NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पाकिस्तान
प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता को धोखा दे रहे हैं?
पुलवामा आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यवहार में कोई दर्द या गुस्सा दिखाई नहीं देता है।

निखिल वाग्ले
25 Feb 2019
narendra modi
image courtesy- india.com

वे प्रचार करते हैं, वे हाथ हिलाते हैं, वे कैमरों के सामने मुस्कुराते हैं, वे लगातार विश्व की यात्रा करते रहते हैं। वे उतने ही बेपरवाह है जितना वे हमेशा से रहे हैं। पुलवामा आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यवहार में कोई दर्द या गुस्सा दिखाई नहीं देता है। पूरा देश परेशान है और अपने जवानों की शहादत का शोक मना रहा है लेकिन मोदी का हाव-भाव अभिमानी है। इसके अलावा उन्होंने हवाई अड्डे पर सऊदी अरब के प्रिंस का स्वागत करने और उन्हें गले लगाने के लिए प्रोटोकॉल तक तोड़ दिया जिन्होंने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को 20 मिलियन डॉलर की मदद दी है। विशेषज्ञ इसे कूटनीतिक मजबूरी कह सकते हैं लेकिन फिर जस्टिन ट्रूडो के साथ सख़्त व्यवहार क्यों किया गया? विडंबना यह है कि वह दो दिनों पहले दक्षिण कोरिया में थें और शांति पुरस्कार प्राप्त कर रहे थें। लेकिन पूरे भारत में निर्दोष काश्मीरियों पर हमले की निंदा करने में उन्हें एक सप्ताह से अधिक का समय लग गया।

मोदी सरकार के समर्थकों का दावा है कि वह आतंकवादियों को संदेश भेज रहे हैं। वे मानते हैं कि कार्यक्रम को जारी रखते हुए उन्होंने आतंकियों को बताया है कि देश में किसी तरह का ठहराव नहीं आएगा। यह एक प्रमाणिक प्रतिक्रिया होती अगर वह अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सभी अवसरों का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने कई उद्घाटन और आधारशिला समारोहों में भाग लिया जिनका शायद ही कोई राष्ट्रीय महत्व था। पुलवामा के बाद की अधिकांश रैलियों में उन्होंने पाकिस्तान और आतंकवादियों को कड़ा संदेश भेजा लेकिन चुनावी संदर्भ में। उन्होंने लोगों से एक मज़बूत सरकार का समर्थन करने को कहा। ये सब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बिल्कुल विपरीत है जिन्होंने शिष्टता बनाए रखा और इस तरह के हमलों का इस्तेमाल पक्षपातपूर्ण राजनीति के लिए कभी नहीं किया। यही एक लोकतांत्रवादी और भावना का इस्तेमाल करने वाले नेता के बीच का अंतर है।

दोपहर क़रीब 3.30 बजे पुलवामा आतंकी हमले के समय मोदी कॉर्बेट नेशनल पार्क में थें। वह जंगल सफारी के लिए गए हुए थें। उन्होंने एक डॉक्यूमेंट्री शूट में हिस्सा लिया और शाम 4.30 बजे एक रैली को संबोधित किया जिसमें इस हमले की निंदा नहीं की गई। मीडिया में अपने लोगों के ज़रिए सरकार एनएसए अजीत डोभाल और घटिया मोबाइल नेटवर्क पर दोष मढ़ रही है जिसके परिणामस्वरूप मोदी को इस भयावह हमले से बेख़बर होना पड़ा। यह मोदी को बचाने का साफ कोशिश है। सरकार जानती है कि वह हमले की सूचना मिलने के बाद भी मोदी के जंगल सफारी को लेकर बचाव नहीं कर सकती है। और अगर स्रोत सही हैं तो यह सरकार की सुरक्षा अधिकारियों के सबसे खतरनाक तस्वीर को प्रकट करता है कि वे कितने संवेदनाहीन हैं। किसी भी तरह मोदी को लेकर विवाद थम जाए।

मोदी एक मज़बूत और सजग नेता होने का दावा करते हैं। इस बार वह कहां गए हुए हैं? या यह सत्ता का अहंकार है? क्या वह नागरिकों को धोखा दे रहे हैं? जब देश हमले से हिल गया था तो मोदी और बीजेपी अनुभवी वक्ता बनने के लिए कोशिश किया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे को राजनीतिक न बनाने की अपील की और इन कठिन घड़ी में एकजुट होने को कहा। कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पहले 100 घंटों तक शिष्टाचारपूर्वक प्रतिक्रिया दिया। लेकिन पुरानी आदतें मुश्किल से ही जाती हैं। बीजेपी ने अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस हमले का फायदा उठाना शुरु कर दिया। आखिरकार सरकार और विपक्ष एक दूसरे के आमने सामने आ गए और विपक्षी दल भी इस हमाम में कूद पड़ी। बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में पाकिस्तान विरोधी जुलूस निकाला। बेशक ये सब अनाधिकारिक रूप से हुआ। मेरे सूत्रों ने मुझे बताया कि बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं को पार्टी के झंडे के बिना ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने का निर्देश दिया था। वे इस बात को बेहतर तरीके से जानते हैं कि इस लड़ाई से उन्हें आने वाले चुनावों में मदद मिलेगी।

सोशल मीडिया पर लगातार इसकी लड़ाई का सिलसिला जारी रहा। तथाकथित 'राष्ट्रवादियों' ने आलोचकों को परेशान करने और कश्मीरियों के बारे में ज़हर फैलाने के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए। स्क्रॉल की मृदुला चारी ने इस तरह के एक ग्रुप का खुलासा किया है। इस ‘भक्त आतंकी समूह’ ने उन पत्रकारों और नागरिकों को निशाना बनाया जिन्होंने पुलवामा हमले के बारे में कई वाजिब सवाल पूछे। दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी ऐसे ज़हर उगलने वाले समूहों के कुछ सदस्यों को फॉलो करते हैं।

पुलवामा हमले से पहले मोदी की लोकप्रियता घट रही थी। उनका राजनीतिक साख कम हो गई थी। इस वास्तविकता को स्वीकार करते हुए बीजेपी अपने सशक्त सहयोगियों की चापलूसी कर रही थी। इस सच्चाई का उपयुक्त उदाहरण महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन है। लेकिन पुलवामा हमले के बाद उनकी राजनीति को जोश मिला है। चालाक मोदी ने अपनी सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिए इस आतंकी हमले का फायदा उठाया है। मीडिया के एक वर्ग के माध्यम से निरंतर लड़ाई निश्चित रूप से उनके अति-राष्ट्रवाद में मदद करेगा। उनके पार्टी के लोगों का मानना है कि अगर युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो यह निश्चित रूप से मोदी के चुनाव अभियान को मज़बूत करेगा। एक तरह से जैश ए मुहम्मद और आईएसआई ने उन्हें बेरोज़गारी, रफ़ाल और कृषि संकट के ईर्द गिर्द उनके वादों से बचाया है।

दुर्भाग्य से हमारे समाज का एक वर्ग इस विरोध की रणनीति का शिकार हो गया है। मुस्लिमों पर हुए हमले को लेकर निंदा करने के लिए जिस तरह उन्होंने ज़्यादा समय लिया ठीक उसी तरह कश्मीरी छात्रों पर हिंदुत्ववादी भीड़ द्वारा किए जा रहे कायरतापूर्ण हमलों की तुरंत निंदा न करके वे शायद अपने कोर हिंदुत्व को एक दोस्ताना संदेश भेजना चाहते हैं। उनकी राजनीति में स्पष्ट तरीका है। यह समय ही बताएगा कि बेरोज़गार युवा, किसान, दलित और आदिवासी इस चश्मे से देखते हैं या नहीं।


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Image removed.

ReplyForward

Narendra modi
pulwama attack
kahsmir
crpf jawan
loksabha elcetion 2019

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • BJP
    अनिल जैन
    खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं
    01 May 2022
    राजस्थान में वसुंधरा खेमा उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है, तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसके खिलाफ है। ऐसी ही खींचतान महाराष्ट्र में भी…
  • ipta
    रवि शंकर दुबे
    समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा
    01 May 2022
    देश में फैली नफ़रत और धार्मिक उन्माद के ख़िलाफ़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मोहब्बत बांटने निकला है। देशभर के गावों और शहरों में घूम कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं।
  • प्रेम कुमार
    प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 
    01 May 2022
    4 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं तो न्याय व्यवस्था की पोल खुल जाती है। हाईकोर्ट में 40 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले जुड़कर 56 लाख हो जाते हैं जो लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट की…
  • आज का कार्टून
    दिन-तारीख़ कई, लेकिन सबसे ख़ास एक मई
    01 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान की नज़र में एक मई का मतलब।
  • राज वाल्मीकि
    ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना
    01 May 2022
    “मालिक हम से दस से बारह घंटे काम लेता है। मशीन पर खड़े होकर काम करना पड़ता है। मेरे घुटनों में दर्द रहने लगा है। आठ घंटे की मजदूरी के आठ-नौ हजार रुपये तनखा देता है। चार घंटे ओवर टाइम करनी पड़ती है तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License