NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पीएम मोदी ने किसानों से किया गया वादा फिर से दोहराया
अनुमानतः पीएम मोदी ने कृषि क्षेत्र के मुख्य संकट जैसे कि किसानों की आत्महत्या के बारे में चर्चा नहीं की।

पृथ्वीराज रूपावत
21 Jun 2018
farmers crises

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से कृषि क्षेत्र के लिए अपने वादों को दोहराया है। लेकिन इस बार उन्होंने अपने विवादास्पद नमो ऐप के ज़रिए किया है। 20 जून को मोदी ने किसानों के समूहों को संबोधित किया। इन किसानों को देश भर के लगभग 600 ज़िलों में कृषि विज्ञान केंद्रों में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। ऐसे समय में जब देश भर में कृषि संकट के चलते किसान परेशान हैं और लाखों किसान सभी राज्यों में आंदोलन कर रहे हैं, साल 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के किसानों को किए गए वादों के पूरा ने होने के बावजूद पीएम मोदी ने दावा किया कि स्थिति में लगातार सुधार हुआ है।

हाल में किए गए किसानों से वादों में मोदी ने दावा किया कि किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी हो जाएगी। ऐसा होने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चार मोर्चों पर काम कर रही है। पहला कृषि के लिए लागत को कम करना दूसरा कृषि उत्पादन के लिए उपयुक्त मूल्य सुनिश्चित करना तीसरा अपशिष्ट को कम करने के लिए उपाय करना और चौथा किसानों को आमदनी के वैकल्पिक साधन का उपाय करना। लेकिन, बीजेपी शासन के अधीन पिछले चार वर्षों में कृषि की स्थिति पर क़रीब से नज़र डालने से स्पष्ट होगा कि इस दौरान कृषि क्षेत्र में समझौता करने वाली प्रवृति कायम है।

कृषि विकास

अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुनी करने के लिए कृषि को लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर की आवश्यकता होगी। इस पर एतराज़ जताते हुए नीति आयोग के अर्थशास्त्रियों ने दावा किया कि इस लक्ष्य तक पहुंचने में 10.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर पर्याप्त होगी। अगर बाद में किए गए दावों सच मान भी लिया जाता है तो वर्तमान शासन की कृषि विकास दर में इस प्रवृत्ति पर विचार करें। कृषि विकास दर 2013-14 में 5.6 प्रतिशत से 2014-15 में 0.2 प्रतिशत कम हो गई। बता दें कि इसी साल बीजेपी सत्ता में आई थी। 2015-16 में यह 0.7% बढ़ गया, 2016-17 में 4.9% और 2017-18 में 2.1% की भविष्यवाणी की गई। इस तरह के अस्थिर विकास के बावजूद इस सरकार ने कृषि संकट को और बढ़ाने का काम किया है जबकि किसानों की आमदनी में काफी कमी आई है। दूसरी तरफ कृषि मज़दूरों की मज़दूरी जो कृषि क्षेत्र में शामिल लोगों में से लगभग 55 प्रतिशत हैं पूरी तरह उपेक्षित हैं। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ग्रामीण मज़दूरों की मज़दूरी पिछले चार सालों से कोई इज़ाफा नहीं हुआ है।

विकास दर में इस तरह की कमी के बावजूद कृषि के लिए आवंटित बजट कुल केंद्रीय बजट 2018-19 का 2.36 प्रतिशत है जो कि 2.1 लाख करोड़ रुपए है।

पीएम मोदी ने दावा किया कि सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस फसल के मौसम से उत्पादन की लागत का कम से कम 1.5 गुना तय किया गया है। हालांकि, इस गणना के फॉर्मूला ने विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उन्होंने आलोचना की। एमएसपी प्लस 50 प्रतिशत की गणना के लिए बीजेपी ने वादा किए गए C2+50% के बजाय A2+FL+50% formula फॉर्मूला लागू किया। यह बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में बदल जाता है क्योंकि A2+FL फॉर्मूला केवल फसल के उत्पादन में पारिवारिक श्रम के इंप्यूटेड वैल्यू (वास्तविक क़ीमत ज्ञात या उपलब्ध नहीं होने पर किसी वस्तु का दर्ज किया गया मूल्य) और वास्तविक लागत को समाहित किया जाता है। लेकिन वास्तविक लागत तय करने में C2 फॉर्मूला मायने रखता है जिसमें ज़मीन का पट्टा और पूंजी पर ब्याज शामिल है। विशेषज्ञ अक्सर तर्क देते हैं कि छोटे और सीमांत किसान जो कुल किसानों के 86 प्रतिशत से अधिक हैं उन्हें एमएसपी से कोई लाभ नहीं होता क्योंकि उनके पास विपणन योग्य आवश्यकता से अधिक नहीं है।

आत्महत्या

अनुमानतः पीएम मोदी ने कृषि क्षेत्र के मुख्य संकट जैसे कि किसानों की आत्महत्या के बारे में चर्चा नहीं की। आंकड़ों से पता चलता है कि बीजेपी के सत्ता में आने के पहले तीन वर्षों में लगभग36,000 किसानों के आत्महत्या करने की जानकारी मिली।

चूंकि पीएम मोदी के अधीन सरकार की नीतियों ने छोटे, सीमांत किसानों और कृषि मज़दूरों की उपेक्षा की है, क्या ताज़े वादे मायूस कृषक समुदाय को संतुष्ट करेंगे?
 

farmers crises
Modi
minimum support price
acche din
farmers suicide

Related Stories

मोदी का ‘सिख प्रेम’, मुसलमानों के ख़िलाफ़ सिखों को उपयोग करने का पुराना एजेंडा है!

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

अगर फ़्लाइट, कैब और ट्रेन का किराया डायनामिक हो सकता है, तो फिर खेती की एमएसपी डायनामिक क्यों नहीं हो सकती?

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

यूपीः धान ख़रीद को लेकर किसानों से घमासान के बाद हड़ताल पर गए क्रय केंद्र प्रभारी

कृषि उत्पाद की बिक़्री और एमएसपी की भूमिका

पूर्वांचल से MSP के साथ उठी नई मांग, किसानों को कृषि वैज्ञानिक घोषित करे भारत सरकार!

टीकाकरण फ़र्जीवाड़ाः अब यूपी-झारखंड के सीएम को भी बिहार में लगाया गया टीका

किसानों की बदहाली दूर करने के लिए ढेर सारे जायज कदम उठाने होंगे! 

एमएसपी भविष्य की अराजकता के ख़िलाफ़ बीमा है : अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह


बाकी खबरें

  • अमरीका ने दी तीसरी डोज़ को मंजूरी पर क्या यह जरुरी है ?
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमरीका ने दी तीसरी डोज़ को मंजूरी पर क्या यह जरुरी है ?
    18 Aug 2021
    एक तरफ जब अफ्रीका में केवल २.२ % लोगो को ही कोरोना वैक्सीन की दो खुराख़ मिली है, अमरीका में 50 % लोग पूरी तरह से वक्सीनेटेड हैं। अब अमरीका ने कुछ विशेष लोगो के लिए तीसरी डोज़ की भी मंजूरी दे दी है।…
  • DDA के पास दिल्ली के गांवों के विकास के लिए कोई योजना नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    DDA के पास दिल्ली के गांवों के विकास के लिए कोई योजना नहीं
    18 Aug 2021
    दिल्ली मास्टर प्लान 2041 पर दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी डीडीए ने लोगों से अपने सुझाव देने को कहा है, पर क्या दिल्ली के गाँव में रहने वाले लोगों की राय इसमें शामिल होगी? क्योंकि इन गाँवो की बड़ी…
  • quit india
    एस एन साहू 
    अपने आदर्शों की ओर लौटने का आह्वान करती स्वतंत्रता आंदोलन की भावना
    18 Aug 2021
    स्वतंत्रता आंदोलन ने प्रेस की स्वतंत्रता और सबको साथ लेकर चलने के विचारों का समर्थन किया था और ये आदर्श भारत छोड़ो आंदोलन की विरासत हैं। ये इसलिए भी प्रासंगिक हैं क्योंकि भारत इस समय लोकतांत्रिक…
  • DUTA
    रौनक छाबड़ा
    केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तदर्थ शिक्षकों की तादाद का सरकारी आंकड़ा “गुमराह” करने वाला
    18 Aug 2021
    डूटा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर दे कर कहा कि पिछले महीने लोक सभा में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के विपरीत मौजूदा समय में दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 4500 तदर्थ शिक्षक…
  • anil deshmukh
    भाषा
    भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की अनिल देशमुख की याचिका ख़ारिज
    18 Aug 2021
    मामले में सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की गुहार लगाई थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License