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भारत
राजनीति
पिछड़े तबकों के छात्रों की वित्तीय मदद ख़तम करने के खिलाफ TISS के छात्र हड़ताल पर
"हम ये विरोध इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों के लिए TISS के दरवाज़े बंद न हों I”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Feb 2018
TISS छात्र

Tata Institute of social sciences (TISS) जो की देश के नामी सामाजिक विज्ञान के विश्वविद्यालयों में से एक है, में पिछले दो दिनों से छात्र की हड़ताल चल रही है I बुधवार को TISS के देश भर के कैम्पसों में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और ये विरोध प्रदर्शन कल रात भर चलता रहा I TISS के कैंपस मुंबई के आलावा हैदराबाद, गुवाहाटी, तुलिजापुर में भी मौजूद है यहाँ भी ये प्रदर्शन जारी रहे I छात्र नेताओं का कहना है कि ये हड़ताल तब तक जारी रहेगा जब तक छात्रों की माँगे मान नहीं ली जाती I

दरअसल TISS प्रशासन ने ये निर्णय लिया है कि SC, ST और OBC से आने वाले छात्रों को जो वित्तीय मदद प्रशासन द्वारा मिला करती थी उसे बंद कर दिया जायेगा I छात्र कह रहे हैं कि इस बात की जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गयी थी और ये पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों के साथ ज़्यादती है I गौरतलब है कि TISS और JNU जैसे और भी संस्थानों में पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों को सुविधाएँ मिलती रही है जिस वजह से विभिन्न तबकों से आने वाले छात्र यहाँ साथ पढ़ते हैं I

TISS आन्दोलन

इस मुद्दे पर न्यूज़क्लिक से बाद करते हुए TISS छात्र संघ के महासचिव फहाद अहमद ने कहा “हमारे विश्विद्यालय में दबे कुचले समाज के लिए एक फी वेवर का सिस्टम था जिसके अंतर्गत SC ,ST और OBC से आने वाले छात्रों को हॉस्टल, डाइनिंग हॉल और ट्यूशन फीस नहीं देनी होती थी I पर 2014 में प्रशासन ने OBC का ये फी वेवर बंद कर दिया था I इसके बाद हमने देखा   कि 2014 में जहाँ विश्वविधालय में 28 % OBC छात्र थे वो अब घटकर 17% रह गए हैं I  2016 के प्रोस्पेक्टस में इस फी वेवर को वापस लाने की बात की थी, लेकिन प्रशासन ने आधे सेशन के बाद कहा कि अब ये SC और ST छात्रों के लिए भी लागू नहीं होगा I ये गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक निर्णय है I”

फहाद ने आगे कहा कि “प्रशासन ने आने वाले शिक्षा सत्रों में भी ST, SC और OBC को ये वित्तीय मदद देने से मना कर दिया है, हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक प्रशासन एक फैसले से पीछे नहीं हटता I”

TISS आन्दोलन

मुंबई TISS के सोशल प्रोटेक्शन ऑफिस रिप्रजेंटेटिव इमरान गाँधी ने न्यूज़क्लिक को कहा “आज  निजीकरण की वजह से लगातार शिक्षा वंचित तबकों से दूर होती जा रही है, TISS और JNU कुछ ऐसे संस्थान रहे हैं जो इन सभी छात्रों को मौका देते रहे हैं I हम ये विरोध इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों के लिए TISS के दरवाज़े बंद न हों I”

हाल में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र भी ST, SC और पिछड़े तबकों से आने वाले छात्रों को मिलने वाले डेप्रिवेशन पॉइंट्स घटाने और सीटें घटाने के आलावा और भी मुद्दों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं I छात्रों का कहना है कि ये शिक्षा के निजीकरण की तरफ  कदम हैं जिससे पिछड़े और कमज़ोर तबकों से आने वाले छात्रों को सुनियोजित तरीके से शिक्षा से से बहार लिया जा रहा है I

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