NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पत्थलगड़ी आन्दोलन की चर्चित एक्टिविस्ट बबिता कच्छप पर क्यों लगा राजद्रोह का मुकदमा?
बबिता कच्छप ने पिछले दिनों मोदी शासन के खिलाफ आदिवासियों से जुड़े संविधान की पांचवी अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन किये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मोदी शाह सरकार से लिखित जवाब माँगा था।
अनिल अंशुमन
29 Jul 2020
b

झारखण्ड में पत्थलगड़ी आन्दोलन की चर्चित एक्टिविस्ट रही बेलोसा बबिता कच्छप और उनके दो साथियों की गुजरात सरकार द्वारा गिरफ्तार किये जाने का मामला प्रदेश के आदिवासी एक्टिविस्टों  में काफी तूल पकड़ता जा रहा है। झारखण्ड आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के वरिष्ठ प्रवक्ता प्रेमचंद मुर्मू ने इसे मोदी सरकार की बदले की दमन कारवाई बताते हुए कहा है कि इसके पहले भी जब प्रदेश में इनका शासन था तो सारे आदिवासी एक्टिविस्टों और आम ग्रामीणों पर देशद्रोह का मुकदमा थोप दिया गया था।

जिनका अपराध सिर्फ यही था कि वे तत्कालीन झारखण्ड की भाजपा सरकार द्वारा पांचवी अनुसूची के सभी विशेष प्रावधानों के धड़ल्ले से उल्लंघन कर यहाँ के जल-जंगल-ज़मीन और खनिज की बेलगाम लूट के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे। यह मोदी शाह की जोड़ी और रघुवर राज को कत्तई बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था। परिणामस्वरुप सारे आदिवासी इलाकों को इस क़दर पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था कि हज़ारों आदिवासी परिवारों को लम्बे समय तक अपने घरों से पलायन करना पड़ गया था।  


ऑल इण्डिया पीपुल्स फोरम , झारखण्ड के युवा आदिवासी एक्टिविस्ट जेवियर कुजूर ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा है कि मोदी-शाह शासन आदिवासी समाज की जागरूकता से बुरी तरह घबराता है। चूँकि बबिता कच्छप ने पिछले दिनों मोदी शासन के खिलाफ आदिवासियों से जुड़े संविधान की पांचवी अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन किये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मोदी शाह सरकार से लिखित जवाब माँगा था।  

झारखण्ड की आदिवासी मूलवासी जनता ने भाजपा को सबक सिखाते हुए राज्य की गद्दी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है तो अब ये गुजरात में अपनी सरकार द्वारा वही सारे पुराने आरोप लगाकर गिरफ्तारियां कर आवाज़ कुचलने का पुराना हथकंडा लागू कर रहें हैं।                          

आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट रशिम कात्यायन जी ने तो हैरानी प्रकट करते हुए कहा है कि पत्थलगड़ी आन्दोलन और मावोवाद प्रभावित इलाका जब झारखण्ड को ही प्रचारित कर रखा है तो फिर गुजरात में अचानक से ये दोनों मुद्दे कहाँ से आ गये ? क्यों इस मामले पर झारखण्ड भाजपा के वे सभी आदिवासी नेतागण चुप्पी मारे बैठे हैं जो हाल के दिनों में बात-बात पर हेमंत सोरेन सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाकर सड़कों पर उतरा करते थे?

इस गिरफ्तारी के पीछे का असली मामला भाजपा सरकार क्यों नहीं बताना चाहती है?झारखण्ड आदिवासी महासभा ने बबिता व उनके साथियों की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए ज़ोरदार विरोध किया है। महासभा ने मोदी शासन पर यह भी खुला आरोप लगाया है कि वह संवैधानिक जागरूकता को दबाने के लिए ही उसने ये गिरफ्तारी कराई है। जो देश के संविधान के साथ-साथ यहाँ के न्यायतंत्र के साथ भी खुला मज़ाक है। महासभा ने देश के सभी आदिवासी सांसद – विधायकों और झारखण्ड टीएसी सदस्यों से तत्काल संज्ञान लेने की विशेष मांग की है।  

उधर,गिरफ्तारी के दूसरे ही दिन भारतीय ट्राइबल पार्टी के गुजरात के विधायकों ने भी ट्वीट बयान जारी कर बबिता व उनके साथियों को अविलम्ब रिहा करने की मांग करते हुए सरकार से नक्सलवाद की परिभाषा मांगी है।  खबर यह भी है कि रघुवर शासन में इस मामले से जुड़ी खूंटी पुलिस द्वारा रिमांड पर लेने के सन्दर्भ में लीगल एक्सपर्ट से राय ली जा रही है।              
             
ज्ञात हो कि तीन दिन पहले जब गुजरात के महिसागर में आदिवासियों के समूह ने बबिता जी को बतौर गेस्ट वक्ता के रूप में बुलाया था।  जिसमें वे अपने दो साथियों के साथ शामिल होने गयीं थीं।  

जिसका पोस्ट खुद बबिता जी ने ही लगाते हुए ये जानकारी दी थी कि किस तरह उनके भाषण से पहले कुछ लोगों ने आकर उन्हें चेताया था कि आप यहाँ भाषण मत दीजिये पुलिस आपको खोज रही है तो उन्होंने कहा था कि पुलिस को आकर जो करना करे वे यहाँ से नहीं जायेंगी और भाषण दिया।
                     
अनुमान यही लगाया जा रहा है कि कार्यक्रम के तत्काल बाद ही गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ता ( ATS ) ने बेलोसा बबिता कच्छप व उनके दोनों साथियों को गुजरात के महिसागर जिले के संतरामपुर में गिरफ्तार कर लिया।  इनलोगों पर मावोवादी, नक्सली होने का आरोप लगाते हुए IPC – 124 A ( राजद्रोह से सम्बंधित ) और 120 ( B ) की संगीन धाराएँ लगाई गयीं हैं।  

फिलहाल बबिता कच्छप व उनके साथियों को जेल भेजा जा चुका है।  स्थानीय आदिवासी संगठन के लोग इनकी रिहाई के लिए कानूनी उपायों में जुट गए हैं।  इधर झारखण्ड के एक्टिविस्टों का मानना है कि गुजरात के साथियों की न्याय गुहार का परिणाम कबतक और कैसा निकलेगा, इसे लेकर भी बहुत मुगालते में नहीं हैं। क्योंकि जिस तरह से जेल में बंद कोरोना पीड़ित क्रांतिकारी कवि वरवर राव और साईंबाबा से लेकर देश के दर्जनों वरिष्ठ एक्टिविस्टों  की रिहाई को लेकर महीनों से डेट पर डेट ही दिए जा रहें हैं, चीजें साफ़ इशारा कर रहीं हैं।

बहरहाल , मोदी शासन और गुजरात सरकार ने भी अभी तक इस गिरफ्तारी को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।  लेकिन सोशल मीडिया में तेज़ी से वायरल हुए इस खबर में कि बबिता कच्छप द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका ने जो मोदी सरकार को जवाब देने की नौबत में पहुंचा दिया है और जिससे वह काफी कुपित है , दम लगती है ! 

Pathalgadi movement
modi government and activist
sedtion on babita kachhap of jhrakhand babita kachhap of pathalgadi movement
Jharkhand government

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए

झारखंड: केंद्रीय उद्योग मंत्री ने एचईसी को बचाने की जवाबदेही से किया इंकार, मज़दूरों ने किया आरपार लड़ाई का ऐलान

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

बाघमारा कोल साइडिंग में छंटनी का विरोध कर रहे मज़दूरों पर प्रबंधन ने कराया लाठीचार्ज


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License