NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पश्चिम समर्थित सऊदी गठबंधन के द्वारा बमबारी से बर्बाद हो सकता है यमन
एक फ्रेंच अखबार के अनुसार फ्रांस ने होडीदा की लड़ाई में UAE के सैनिकों के साथ अपनी विशेष सेना को भी लड़ने के लिए भेजा था जिससे वह हौथी विद्रोहियों से लोहा ले सकें। 
द डॉन न्यूज़
19 Jun 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
yemen

होदेईदाह बंदरगाह से यमन  को 70 % मानवीय सहायता मिलती है, यही वजह है कि इस इलाके में अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन द्वारा की जा रही बमबारी और वहाँ चल रही लड़ाई से देश की हालत बिगड़ रही है। सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब एमिरेट्स, जिन्हें अमेरिका, UK और फ़्रांस का समर्थन  प्राप्त  है, ने लाल सागर के एक मुख्य बंदरगाह के शहर पर हल्ला बोलते हुए होदेईदाह की घेराबंदी कर ली है।  United Nations Office of Coordination of Humanitarian Assistance (OCHA) के मुताबिक गठबंधन की सेनाओं द्वारा  Al Hudaydah  शहर और Ad Durayhimi  ज़िले  के विभिन्न इलाकों में जिसमें Al Hudaydah शहर का  विश्विद्यालय शामिल है, पर हवाई हमलों  की वजह से हज़ारों  स्थानीय लोगों ये इलाके छोड़कर चले गए।  

सऊदी और UAE द्वारा लगातार बम्बारी पर एक स्वतंत्र पत्रकार  मनल काएद  ने रविवार को अल जज़ीरा को बताया "हवाई  जहाज़ ज़मीन के बहुत करीब उड़ते हैं और हमें शहर की सरहदों पर धमाके सुनाई देते हैं। सब परेशान हैं। हमें नहीं पता  क्या होने वाला है।"

मानवतावादी सगठनों का कहना है कि सऊदी के नेतृत्व में सेनाओं द्वारा यमन  में शुरू किये गये युद्ध का ये नया दौर, जो पिछले 4 सालों से जारी है, देश को पूरी तरह बर्बाद कर देगा। होदेईदा का शहर यमन की जीवन रेखा है अगर यह बर्बाद हुआ तो हौथी विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्र धराशाही हो जायेंगेI राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गठबंधन सेनाएँ  इस शहर पर कब्ज़ा  करने का प्रयास  कर रही हैं जिससे आम लोगों की और हौथी विद्रोहियों की सप्लाई लाइन को काट दिया जाए और विद्रोहियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जाए। 

ये लड़ाई जिसने अब तक 10,000 यमन  नागरिकों की जान ले ली है 2015 में सऊदी अरब और UAE की सेना के हमले के बाद शुरू हुई। ये इसीलिए किया गया क्योंकि शिया हौथी विद्रोहियों ने Abdrabbuh Mansur Hadi की सरकार को गिरा दिया था, इस लड़ाई का मकसद उन्हें फिर सरकार में लाना है।  इस युद्ध में अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन द्वारा की गयी बमबारी ने यमन में स्वास्थ्य, पानी, सेनिटेशन और दूसरी सुविधाओं को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। 2016 में कॉलरा फ़ैल जाने की वजह से 2,000 लोगों की मौत हो गयी और लाखों लोगों की ज़िन्दगी पर भयानक असर पड़ा। 

मानवतावादी संगठनो का कहना है कि यहाँ 2 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है, जिनमें से 70 लाख लोग सूखे जैसे हालात झेल रहे हैं और पूरी तरह खाद्य सहायता पर निर्भर हैं।  2,200,000बच्चे कुपोषण के शिकार हैं और इनमें  से 3,85,000 बच्चे जीने  के लिए दवाइयों  पर निर्भर हैं।  अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के युद्ध अपराधों की काफी निंदा  हुई और इनको मिल रहे पश्चिमी देशों के समर्थन को खत्म करने को भी कहा गया है। एक फ्रेंच अखबार के अनुसार फ्रांस ने होडीदा की लड़ाई में UAE के सैनिकों के साथ अपनी विशेष सेना को भी लड़ने के लिए भेजा था जिससे वह हौथी विद्रोहियों से लोहा ले सकें। 

ब्रूकिंग्स इंस्टिटूशन के एक वरिष्ठ फेलो और CIA के पूर्व  सदस्य  ब्रूस रीडेल ने कहा "अगर अमेरिका  और UK आज रात सलमान (सऊदी के राजा) को कह  दें  कि 'इस लड़ाई को खत्म होना होगा' तो ये लड़ाई कल खत्म हो जाएगी। सऊदी की राजकीय वायु सेना बिना अमेरिकी और ब्रिटिश समर्थन  के काम नहीं कर सकती।"  एक तरफ बमबारी बढ़ती जा रही है और दूसरी तरफ होदेईदाह से  कट जाने की आशंका की वजह से यमन  की 2,70,000 जनता  के सर पर मौत का खतरा बढ़ता जा रहा हैI इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ ने ये चेतावनी दी है कि इस घेरा  बंदी से 2,50,00 लोगों की मौत हो सकती है। 

yemen
Saudi Arab
United nations
United States
United kingdom

Related Stories

डोनबास में हार के बाद अमेरिकी कहानी ज़िंदा नहीं रहेगी 

भारत को अब क्वाड छोड़ देना चाहिए! 

मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की

मजबूत गठजोड़ की ओर अग्रसर होते चीन और रूस

विश्व आदिवासी दिवस पर उठी मांग, ‘पेसा कानून’ की नियमावली जल्द बनाये झारखंड सरकार

दुनिया में हर जगह महिलाएँ हाशिए पर हैं!

खोरी गांव: मकानों को टूटने से बचाने के लिए यूनाइटेड नेशन को भेजा ज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन: भारत पर इसका असर और नागरिक समाज के बहिष्कार का कारण

लोकतंत्र के अंतरराष्ट्रीयकरण का मिथक 

दुनिया की हर तीसरी महिला है हिंसा का शिकार : डबल्यूएचओ रिपोर्ट


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    दिल्ली और पंजाब के बाद, क्या हिमाचल विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय बनाएगी AAP?
    09 Apr 2022
    इस साल के आखिर तक हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो प्रदेश में आप की एंट्री ने माहौल ज़रा गर्म कर दिया है, हालांकि भाजपा ने भी आप को एक ज़ोरदार झटका दिया 
  • जोश क्लेम, यूजीन सिमोनोव
    जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 
    09 Apr 2022
    जलविद्युत परियोजना विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने में न केवल विफल है, बल्कि यह उन देशों में मीथेन गैस की खास मात्रा का उत्सर्जन करते हुए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न संकट को बढ़ा देता है। 
  • Abhay Kumar Dubey
    न्यूज़क्लिक टीम
    हिंदुत्व की गोलबंदी बनाम सामाजिक न्याय की गोलबंदी
    09 Apr 2022
    पिछले तीन दशकों में जातिगत अस्मिता और धर्मगत अस्मिता के इर्द गिर्द नाचती उत्तर भारत की राजनीति किस तरह से बदल रही है? सामाजिक न्याय की राजनीति का क्या हाल है?
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे
    09 Apr 2022
    एक तरफ लोगों को जहां बढ़ती महंगाई के चलते रोज़मर्रा की बुनियादी ज़रूरतों के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भी अब ज़्यादा से ज़्यादा पैसे खर्च…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: इमरान को हिन्दुस्तान पसंद है...
    09 Apr 2022
    अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले देश के नाम अपने संबोधन में इमरान ख़ान ने दो-तीन बार भारत की तारीफ़ की। हालांकि इसमें भी उन्होंने सच और झूठ का घालमेल किया, ताकि उनका हित सध सके। लेकिन यह दिलचस्प है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License