का दाम बढ़ाए, तब भी आपत्ति। पुराने भारत के उद्योगों को बेच-बेचकर खाए तो भी आपत्ति है…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लापरवाही की खुराकः बिहार में अलग-अलग जगह पर सैकड़ों बच्चे हुए बीमार
    23 Apr 2022
    बच्चों को दवा की खुराक देने में लापरवाही के चलते बीमार होने की खबरें बिहार के भागलपुर समेत अन्य जगहों से आई हैं जिसमें मुंगेर, बेगूसराय और सीवन शामिल हैं।
  • डेविड वोरहोल्ट
    विंबलडन: रूसी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध ग़लत व्यक्तियों को युद्ध की सज़ा देने जैसा है! 
    23 Apr 2022
    विंबलडन ने घोषणा की है कि रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को इस साल खेल से बाहर रखा जाएगा। 
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रशांत किशोर को लेकर मच रहा शोर और उसकी हक़ीक़त
    23 Apr 2022
    एक ऐसे वक्त जबकि देश संवैधानिक मूल्यों, बहुलवाद और अपने सेकुलर चरित्र की रक्षा के लिए जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी को अपनी विरासत का स्मरण करते हुए देश की मूल तासीर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License