NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पिंजरा तोड़ आंदोलन जारी : डीयू हॉस्टल में लड़कियों ने ‘कर्फ्यू’ तोड़ा
छात्राओं का कहना है कि वह बुधवार, 10 अक्टूबर को प्रॉक्टर से मिलने जाएँगी। इसके बाद फिर से प्रदर्शन किया जायेगा और अगर माँगे नहीं माँगी गयी तो फिर से रात भर प्रदर्शन किया जायेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Oct 2018
pinjara tod

सोमवार, 8 अक्टूबर को दिल्ली विश्विद्यालय की आर्ट्स फैकल्टी में पिंजरा तोड़ आंदोलन से जुड़ी महिलाओं ने रात भर विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन हॉस्टल कर्फ्यू टाइमिंग (यानी हॉस्टल में आने जाने के समय पर रोक) के खिलाफ था। छात्राओं ने पहले आर्ट्स फैकल्टी में विरोध प्रदर्शन किया फिर मॉल रोड को करीब 2 घंटों तक जाम किया और फिर वापस आर्ट्स फैकल्टी तक का मार्च निकाला, जिसके बाद वह सुबह 6 बजे तक वहीं रहीं। बताया जा रहा है इस पूरे प्रदर्शन में करीब 150 छात्राएं शामिल थीं। 

दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़्यादातर कॉलेजों में महिला हॉस्टलों में 7 से 8 बजे के बाद प्रवेश बंद हो जाता है। कॉलेज प्रशासन इसे महिला सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताता है। लेकिन महिला छात्रों का कहना है कि यह उनके घूमने की आज़ादी के अधिकारों का हनन है। उनका कहना है कि यह महिलाओं को अपने नियंत्रण में रखने की पुरुष प्रधान मानसिकता से प्रेरित नियम है। 

हॉस्टल में कर्फ्यू टाइमिंग के आलावा महिलाएं कई और माँगे भी कर रहीं हैं। उनकी माँग है कि पिछड़ी जातियों से आने वाली महिलाओं के लिए हॉस्टल में आरक्षण नियम ढंग से लागू किया जाए। महिलाएं यह भी माँग कर रही हैं कि हॉस्टल को पूरी तरह भरा जाए जो कि नहीं किया जा रहा और हॉस्टल की फीस कम की जाए। साथ ही उनकी माँग है कि विकलांग महिलाओं के लिए अलग से हॉस्टल हो और लोकल गॉर्डियन होने के नियम को समाप्त  किया जाए। पिंजरा तोड़ से जुड़ी एक छात्रा विभूति ने कहा "18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के लिए लोकल गार्डियन होने का नियम कितना सही है? जब आप बच्ची से महिला बन गए हैं तो हमें इस तरह नियंत्रण में रखने का नियम कितना जायज़ है?" 

सूत्र बताते हैं कि कई हॉस्टलों में तो यह नियम भी होता है कि लोकल गार्डियन की उम्र 40 साल से ज़्यादा हो और वह शादीशुदा भी हो। सवाल है कि क्या यह नियम पुरुषप्रधान मानसिकता का प्रमाण नहीं?

कल शाम करीब साढ़े चार बजे महिलाओं ने यह प्रदर्शन शुरू किया। उस समय वहाँ करीब 90 महिलायें मौजूद थी और उन्होंने माँग की थी कि प्रॉक्टर उनसे मिलें। कई महिलायें  गेट पर चढ़ गयीं थीं और वहाँ खूब नारे लगाए गए। इसके बाद प्रॉक्टर उनसे मिलने आये लेकिन उन्होंने महिलाओं की माँगों को सुनने से मना कर दिया। इसके बाद महिलायें मॉल रोड पर चलीं गयीं और वहाँ चक्का जाम कर दिया। पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती की और इस दौरान कई महिलाओं को चोट भी आयीं। पुलिस पर यह भी आरोप है कि महिला कॉन्स्टेबल ज़्यादा नहीं थीं और पुरुष कॉन्स्टेबलों ने छात्राओं के साथ बदसलूकी की। 

मॉल रोड पर करीब 2 घंटे तक ट्रैफिक रुका रहा। पुलिस ने ट्रैफिक को दूसरी तरफ से निकलने का इंतज़ाम किया। विभूति का कहना है कि चक्का जाम करने का मकसद यह था कि महिलाओं को बंदी रखे जाने का मुद्दा बाकी जनता तक पहुँचे और कुलपति उनसे मिलने आये। इसके बाद करीब 11. 30 बजे रात को महिलाएं फिर से आर्ट फैकल्टी तक मार्च करके गयीं। वहाँ रात भर प्रदर्शन चला। रात भर गाने गए गए, नारी मुक्ति के नारे लगे और कई छात्राओं ने खूबसूरत चित्र भी बनाये। लेकिन फिर भी प्रशासन के कान पर से जूं नहीं रेंगी। 

छात्राओं का कहना है कि वह बुधवार, 10 अक्टूबर को प्रॉक्टर से मिलने जाएँगी। इसके बाद फिर से प्रदर्शन किया जायेगा और अगर माँगे नहीं माँगी गयी तो फिर से रात भर प्रदर्शन किया जायेगा। 

गौरतलब है कि हॉस्टल में कर्फ्यू टाइमिंग के खिलाफ लेकर यह आंदोलन  2015 से चल रहा है। सबसे पहले यह दिल्ली विश्विद्यालय में शुरू हुआ और इसे पिंजरा तोड़ का नाम दिया गया। इसके बाद  बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय,पंजाबी यूनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दूसरी जगहों पर भी महिलायें हॉस्टल कर्फ्यू टाइमिंग के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं। यह पितृसत्ता के खिलाफ एक आवाज़ है जो देश भर में सुनाई देने लगी है। 

pinjara tod
Delhi University
DU VC
students' movement
gender justice

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

ज्ञानवापी पर फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में डीयू के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को ज़मानत मिली

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई


बाकी खबरें

  • ऋचा चिंतन
    WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 
    25 Apr 2022
    भारत ने डब्ल्यूएचओ के द्वारा अधिक मौतों का अनुमान लगाने पर आपत्ति जताई है, जिसके चलते इसके प्रकाशन में विलंब हो रहा है।
  • एजाज़ अशरफ़
    निचले तबकों को समर्थन देने वाली वामपंथी एकजुटता ही भारत के मुस्लिमों की मदद कर सकती है
    25 Apr 2022
    जहांगीरपुरी में वृंदा करात के साहस भरे रवैये ने हिंदुत्ववादी विध्वंसक दस्ते की कार्रवाई को रोका था। मुस्लिम और दूसरे अल्पसंख्यकों को अब तय करना चाहिए कि उन्हें किसके साथ खड़ा होना होगा।
  • लाल बहादुर सिंह
    वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव को विभाजनकारी एजेंडा का मंच बनाना शहीदों का अपमान
    25 Apr 2022
    ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध हिन्दू-मुस्लिम जनता की एकता की बुनियाद पर लड़ी गयी आज़ादी के लड़ाई से विकसित भारतीय राष्ट्रवाद को पाकिस्तान विरोधी राष्ट्रवाद (जो सहजता से मुस्लिम विरोध में translate कर…
  • आज का कार्टून
    काश! शिक्षा और स्वास्थ्य में भी हमारा कोई नंबर होता...
    25 Apr 2022
    SIPRI की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार ने साल 2022 में हथियारों पर जमकर खर्च किया है।
  • वसीम अकरम त्यागी
    शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार
    25 Apr 2022
    अधिकांश मुस्लिम आबादी वाली इस बस्ती में हिंदू दुकानदार भी हैं, उनके मकान भी हैं, धार्मिक स्थल भी हैं। समाज में बढ़ रही नफ़रत क्या इस इलाक़े तक भी पहुंची है, यह जानने के लिये हमने दुकानदारों,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License