NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पोस्ट-मैट्रिक-स्कॉलरशिप योजना में हुए संशोधन से लाखों दलित छात्र होंगें प्रभावित
यह छात्रवृत्ति भारत में अनुसूचित जाति के समुदायों की समाजिक परिवर्तन में बहुत बड़ी भूमिका करती है, मंत्रालय के नए दिशा-निर्देश से दलित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का सपना धरा का धरा रह जाएगाI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Jun 2018
Translated by शारिब अहमद खान
dalit students

सामाजिक न्याय मंत्रालय भारत सरकार ने केंद्र सरकार की तरफ से अनुसूचित जाति के छात्रों को मिलने वाली पोस्ट-मैट्रिक-स्कॉलरशिप योजना  में संशोधन किया गया है। इस संशोधन का प्रावधान 30 मई 2018 को आया है। नए निर्देशों के अनुसार मैनेजमेंट कोटा के तहत प्रवेश  लेने पर या किसी भी संस्थान या विश्वविद्यालय में ऑन द स्पॉट प्रवेश लेने वाले पर छात्रों को इस छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा।

द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर सामाजिक न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के इस संशोधन को अमल में लाया जाता है तो इस साल उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले चार लाख दलित छात्रों को इस छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पायेगा।

पोस्ट-मैट्रिक-स्कॉलरशिप योजना  केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जाने वाली योजना है। यह योजना केंद्र सरकार और राज्य सरकार तथा केंद्रशासित प्रदेशों की मदद से कार्यान्वित की जाती है। योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के गरीब छात्रों को वित्तीय सहायता देना है ताकि वह भी उच्च शिक्षा लेकर समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। इस योजना का लाभ दसवीं पास करने के बाद उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों को मिलता हैं। योजना की पात्रता के अनुसार लाभ लेने वाले छात्रों के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से कम होनी चाहिए।     

यह छात्रवृत्ति लाखों आर्थिक और समाजिक रूप से पिछड़े छात्रों को समाज की मुख्यधारा में आने में सहायता करती है,  इस छात्रवृत्ति की वजह से छात्रों को पीएचडी तक के अध्ययन में भी वित्तीय सहायता मिलती है। यह छात्रवृत्ति भारत में अनुसूचित जाति के समुदायों की सामाजिक परिवर्तन मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पोस्ट-मैट्रिक-स्कॉलरशिप योजना के प्रमुख घटक कुछ इस प्रकार हैं...

भरन-पोषण भत्ता, अध्ययन भ्रमण शुल्क, थीसिस टाइपिंग, पुस्तक भत्ता, पुस्तक बैंक सुविधा व अक्षमता वाले एससी/एसटी छात्रों के लिए अतिरिक्त भत्ता।

इस छात्रवृत्ति का सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे छात्र  जो राशी फीस या अन्य किसी भी रूप में संस्थान या विश्वविद्यालय को देते हैं, वो उन्हें इस योजना के तहत वापस (रिइम्बर्समेंट) मिल जाते हैं। सरकार के नए मानदंड के अनुसार अब इस स्थिति में इस योजना का लाभ नहीं मिल पायेगा। इन नये निर्देशों के अनुसार भारत के किसी भी संस्थान (प्राईवेट/सरकारी) में ‘‘मैनेजमेंट कोटा के तहत प्रवेश लेने पर या ऑन द स्पॉट प्रवेश लेने पर छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

द टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी ने इस सम्बंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर ज्ञापन सौंपा है कि नए दिशा-निर्देशों से अनुसूचित जाति के छात्रों के सामाजिक न्याय और सामाजिक समानता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारी झटका लगेगा। भारत में ज़्यादातर छात्र इसी छात्रवृत्ति की वजह से निजी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले पाते हैं क्योंकि यहाँ के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इतने सारे उम्मीदवारों को प्रवेश नहीं मिल पाता।  

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सरकार ने भी इस नए दिशा-निर्देशों का विरोध किया है। पंजाब राज्य के अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति कल्याण मंत्री साधु सुन्दर सिंह धरमसोत ने कहा कि मैं केंद्र सरकार को इस निर्देश में बदलाव लाने के लिए लिखने जा रहा हूँ। गरीब छात्र प्रारंभिक शुल्क का भुगतान कहाँ से कर पाएँगे?

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस के छात्रों में सरकार के इस फैसले से काफी रोष है। कॉलेज के छात्र पोस्ट-मैट्रिक-स्कॉलरशिप योजना  में हुए नए संशोधन की वजह से धरना पर बैठे हैं। छात्रों ने केंद्र सरकार के द्वारा राज्यों को दी जानेवाली छात्रवृत्ति की राशी को भी कम बताया है। एक रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक न्याय मंत्रालय भारत सरकार ने दो फरवरी को संसद को सूचित किया था कि, राज्यों की 6,824.5 करोड़ की अनुसूचित जाति को मिलने वाली छात्रवृत्ति राशी अभी भी पेंडिंग है। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र प्रत्येक राज्यों पर 1,400 करोड़ की छात्रवृत्ति राशी अभी भी पेंडिंग है।

Dalits
dalit students
anti dalit
Scheduled Caste

Related Stories

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

बागपत: भड़ल गांव में दलितों की चमड़ा इकाइयों पर चला बुलडोज़र, मुआवज़ा और कार्रवाई की मांग

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

भारत में सामाजिक सुधार और महिलाओं का बौद्धिक विद्रोह

गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया


बाकी खबरें

  • विजय विनीत
    बनारस को धार्मिक उन्माद की आग में झोंकने का घातक खेल है "अज़ान बनाम हनुमान चालीसा" पॉलिटिक्स
    19 Apr 2022
    हनुमान चालीसा एक धार्मिक पाठ है। इसे किसी को जवाब देने के लिए नहीं, मन और आत्मा की शांति के लिए पढ़ा जाता है। अब इसका इस्तेमाल नफ़रती राजनीति के लिए किया जा रहा है। दिक्कत यह है कि बहुत से पढ़े-लिखे…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्य प्रदेश फसल घोटाला: माकपा ने कहा- 4000 करोड़ के घोटाले में बिचौलिए ही नहीं भाजपाई भी हैं शामिल
    19 Apr 2022
    माकपा ने इस घोटाले का आरोप बीजेपी पर लगाते हुए कहा है कि पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से चल रहे गेहूं घोटाले में बिचौलिए ही नहीं प्रशासन और भाजपाई भी बड़े पैमाने पर शामिल हैं। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: कई राज्यों में मामले बढ़े, दिल्ली-एनसीआर में फिर सख़्ती बढ़ी 
    19 Apr 2022
    देश के कई राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकारों ने कोरोना के नियमों का पालन करने जोर दिया है, और मास्क नहीं पहनने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा |
  • अजय कुमार
    मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बढ़ती नफ़रत के ख़िलाफ़ विरोध में लोग लामबंद क्यों नहीं होते?
    19 Apr 2022
    उत्तर भारत की मज़बूत जनाधार वाली पार्टियां जैसे कि समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, बाकी अन्य दलों के नेताओं की तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया, जिससे यह लगे कि भारत के टूटते ताने-बाने को बचाने के…
  • संदीप चक्रवर्ती
    केवल आर्थिक अधिकारों की लड़ाई से दलित समुदाय का उत्थान नहीं होगा : रामचंद्र डोम
    19 Apr 2022
    आर्थिक और सामाजिक शोषण आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं। माकपा की पोलिट ब्यूरो में चुने गए पहले दलित सदस्य का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक दोनों अधिकारों की लड़ाई महत्वपूर्ण है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License