NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
राजनीति
प्रख्यात वैज्ञानिक पीएम भार्गव का 89 वर्ष की उम्र में निधन
प्रोफसर के योगदान और उनके जीवन को याद करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ने एक वक्तव्य जारी किया है। नीचे वक्तव्य का अंश दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Aug 2017
प्रख्यात वैज्ञानिक पीएम भार्गव का 89 वर्ष की उम्र में निधन

हैदराबाद में सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर पीएम भार्गव का मंगलवार को निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थें। प्रोफसर के योगदान और उनके जीवन को याद करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ने एक वक्तव्य जारी किया है। नीचे वक्तव्य का अंश दिया गया है।

 

प्रोफेसर पीएम भार्गव के निधन पर ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क (एआइपीएसएन) ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रोफेसर भार्गव देश के प्रख्यात वैज्ञानिक और लाखों-करोड़ो लोगों के मार्गदर्शक थें। देश के लोगों के बीच विज्ञान और वैज्ञानिक मनोवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध थें। प्रोफेसर एमएम कालबूर्गी की हत्या और अखलाक की भीड़ द्वारा हत्या के चलते पद्म भूषण पुरस्कार सरकार को लौटाने वाले वे पहले वैज्ञानिक थें। जैसा कि हम जानते हैं कि इस तरह की क्रूरता लगातार जारी है।

 

प्रोफेसर पीएम भार्गव का निधन 89 वर्ष की उम्र में हैदराबाद में 1 अगस्त को हुआ। एआइपीएसएन ने प्रोफेसर भार्गव के परिवार,  दोस्तों और पूर्व सहयोगियों को अपनी हार्दिक संवेदनाएं भेजी है।

 

भारत की वैज्ञानिक संप्रभुता के संरक्षण के लिए एसोसिएशन ऑफ साइंटिफिक वर्कर्स ऑफ इंडिया (एएसडब्ल्यूआइ) में 1950 और 1960 के दशक में  प्रोफेसर पीएम भार्गव की पीढ़ी के कई वैज्ञानिकों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। वे सिर्फ एसएंडटी प्रतिष्ठानों में नेता ही नहीं थें बल्कि जल्द ही उभरकर सामने आएं और नेतृत्व किया। देश में वैज्ञानिक मनोवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1963 में  प्रोफेसर सतीश धवन, प्रोफेसर ए रहमान और प्रोफेसर पीएम भार्गव ने एक अग्रणी कदम उठाया और एक संगठन स्थापित किया जो देश में अपनी तरह का पहला संगठित मंच था। संविधान में अनुच्छेद 51 ए-एच को शामिल करने के विचार को बढ़ाना देने वालों में प्रोफेसर भार्गव भी शामिल थें जिन्होंने "वैज्ञानिक मनोवृत्ति, मानवतावाद और जांच की भावना और सुधार को विकसित करने के लिए" प्रोत्साहित किया।   .

 

भारतीय संयुक्त संस्कृति और उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर संगठित हमले के शुरूआती संकेत 1977 में देखा गया जब आरएसएस से दबाव में जब जनता पार्टी ने सरकार ने एनसीईआरटी की कुछ किताबों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। ये प्रारंभिक लक्षण थें और वर्ष 1981 में पीएन हकसर, राजा रमन्ना और पीएम भार्गव के नेतृत्व में वैज्ञानिक मनोवृत्ति पर एक दस्तावेज जारी किया। इस दस्तावेज ने उस समय एक बहस की शुरूआत की। इसी तरह के सवाल वर्ष 2011 में उठे और कई हमले हुए और इसी विषय पर पालमपुर प्रस्ताव पास किया गया। पालमपुर प्रस्ताव के तैयार करने में हमारे जैसे कई लोग एआइपीएसएन से शामिल हुए।

यह दुर्भाग्य है कि पिछले दो सप्ताह में भारत ने तीन प्रख्यात वैज्ञानिकों खोया है। ये वैज्ञानिक प्रोफेसर यूएन राव, प्रोफेसल यशपाल और अब प्रोफेसर पीएम भार्गव हैं जो संस्थान निर्माता थें। तीनों वैज्ञानिकों ने देश में विज्ञान की स्थापना में योगदान दिया और वैज्ञानिक मनोवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया। तीनों वैज्ञानिकों का एआइपीएसएन से गहरा संबंध था।

प्रोफेसर पीएम भार्गव का जन्म 22 फरवरी 1928 को अजमेर में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा वाराणसी और लखनऊ में हुई थी। उन्होंने ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में लखनऊ विश्वविद्यालय से 18 वर्ष की उम्र में एमएससी किया था। ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में प्रशिक्षण प्राप्त प्रोफेसर भार्गव 1950 के दशक से काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च से जुड़े रहे और अपना ज्यादातर कामकाजी जीवन क्षेत्रीय शोध प्रयोगशाला (इंस्टिच्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी) और सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीबीएम) हैदराबाद में बिताया। वे सीसीबीएम के संस्थापक थें और 1977-90 तक निदेशक के रूप में सेवाएं दी। देश में जैवविज्ञानी शोध के विकास में केमिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने वालों में प्रोफेसर भार्गव शामिल थें। उनका मानना था कि केमिस्ट इस शोध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। यही दृष्टिकोण प्रोफेसर सैय्यद हुसैन जहीर का भी था जिन्होंने हैदराबाद क्षेत्रीय शोध प्रयोगशाला का कई वर्षों तक नेतृत्व किया और बाद में सीएसआइआर के महानिदेशक हुए। इन्ही प्रारंभिक पहलों से सीसीएमबी उभरा था।

वैज्ञानिक मनोवृत्ति का विचार प्रोफेसर भार्गव के लिए हमेशा जुनून रहा। वर्ष 2000 में जब अटल बिहारी वायपेयी की एनडीए सरकार ने भारतीय विश्वविद्यलयों के पाठ्यक्रमों में ज्योतिष विद्या को लागू किया तो प्रोफेसर पीएम भार्गव ने इसको आंध्रप्रदेश उच्च न्यायलय में चुनौती दिया फिर बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया। दोनों ही अदालतों ने इन रिट याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार कर दिया।  

जीएम फसलों के लागू करने का भी प्रोफेसर भार्गव ने निम्न आधार पर विरोध किया थाः     

... जीएम खाद्य फसलों के पक्ष में एक और तर्क यह है कि हमें दुनिया भर में आज और कल की भोजन की कमी को पूरा करने के लिए अधिक भोजन की आवश्यकता है... ये हासोत्पादक तर्क है। आज जीएम तकनीक के उपयोग के बिना हम दुनिया की आबादी को खिलाने के लिए जरूरी भोजन का उत्पादन करते हैं, और हमें भविष्य की खाद्य आवश्यकताओं के लिए जीएम तकनीक की ज़रूरत नहीं है। भारत में हम जितना उत्पादन करते हैं उसका 40 प्रतिशत नष्ट हो जाता है।

इसके अलावा भोजन की कमी के चलते यहां के लोग भूखे नहीं है। वे भूखे इसलिए हैं कि उनके पास भोजन खरीदने के संसाधन नहीं हैं। तब वास्तव में हमारे पास सुरक्षा के लिए जीएम फसलों की जांच की जरूरत नहीं है।

 प्रोफेसर पी.एम. भार्गव ने पीपल्स साइंस मूवमेंट (पीएसएम) में कई व्यक्तियों और संगठनों के लिए एक संरक्षक के रूप में काम किया था। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों के जन विज्ञान वैदिक के साथ उनका निकट संबंध था। हमें यह भी याद है कि उन्होंने 18 सितंबर, 2015 को हैदराबाद में एआइपीएसएन ईसी मेंबर्स साथ कुछ घंटे बिताए। कई मुद्दे जिसमें जिसमें प्रोफेसर भार्गव शामिल थें, वे लंबे समय तक पीएसएम और हमारे नागरिकों के लिए जारी रहेंगे।

एआईपीएसएन
अवार्ड वापसी

Related Stories


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?
    08 Jan 2022
    भारत में मॉब लिंचिंग के आंकड़े हर दिन एक नया इतिहास रच रहे हैं, देश के हर राज्य में लोगों को सिर्फ शक के बिनाह पर सज़ा दी जा रही है.. इस नफ़रत के पीछे की वजह को समझते हैं..
  • Madarasa
    रूबी सरकार
    मध्य प्रदेश: मुश्किल दौर से गुज़र रहे मदरसे, आधे बंद हो गए, आधे बंद होने की कगार पर
    08 Jan 2022
    जब से एनडीए सरकार ने देश चलाने की जिम्मेदारी संभाली है तब से ही देश के मदरसों को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से ‘स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग क्वालिटी एजुकेशन मदरसा’ से मिलने वाला अनुदान बंद…
  • Pegasus
    जाकेक लेपियर्ज़
    भारत की तरह पौलेंड में भी पेगासस पर मचा हंगामा, विपक्षी नेताओं के फोन हैक करने का आरोप
    08 Jan 2022
    पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर विपक्षी सांसदों और एक फेडरल प्रासीक्यूटर के फोन हैक किए गए हैं। हालाँकि, पोलैंड की सरकार अपराधियों को खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
  • मोदी ‘सुरक्षा चूक’ मामला : वायरल वीडियो से बीजेपी ही कठघरे में
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मोदी ‘सुरक्षा चूक’ मामला : वायरल वीडियो से बीजेपी ही कठघरे में
    08 Jan 2022
    फ़िरोज़पुर रैली की खाली कुर्सियों की तस्वीरों के बाद अब वायरल हुए वीडियो ने बीजेपी को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। उधर, सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा चूक मामले में सोमवार को आगे की सुनवाई करेगा।
  • seb
    अनीस ज़रगर
    सस्ते ईरानी सेबों की वजह से लड़खड़ा रहा है कश्मीर का सेब व्यापार
    08 Jan 2022
    कश्मीर के प्रमुख सेब व्यापारियों के अनुसार उत्पादकों और व्यापारियों के पास सेब के 1.5 करोड़ से अधिक बक्से बिकने के लिए पड़े हुए हैं। लेकिन देश के प्रमुख फल बाजारों में ईरानी पैदावार की हालिया आवक के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License