NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
प्रशांत को ज़मानत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आज़ादी का अधिकार एक मौलिक अधिकार
शीर्ष अदालत ने कहा, 'प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उन्हें अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?'
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
11 Jun 2019
फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रशांत कनौजिया को मंगलवार को जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अवकाशकालीन पीठ ने कनौजिया को जमानत देते हुए कहा कि आजादी का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता।

बहरहाल, पीठ ने यह भी कहा कि जमानत देने का यह मतलब नहीं है कि वह सोशल मीडिया पर डाले गए पत्रकार के ट्वीट या पोस्ट को सही ठहरा रही है।

शीर्ष अदालत ने कहा, 'प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उन्हें अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर एक ट्वीट के लिए उनको गिरफ्तार किए जाने की क्या जरूरत थी। 

पीठ ने सोमवार को कनौजिया की पत्नी जगीशा अरोड़ा की ओर से अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन की दलीलों पर गौर किया। नित्या रामकृष्णन का कहना था कि इस मामले में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि यह गिरफ्तारी ‘गैरकानूनी’ और ‘असंवैधानिक’ है।

कोर्ट ने कहा कि लोगों की आजादी पूरी तरह अक्षुण्ण है और इससे कोई समझौता नहीं किया है। यह संविधान की ओर से दिया गया अधिकार है, जिसका कोई उल्लंघन नहीं कर सकता। 

जगीशा ने दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका 

जगीशा अरोड़ा ने अपने पति की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुये न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी और उन्हें अविलंब रिहा करने का उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था।

अधिवक्ता शादां फरासत के माध्यम से दायर याचिका में कनौजिया की पत्नी ने कथित रूप से ‘जमानती अपराध’ में दिल्ली से कनौजिया को गिरफ्तार करने के मामले में उप्र पुलिस के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था। 

इसके अलावा, याचिका में इस गैरकानूनी गिरफ्तारी के लिये कनौजिया को ऐसा मुआवजा दिलाने का अनुरोध किया गया है जो दूसरों के लिये भी नजीर बने।

याचिका में कहा गया कि हिन्दी पत्रकार के आवास पर आठ जून को सादी वर्दी में आये लोग उसे अपने साथ ले गये। याचिका के अनुसार सात जून को लखनऊ में हजरतगंज थाने में पुलिस अधिकारियों ने कनौजिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (आपराधिक मानहानि) और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। ये दोनों ही अपराध जमानती हैं।

याचिका के अनुसार इन कथित अपराधों के लिये दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत दिल्ली में ही पुलिस को उन्हें जमानत पर रिहा कर देना चाहिए था।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एएसजी विक्रमजीत बनर्जी अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा, 'ये ट्वीट बेहद अपमानजनक थे, हमने आईपीसी 505 भी लगाई है। कोर्ट ने आगे सवाल किया कि इसमें शरारत क्या है? आमतौर पर हम इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं करते, लेकिन इस तरह किसी व्यक्ति को 11 दिनों तक जेल में नहीं रख सकते। ये केस हत्या का नहीं है।'

क्या लिखा था प्रशांत कनौजिया ने?

कनौजिया ने कथित रूप से ट्विटर और फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया था जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर विभिन्न मीडिया संस्थाओं के संवाददाताओं के समक्ष एक महिला यह बोलते हुये दिखाई दे रही है कि उसने आदित्यनाथ के पास विवाह का प्रस्ताव भेजा है।

इस संबंध में कनौजिया के खिलाफ हजरतगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की और उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया। 

jagisha.jpg

कोर्ट का माहौल 

आमतौर पर गर्मियों की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट परिसर शांत नजर आता है लेकिन मंगलवार की सुबह 10 बजे से इस मामले की सुनवाई के लिए पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पक्षकारों की भीड़ इकट्ठा होने लगी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए करीब 50 से ज्यादा लोग कोर्ट रूम में मौजूद रहे। 

फैसले के बाद न्यूज़क्लिक ने प्रशांत कनौजिया की पत्नी जगीशा अरोड़ा से बातचीत की। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला हमारे हक में सुनाया है। मुझे भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है।'

प्रशांत कनौजिया के वकील वरिष्ठ वकील नित्या रामाकृष्णन ने कहा, ' शीर्ष अदालत ने प्रशांत को रिहा करने का आदेश देकर सही किया है। मैं उनके लिए खुश हूं।'

इस फैसले के तुरंत बाद से ही बहुत सारे पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ट्वीट करके खुशी जाहिर की। आपको बता दें कि प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया और पत्रकारिता जगत में उनके लिए समर्थन जुटने लगा था। सोमवार को उनकी गिरफ़्तारी के विरोध में पत्रकारों ने प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया था। 

कई गिरफ्तारियां 

आपको बता दें कि प्रशांत के अलावा इशिका सिंह और अनुज शुक्ला को उनके चैनल नेशन लाइव पर एक कार्यक्रम के लिए गिरफ्तार किया गया है। इस कार्यक्रम में आदित्यनाथ की प्रेमिका होने का दावा करने वाली और उनके साथ अपना जीवन बिताने की इच्छा जताने वाली महिला का वीडियो प्रसारित किया गया था।

एनडीटीवी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में रविवार की शाम दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के ट्वीट के अनुसार, ‘एक व्यक्ति की ट्विटर पर शिकायत मिली थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। उसे भाजपा नेता के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है।’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Prashant kanojia
twitter
UP police
Yogi Adityanath
Social Media
FIR
BJP
Journalists
Supreme Court

Related Stories

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

पंजाब विधानसभा चुनाव: प्रचार का नया हथियार बना सोशल मीडिया, अख़बार हुए पीछे

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

हेट स्पीच और भ्रामक सूचनाओं पर फेसबुक कार्रवाई क्यों नहीं करता?


बाकी खबरें

  • putin
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध; अहम घटनाक्रम: रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश 
    28 Feb 2022
    एक तरफ पुतिन ने रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है, तो वहीं यूक्रेन में युद्ध से अभी तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License