NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प्रधानमंत्री आवास योजना – मोदी की विफल नीति का एक और नमूना है
2019 तक एक करोड़ घर बनाए जाएंगे, लेकिन तीन वर्षों में लगभग 38 लाख ग्रामीण और केवल 67,000 शहरी आवास बनाए गए हैं।

सुबोध वर्मा
06 Jun 2018
Translated by महेश कुमार
PMAY

जब नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि उनकी सरकार सबके लिए पक्के घर बनाएगी तो वह भारतीयों और विशेष रूप से गरीब वर्गों के लिए बहुत ही प्रिय सपने को को छू रही थी। वर्तमान लागतों के साथ, और जो कमाई है, उसमें उन्हें पक्का घर मिल जाए जो लोग सामान्य कच्ची दीवार, नालीदार चादर या यहां तक कि एक झोंपड़ी में रहते हैं तो क्या बात है, यह ज्यादातर के लिए एक सपना है। इसलिए, मोदी के वादे, जैसे नौकरियों या भ्रष्टाचार पर, इस वायदे ने भी लोगों को नसों को  छुआ है।

लेकिन चार साल बीत चुके हैं और ग्रामीण और शहरी शाखाओं में महत्वाकांक्षी प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएई) अपने लक्ष्य के बहुत पीछे चल रही है। लगभग एक करोड़ घरों के लक्ष्य को देखते हुए अब तक आधे से भी कम आवास  बनाए गए हैं – यानी 95.4 लाख में से केवल 41 लाख। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पेश किए गए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक है जो पीएमएई के ग्रामीण घटक को संभालता है।

PMAY

 

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस योजना के लिए भारी मात्रा में धन खर्च किया गया है। - पिछले तीन वर्षों में (2015-16 से 2017-18 तक) 91,710 करोड़ रुपये खर्च हुए। केंद्र सरकार राज्य सरकार को प्रति इकाई 12 लाख रुपये देता है। लागत का 40 प्रतिशत शेयर करता है। यह योजना श्रमिकों के लिए श्रम प्रदान करने के लिए एमजीएनआरईजीएस के साथ 'स्वच्छता' के साथ 'अभिसरण' करती है। धन को बैंक से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। दूसरे शब्दों में, पीएम मोदी की सभी पालतू परियोजनाएं इस योजना में एक साथ बंधी हुई हैं। लाभार्थियों का चयन 2011 सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) डेटा पर आधारित है जिसे ग्राम सभा द्वारा 'मान्य' किया जाता है।

पीएमएई का शहरी घटक मुख्य रूप से भूमि और आवास के लिए निजी बिल्डरों और डेवलपर्स के साथ पीपीपी प्रणाली के लिए लक्षित है। इसकी स्थिति और भी बदतर है। इस साल मार्च में लोकसभा में आवास और शहरी मामलों के मंत्री द्वारा दिए गए एक उत्तर के अनुसार, अभी तक केवल 2.1 लाख इकाइयां मंजूर की गई हैं, जिनमें से 67,000 पूर्ण हो चुकी हैं और 43,574 पर मालिकों का कब्जा है।

PMAY

विभिन्न एजेंसियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले विभिन्न मानकों के कारण शहरी आवास की कमी का अनुमान  है। जनगणना और एनएसएसओ के बीच भी एक बड़ा अंतर है। सरकार द्वारा स्थापित एक तकनीकी समूह के अनुसार, शहरी आवास की कमी का नवीनतम अनुमान कम से कम 1 करोड़ इकाइयां है। इसकी तुलना में, मोदी सरकार की पीएमए की चमक महासागर में एक बूंद के बराबर भर है।

पीएमए  के तहत शहरी आवास के लिए फंड आवंटन भी मुख्य रूप से बहुत कम है क्योंकि अन्य सभी भव्य पीपीपी मॉडल की तरह, यह निजी संस्थाओं को आकर्षित करने में असफल रहा है जो इस योजना की लाभप्रदता से बहुत प्रेरित नहीं हैं। लेकिन निजी क्षेत्र को शामिल करने के लिए सरकार के आग्रह का मतलब है कि शहरी गरीबों को इस योजना की ख़राब प्रणाली से पीड़ित रहना पड़ेगा जो लम्बे समय तक जारी रहेगा।

PMAY

प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन हासिल करने वाले पहलों के नवीनतम दौर में, उन्होंने 5 जून को पीएमए लाभार्थियों के साथ एक वीडियो पर परस्पर बातचीत की, जहां उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों पर जोरदार बातें कही, और दोहराया कि 2022 तक, 3 करोड़ ग्रामीण और 2 करोड़ शहरी लोगों के पास पक्के घर होंगे (सभी मिलाकर कुल 5 करोड़), और उन्होंने इस ,मामले में पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करने के साथ अपने भाषण को समाप्त कर दिया। इस मोर्चे पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया लेकिन क्या मोदी सरकार ने उतना किया है?

PMAY
PPP model
BJP
प्रधानमंत्री

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर
    30 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर में सरकारी केंद्रों पर गेहूं ख़रीद शुरू हुए दस दिन होने को हैं लेकिन अब तक सिर्फ़ चार किसानों से ही उपज की ख़रीद हुई है। ऐसे में बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठा रहे है।
  • श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 
    30 Apr 2022
    प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 22 अप्रैल 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि ग्रामसभाओं की बैठक गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अलावा, विश्व जल दिवस और स्थानीय शासन…
  • समीना खान
    लखनऊ: महंगाई और बेरोज़गारी से ईद का रंग फीका, बाज़ार में भीड़ लेकिन ख़रीदारी कम
    30 Apr 2022
    बेरोज़गारी से लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर हुई है। ऐसे में ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ईद के मौक़े से कम से कम वे अपने बच्चों को कम कीमत का ही सही नया कपड़ा दिला सकें और खाने पीने की चीज़ ख़रीद…
  • अजय कुमार
    पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
    30 Apr 2022
    पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
  • रौनक छाबड़ा
    LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
    30 Apr 2022
    कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License