NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पलायन, शौक नहीं मजबूरी है नीतीश बाबू!
बिहार जैसे राज्य के लिए यह समय घोर संकट का है। और यह और अंधकारमय होता दिख रहा है, क्योंकि बिहार में कोई भी उद्योग धंधे नहीं आ रहे हैं, जो थे वो भी बंद पड़े गए हैं। ऐसे में यह कहना कि बिहार के लोग बाहर शौक से जाते है ये कितना उचित है आप खुद सोचिए ?
मुकुंद झा
17 Jan 2019
nitish kumar

बिहार के मुख्यमंत्री मंगलवार को एक निजी समाचार चैनल के सम्मेलन में पहुंचे और वहाँ उन्होंने बिहार के तमाम सवालों के जवाब दिए। उनके कई जवाबों को लेकर मीडिया ने उनकी खिंचाई भी की, जैसे प्रशांत किशोर को जद-यू में शामिल करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था। इस इंटरव्यू में कई बार बिहारी अस्मिता का कार्ड भी खेला गया। कई लोगों ने कहा कि इसके पीछे उन्होंने अपनी विफलता को छुपाने कि कोशिश की है।

लेकिन इस इंटरव्यू में आगे उन्होंने ऐसा कुछ कहा जिसे सत्य कि कसौटी पर कसना जरूरी है। वो कहते हैं कि बिहार के  लोग शौक से बाहर जाते हैं। अब बिहार में काम की कोई कमी नहीं है। बिहार का एक सेक्शन ऐसा है जिसे हमेशा इच्छा रहती है कि बाहर जाए, इसलिए वो बाहर जाते हैं।

ये बयान उस राज्य के मुख्यमंत्री का है जिस राज्य के आबादी का बड़ा हिस्सा काम और रोजी-रोटी के तालाश में देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाता है। बाहर जाकर काम करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन सिर्फ दो वक्त के रोटी के लिए अपने घर-परिवार को छोड़कर बाहर जाना किसी के लिए भी बेहद दु:खद होता है। इसका दर्द बिहार का प्रवासी मजदूर ही समझ सकता है, क्योंकि उसके पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है।

एक बिहारी मज़दूर न सिर्फ अपना घर-परिवार छोड़कर दूर दूसरे प्रदेश में जाता है, बल्कि तमाम तरह का अपमान भी सहता है। उसके साथ गाली–गलौज तो आम बात है, मारपीट तक होती है। और वो यह सब अपमान सहता है क्योंकि वो जानता है कि अगर वो इसका प्रतिरोध करेगा तो उसके रोजी रोटी का साधन छिन जाएगा।

लेकिन मुख्यमंत्री जी का मानना है कि ये सब वो मजबूरी में नहीं बल्कि शौक से करता है। ये बयान मुख्यमंत्री जी के प्रवासी मजदूर जो कभी महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता, कभी गुजरात में गुजराती अस्मिता और दिल्ली में बाहरी के नाम पर पीटा जाता है, उनके प्रति उनकी संवेदनाओं को दिखता है।

“पलायन की कसक”

बिहार को हम विकास और समृद्धि के पैमाने चाहे वो रोज़गार हो या शिक्षा या फिर स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों में पिछड़ता हुआ देख रहे हैं। ऐसे में जब बिहार से मजदूर किसी अन्य राज्य में काम  या अच्छे जीवनस्तर के लिए जाता है तो वहाँ उनके साथ कैसा व्यवहार होता है,वो किसी से छिपा नहीं है। 

बिहार से अमित मिश्र दिल्ली आकर तकरीबन 40 सालों से निजी ट्यूशन चला रहे हैं। उन्होंने कहा दिल्ली में दूसरे लोग ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे अमीर का गरीब और समृद्ध का दरिद्र के साथ होता है।

अमित आगे यह भी बताते हैं कि लोग पलायन क्यों करते है? जब कोई अवसर नहीं होता है तो आदमी अपने परिवार के पेट के लिए पलायन करता है। यह निर्णय चारों ओर से निराश होकर और कहीं थोड़ी उम्मीद देखकर उठाता है। अमित कहते हैं इससे उनकी जान तो बचती है, लेकिन आत्मसम्मान नीलाम हो जाता है। शायद नीतीश कुमार नहीं जानते हैं कि पलायन की कसक कैसी होती है, इसलिए ऐसी बात कर रहे हैं।

गुजरात के  अहमदाबाद में पटरी पर अलग-अलग चीजों की दुकान लगाने वाले अरुण जो गुजरात में बिहारी लोगों  पर हुए हमले के बाद बिहार लौट आए थे  और कसम खाई थी कि कभी भी दोबारा गुजरात नहीं जाएँगे, कहते हैं कि वहाँ बिहारी होना किसी आतंकी या देशद्रोही होने जैसा है, वहाँ लोग आपस में बिहारी शब्द को एक गाली की तरह प्रयोग करते हैं। बिहार और बिहारियों को तो हमेशा ही शक की नजरों से देखा जाता है। उन्हें एक निम्न दर्जे का नागरिक समझा जाता है। वे बताते हैं कि अच्छे इलाकों में उन्हें मकान किराये पर नहीं मिलते हैं, सिर्फ इसलिए कि वो हिंदी भाषी हैं। इन सभी दर्द को समेटे हुए वे वापस आये थे परन्तु अब फिर वो गुजरात वापस जाना चाहते हैं क्योंकि बिहार में उनके पास कोई रोजगार नहीं है। हाँ, अगर उन्हें यहीं रोजगार मिल जाए तब फिर वो इस अपमान और धिक्कार की जिन्दगी जीने वापस गुजरात न जाएं।

जब गुजरात में बिहारियों पर हमले हो रहे थे उसी दौर में हमने कई मजदूरों से बात की थी। उसी में से एक प्रवासी मजदूर ने कहा था कि हमने अंग्रेजों के समय की गुलामी तो नहीं देखी पर गुजरात में मज़दूर जिस हाल में काम करता है वो बहुत ही खराब है। इसके साथ ही उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। वहाँ के लोग बिना किसी गलती के भी हमें हिंदी वाला बोलकर पीट देते हैं। भले गलती उन लोगों की हो तब भी हमें ही दोषी माना जाता है।

जब हमने इन सभी से पूछा कि ऐसे हालात में क्यों काम करते हैं और इसका विरोध क्यों नहीं करते? इस पर उनका कहना था कि उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है, क्योंकि वो जाएं तो जाएं कहाँ, क्योंकि उनके गृह नगर बिहार में तो कोई रोजगार नहीं है, ऐसे में क्या करें। उन्हें परिवार चलाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। और अगर वो इसका विरोध करते हैं तो उन्हें अपने काम से हाथ धोना पड़ेगा।

कई जानकर पलायन को विकास की एक अवस्था और एक अच्छी चीज़ मानते हैं। उनके पास इसको मानने का आधार भी होगा लेकिन हमनें जब इन प्रवासी से बात की तो पता चला कि ये शौक नही मज़बूरी में लिया गया फैसला होता है। इसके लिए वो, उनका परिवार और समाज जो कीमत चुकाता है, उसका आकलन कर पाना बेहद मुश्किल है, लगभग नामुमकिन।

पलायन का ये सिलसला बहुत पुराना है, परन्तु आजादी और खासतौर पर 80 के दशक के बाद से ये सिलसिला और बढ़ा है। अगर हम इसका अंदाजा बिहार जैसे राज्य के लिए लगाए तो यह समय घोर संकट का है। और यह और अंधकारमय होता दिख रहा है, क्योंकि बिहार में कोई भी उद्योग-धंधे नहीं आ रहे हैं, जो थे वे भी बंद पड़े गए हैं। ऐसे में यह कहना कि बिहार के लोग बाहर शौक से जाते है ये कितना उचित है आप खुद सोचिए?

 

 

 

Bihari Labourers
Nitish Kumar
Bihar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Rafale and Augusta
    न्यूज़क्लिक टीम
    रफ़ाल और अगुस्ताः अभी और कितने 'कंकाल' बाहर आएंगे Mr. PM
    09 Nov 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने इटली की अगुस्ता VVIP हेलिकॉप्टर सौदे में ब्लैकलिस्टेड कंपनी फिनमिक्का को क्लीन चिट देने और रफ़ाल सौदे में रिश्वत के नये खुलासे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…
  • Tripura Violence
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    त्रिपुरा हिंसा : एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी ने की यूएपीए वापस लेने की मांग, सीपीआइएमएल का प्रदर्शन
    09 Nov 2021
    त्रिपुरा हिंसा के बाद वकीलों और पत्रकारों पर प्रदेश की पुलिस द्वारा दर्ज किए गए यूएपीए को वापस लेने की मांग एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी व सीपीआइएमएल ने की है।
  • Pegasus
    एस एन साहू 
    पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला गांधी, राम मोहन राय के नज़रिये की अभिव्यक्ति है
    09 Nov 2021
    कई जाने-माने भारतीयों के फ़ोन की निगरानी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने महात्मा गांधी की उस बात का मज़बूती से समर्थन किया है कि अदालतों को सरकार के अधीन नहीं होना चाहिए, बल्कि इंसाफ़ देना चाहिए।
  • Arun Kumar
    न्यूज़क्लिक टीम
    "नकदी हटा देने से काला धन गायब नहीं हुआ": प्रोफेसर अरुण कुमार
    09 Nov 2021
    भारत सरकार के अर्थव्यवस्था से जुड़े आँकड़ों में पाँच साल पहले लागू नोटबंदी के भयानक असर दिखाई नहीं देतेI न्यूज़क्लिक से एक खास बातचीत में प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि इस अचानक लिए फैसले ने देश की…
  • Param Bir Singh
    भाषा
    परमबीर सिंह वसूली प्रकरण: दो पुलिस अधिकारी सात दिनों के लिए सीआईडी हिरासत में भेजे गये
    09 Nov 2021
    सीआईडी ने सोमवार को पुलिस निरीक्षक नंदकुमार गोपाले और निरीक्षक आशा कोरके को गिरफ्तार किया था। ये दोनों पहले मुंबई की अपराध शाखा में तैनात थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License