NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प्रदूषण के लिए सब ज़िम्मेदार, लेकिन मार सिर्फ निर्माण मज़दूरों पर, कामबंदी से रोज़ी-रोटी का संकट
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए सरकार के साथ हम सब ज़िम्मेदार हैं लेकिन इसकी सबसे ज़्यादा मार पड़ी है निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले दिहाड़ी मज़दूरों पर। प्रदूषण की परवाह किए बिना हम ‘धूमधड़ाम’ से त्योहार मना रहे हैं, लेकिन कामबंदी से मज़दूरों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मुकुंद झा
09 Nov 2018
WORKERS PROTEST
दिल्ली में गुरुवार को भवन निर्माण मजदूरों ने प्रदर्शन किया।

देश के हर इलाके में आपको एक लेबर चौक जरूर मिलेगा जहाँ आपको सुबह 8 से 10 के बीच भरी चहल पहल दिखती है। मुख्यत: यह ऐसी जगह होती है जहाँ भवन निर्माण का कार्य करने वाले दिहाड़ी मजदूर रोज काम की तलाश में आते हैं, लेकिन दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से इन चौकों की रौनक गायब है। यहाँ आपको कोई भी मजदूर नहीं मिलेगा, आप सोचोगे कि मज़दूर आजकल त्योहार में व्यस्त होंगे या अपने गांव-घर गए होंगे, इसलिए कोई काम करने नहीं आ रहा होगा पर ऐसा नहीं है। मज़दूर अभी कोई त्योहार नहीं मना रहे बल्कि इन मजदूरों के सामने तो दो वक्त की रोटी का भी संकट हो गया है।

जी हां, जब त्योहारों पर आप पकवान खा रहे हैं, इन मज़दूरों को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही। अब आप कहंगे कि फिर ये काम करने क्यों नहीं आ रहे हैं?    

भवन निर्माण के मजदूर एक तरह से रोज कुआं खोदकर पानी पीते हैं, लेकिन उन्हें पिछले कई दिनों से कोई काम नहीं मिल रहा है। वजह? वजह है हमारा प्रदूषण और प्रदूषण से निपटने की हमारी आधी-अधूरी नीतियां। दरअसल दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में सभी तरह के निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध कर दिया है, बिना इसका कोई इंतज़ाम किए कि दिहाड़ी मज़दूर क्या करेगा, क्या खाएगा।

जब पूरा शहर रौशनी में नहाकर उत्सव में व्यस्त था, पूरा शहर खुशियों से झूम रहा था, दिवाली मना रहा था तब दिल्ली के कई ऐसे घर थे जहाँ अंधेरा पसरा था और वहां रहने वाले मजदूर रोटी दाल का इंतजाम करने की कोशिश कर रहे थे।

ऐसा ही एक परिवार दिल्ली के उत्तर–पूर्व संसदीय क्षेत्र के सोनिया विहार इलाके में था। इसके मुखिया राजेन्द्र यादव हैं जो भवन निर्माण में बेलदारी का काम करते हैं। इनके तीन बच्चे हैं। राजेन्द्र किसी ठेकेदार के माध्यम से काम करते हैं, उन्हें वो ठेकेदार 175 रुपये देता था, जबकि वो मालिक से 250 तक लेता है। उन्होंने बताया जितना वो रोज कमाते हैं उतने में बड़ी मुशिकिल से एक दिन का गुजारा होता है। ऐसे में तकरीबन एक सप्ताह से अधिक से कोई काम नहीं मिलने से उनके और उनके परिवार के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वे कहते हैं कि अब तो दुकानदार ने भी राशन देने से मना कर दिया है। वो कहता है पिछला बकाया दो, तब अगला राशन मिलेगा।

आपको यहाँ बता दें कि अधिकतर दिहाड़ी मजदूर प्रवासी हैं। इनके पास दिल्ली का राशन कार्ड भी नहीं है। इस कारण ये सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभ से भी बाहर हैं।

दिल्ली सरकार ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में सभी तरह के निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया, परन्तु यह सब करते हुए उन्होंने दिल्ली के इन भवन निर्माण मजदूरों के बारे में तनिक भी नहीं सोचा और सीधा एक झटके में इन मजदूरों की रोजी-रोटी छीन ली। दिल्ली में प्रदूषण के कई और गंभीर कारण हैं जो सरकार के नीतिगत विफलता को दर्शाते हैं। वो चाहे उद्योगों से होने वाला प्रदूषण हो या वाहनों से होने वाला प्रदूषण। हमारे एयरकंडीशनर से होने वाला प्रदूषण हो, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं या अब पटाखों से हुआ भयंकर प्रदूषण। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार, पड़ोसी राज्यों की सरकारें या केंद्र सरकार। ये सब मिलकर भी इनपर अंकुश लगाने में विफल रही हैं। लेकिन दिल्ली के लगभग 12 लाख निर्माण मजदूरों को बिना कोई वैकल्पिक आय का स्रोत दिए ही उनकी रोजी-रोटी छीन ली गई। और ये केवल इस बार ही नहीं है, हमेशा ही सरकारों द्वारा प्रदूषण रोकने के नाम पर मजदूरों को ही निशाना बनाया जाता है। एकबार फिर दिल्ली में यही हुआ है।

लगभग सभी मजदूर यूनियनों ने सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है। गुरुवार को जब शहर दीवाली के जश्न के बाद गोवर्धन पूजा, भइया दूज और छठ पूजा की तैयारी में जुटा था तब सैकड़ों की संख्या में भवन निर्माण मजदूर अपनी दो वक्त की रोटी के इन्तजाम के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

IMG-20181108-WA0003.jpg

गुरुवार बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन ने दिल्ली के निर्माण मज़दूरों के लिए बेरोज़गारी भत्ते की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास के समक्ष प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से आनेवाले निर्माण मज़दूरों ने हिस्सा लिया।

बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन ने कहा कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के नाम पर सारे निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे मज़दूरों की रोज़ी-रोटी पर गहरा संकट आ गया है। सरकार की गलत नीतियों और पूंजीपतियों के लोभ के चलते होने वाले भयानक प्रदूषण का खामियाजा भी समाज के गरीब-मेहनतकश को ही भुगतना पड़ रहा है।

ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (ऐक्टू) दिल्ली के उपाध्यक्ष राजीव ने कहा कि बिना सोचे-समझे कभी कारखानों की तालाबंदी और कभी निर्माण कार्य पर रोक लगाने से प्रदूषण से राहत नहीं मिल सकती। जब तक नीतिगत मामलों में सरकार अमीरों के हित साधने से बाज़ नहीं आती और जल-जंगल-ज़मीन की लूट नहीं रोकती तब तक पर्यावरण को नुकसान से बचाना संभव नही है। 

बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन की मुख्य मांगें

पहली मांग सरकार से ये है कि सरकार ने कामबंदी की है तो इसके बदले वो निर्माण भवन के ठेकेदारों को यह आदेश दे कि जब तक काम बंद है तब तक वो अपने मजदूरों को मजदूरी का भुगतान करे। बिल्कुल उसी तरह जैसे अन्य कर्मचारियों को कामबंदी या छुट्टी के दौरान का भी वेतन दिया जाता है।

अगर ये संभव नहीं है तो दिल्ली में निर्माण मजदूर कल्याण वेलफेयर बोर्ड है जिसके पास मजदूर के कल्याण के लिए एक मोटा बजट है। सरकार इस बोर्ड को निर्देशित करे कि वो मजदूरों को जब तक दिल्ली में निर्माण कार्य बंद है तब तक न्यूनतम मजदूरी के हिसाब से उन्हें बेरोजगारी भत्ता दे।

निर्माण मज़दूर चिंता देवी ने कहा कि "काम रुकने के चलते हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिहाड़ी नही मिलने के चलते हमारी रोज़ी-रोटी तक के लाले पड़ गए हैं। हमारी सरकार से ये मांग है कि कामबंदी के दिनों में सभी निर्माण मज़दूरों को न्यूनतम वेतन के बराबर बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए।"

IMG-20181108-WA0002.jpg

ऐक्टू के दिल्ली राज्य सचिव अभिषेक ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि सरकार कह रही है कि प्रदूषण बढ़ रहा है। सरकार हर बार मजदूरों पर ही हमला करती है जबकि दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण नीतिगत विफलता है। बिना योजना के कार्य हो रहा है। उद्योगों से जो कूड़ा निकल रहा है उसका निपटारा कैसे होगा। यही नहीं दिल्ली में सबसे बड़ा प्रदूषण का कारण वाहन हैं, सरकार उस पर तो कोई रोक नहीं लगा रही है। हम सरकार के निर्माण कार्य के बंद करने के खिलाफ नहीं हैं, बस हमारी मांग है कि सरकार को इन दिहाड़ी मजदूरों के बारे में भी सोचना चाहिए।

राजधानी भवन निर्माण कामगार यूनियन के अध्यक्ष व सीटू के राज्य सचिव सिद्धेश्वर शुक्ला ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सरकार के इस फैसले को एकतरफा करार दिया। उनके मुताबिक सरकार ने यह निर्णय करते हुए न तो मजदूर यूनियनों से बात की और न विशेषज्ञों से। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर अपनी विफलता को छिपाने के लिए निर्माण कार्यो पर पूर्णत प्रतिबन्ध लगा दिया बिना किसी अध्ययन के, जबकि निर्माण कार्य में कई ऐसे काम भी होते हैं जिसमें कोई भी प्रदूषण नहीं होता है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए थे और अगर वो ये नहीं कर सकी तो अब उसे मजदूरों के लिए कोई वैकल्पिक व्यस्था करनी चाहिए।

गुरुवार को हुए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन के महासचिव वीकेएस गौतम ने कहा कि निर्माण मज़दूरों की अनदेखी करके सरकार आराम से नहीं बैठ सकती। अगर जल्द ही हमारी माँगों पर कोई पहलकदमी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।

workers protest
Pollution in Delhi
AICCTU
CITU
Building Workers Union

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License