NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
पुलवामा नरसंहार: कुछ अनुत्तरित प्रश्न
कश्मीर के लोगों को जीत लिया जाना चाहिए था, लेकिन बच्चों के ऊपर छर्रे चलाकर ऐसा नहीं किया जा सकता है।
उज्ज्वल के. चौधरी
16 Feb 2019
Translated by महेश कुमार
pulwama
image courtesy- financial express

शुरू में, मुझे ईमानदारी से इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि मैं एक देशभक्त भारतीय नागरिक के रूप में, और एक भारतीय सेना के डॉक्टर के बेटे के रूप में, जो अब इस दुनिया में नहीं है, और जिन्होंने 1971 के बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में शिरकत की थी कि हम इस बात से बेहद दु:खी हैं कि उरी और पुलवामा में भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को उन आतंकवादियों ने घृणित हमले में मार दिया जिनका वित्त पोषण उन आतंकी संगठनों द्वारा किया जा रहा है जिन्हें पाकिस्तान द्वारा संरक्षित किया जाता है। इस पर कोई राजनीति नही की जानी चाहिए, और सेना को आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सभी संभव उपाय करने चाहिए, और सभी तरह के आतंकवादियों को बेअसर कर देना चाहिए।

यह सब कहने के बाद, कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाना भी जरूरी है। और हम इन सवालों को सरकार से नहीं तो किससे पूछें जिसे हमने खुद चुना है?14 फरवरी को, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक कार को दक्षिण कश्मीर में पुलवामा जिले के बीच से गुजर रहे सीआरपीएफ के काफिले में विस्फोट कर दिया। शाम तक, मरने वालों की संख्या 40 को छू गई थी। यह अर्धसैनिक बल के इतिहास में दूसरा सबसे घातक हमला है। गुरुवार के हमले के साथ, कश्मीर में CRPF ने 2019 में इतने जवानों को एक साथ खो दिया जितने उन्होंने  पिछले चार साल में नहीं खोए थे।

अब सवाल

कैसे CRPF बटालियन की आवाजाही लीक हो गई? क्या यह खुफिया विफलता नहीं है? इस काफिले के केंद्र में तकरीबन 100  किलो विस्फोटक ले जाने वाला आतंकवादी कैसे हमला कर गया? यहां हमारी प्रसिद्ध निगरानी कैसे विफल हो गई? अब और पिछले कई वर्षों से कश्मीर पर कौन शासन कर रहा है? किसकी खुफिया जानकारी विफल हो रही है? कश्मीर एक साल या उससे अधिक समय से राष्ट्रपति शासन के अधीन है, और जबकि इससे पहले पीडीपी-भाजपा सरकार तीन साल से शासन कर रही थी। उन्हें कम से कम संकट के पिछले 3-4 वर्षों की जिम्मेदारी अपने उपर लेनी होगी।

इसके अलावा, आज कश्मीर ऐसी स्थिति में क्यों है, जहां सन 2000 के बाद से स्थिति ओर खराब हुई है? यहां भारी मतदान हुआ था (72 प्रतिशत) और जम्मू कश्मीर में पीडीपी और जम्मू में भाजपा ने (87 सीटों में से 53 सीटों) अधिकांश सीटें जीतीं थी। एक अप्रत्याशित पीडीपी-भाजपा सरकार ने शपथ ली और श्रीनगर के लाल मैदान में भारतीय पीएम मोदी और कश्मीर के सीएम मुफ्ती ने लोगों को 10,000 करोड़ रुपये के विकास पैकेज का वादा किया था। लेकिन, इसमें से 10 फीसदी भी खर्च कर दिया गया; पीडीपी और बीजेपी में टकराव होता रहा और बीजेपी ने एकतरफा समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

पिछली विधानसभा में मतदाताओं का भारी मतदान क्यों हुआ और एक ऐतिहासिक सरकार के गठन को खोए हुए अवसर में क्यों बदल दिया गया? जो लोग कश्मीर और केंद्र में शासन कर रहे हैं, उन्हें वास्तव में लोगों के लिए किए गए कार्यों पर एक श्वेत पत्र जारी करने की आवश्यकता है, क्योंकि वही स्थिति आज भी बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर के भीतर स्वदेशी उग्रवाद वर्तमान में सीमा पार आतंकवाद की सराहना कर रहा है, जो सबसे बड़ी दुख की बात है।

ऐसा क्यों है कि नागरिक भी सरकार के खिलाफ हो रहे हैं और उग्रवाद में शामिल हो रहे हैं? अगर कश्मीर में खून बह रहा है, तो इस पर भारत के बाकी हिस्सों में तकलीफ क्यों नहीं है? यदि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, तो चार साल पहले हुए शांतिपूर्ण चुनावों के बावजूद कोई राजनीतिक समाधान क्यों नहीं है?
जो लोग सेना और जवानों के लिए प्रतिज्ञा करते हैं, उन्हें भी अपने राष्ट्रवाद पर काबू पाने की जरूरत है, और उन्हे कुछ सवाल उठाने चाहिए। तीन दशकों के आतंकवादी हमले में यह सबसे बड़ी तादाद मौत की घटना क्यों हुई? सन 2018 में 250 से अधिक आतंकवादी कैसे मारे गए जिनकी संख्या पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है? सन 2019 में कश्मीर में दो महीनों की आतंकी मौतों की संख्या पुरे 2018 में हुई आतंकी मौतों की संख्या से अधिक कैसे है? कश्मीर में ऐसी गड़बड़ी क्यों है? और क्या टेरर फंडिंग (आतंकवाद का वित्त पोषण)  नोटबंदी से खत्म क्यों नहीं हुआ है? आतंकियों के पास इतने हथियार और पैसे कहां से आए? सर्जिकल स्ट्राइक का क्या उद्देश्य है? या यह केवल राजनीतिक प्रकाशिकी के लिए या बॉलीवुड में और राजनीतिक अभियानों में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा उपयोग के लिए था जो कि वास्तव में बहुत अफसोसजनक स्थिति है? कई बार पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी, लेकिन किसी भी सरकार ने अतीत में सेना की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से भुनाने के लिए नहीं चुना था, जैसा कि वर्तमान सरकार द्वारा किया जा रहा है।

भारतीय टेलीविजन समाचार मीडिया, टीआरपी की तलाश में बेशर्मी से, बड़े पैमाने पर, कश्मीर के मानव और आतंकी संकट को दुधारी गाय की तरह दुह रहा है और पाकिस्तान के साथ युद्ध का आह्वान कर रहा है, जो निश्चित रूप से एक दुष्ट और नाभिकीय स्थिति है।नहीं, एक पूर्ण पैमाने पर बेरोक टोक युद्ध इसका कोई समाधान नहीं हो सकता है। यह स्थिति को ओर खराब करेगा, दोनों तरफ अत्यधिक नागरिक हताहत हो सकते है, और सामूहिक विनाश के हथियारों का उपयोग किया जा सकता है।

हमें आज़ की इस दर्दनाक वास्तविकता को समझना होगा। एक अशांत कश्मीर पाकिस्तान के हित में है और कश्मीर संकट को एक बहाने के रूप में उपयोग कर वह अमेरिका से अधिक धन और हथियार पाने चाहता है। उनकी यह नीति नागरिक समाज के उपर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई और बड़े पैमाने पर व्यापार और वहां नौकरशाही पर शिकंजा कसने को सुनिश्चित करता है। दूसरी ओर, अशांत कश्मीर भारत को और अधिक हथियार रखने का अवसर देता है, और जैसा कि हम जानते हैं, भारत दुनिया में हथियारों और गोला-बारूद का सबसे बड़ा आयातक है (यह स्थिति तब है जबकि अभी भी भारत कई महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे में कम़जोर है)। यह स्थिति कुछ भारतीय राजनीतिक ताकतों को चुनाव के मौसम में वोटों का ध्रुवीकरण करने में मदद करती है। अशांत कश्मीर सेना और स्थानीय पुलिस के लिए उच्च बजट प्राप्त करने का प्राव्धान उप्लब्ध कराता है और उनकी गतिविधियों को बेरोकटोक जारी रखने में मदद करता है (कभी-कभी जरूरत के अनुसार और कभी ज्यादती हो जाती है)। एक अशांत कश्मीर आतंकवादियों के लिए विश्व स्तर पर संसाधन जुटाने और अपने प्रचार तंत्र को चलाने के लिए बेहद जरूरी है। एक अशांत कश्मीर स्थानीय राजनेताओं और आजाद कश्मीर के वक्ताओं के लिए भी जरूरी है क्योंकि यह उनके राजनीतिक उपद्रव को बरकरार रखता है। केवल आम कश्मीरी ही है जाओ वहां मौजूद गंदगी के साथ सभी मोर्चों पर हारने के लिए खड़ा है। यही दुखद परिदृश्य है।

हां, आतंकवाद को कुचल दिया जाना चाहिए। इसके लिए मिलिट्री को अपना काम पेशेवर तरीके से करने दें। लेकिन इसके साथ कश्मीर के लोगों को भी जीतना होगा। बच्चों पर छर्रे के हमले से ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसे एक साधारण कश्मीरी द्वारा भी नहीं किया जा सकता है जो वोट देने आया था, और जिसे सेना की जीप के सामने एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। यह घाटी में मीडिया और इंटरनेट पर नियमित रूप से बंद लगाकर भी नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक रूप से जम्मू कश्मीर को एक दुसरे के खिलाफ खड़ा करके भी नहीं किया जा सकता है। उन बलात्कारियों के साथ इसलिए खड़े होकर भी ऐसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे हिंदू हैं और जिस छोटी बच्ची का बलात्कार हुआ वह एक मुस्लिम लड़की थी। कश्मीर की बाढ़ के दौरान भारतीय सेना ने जो सलामी का काम किया था, ऐसा कर कुछ हासिल किया जा सकता है। यह खेल, स्वास्थ्य प्रशिक्षण, कौशल परिनियोजन आदि में नागरिक आबादी को साथ मिलाकर किया जा सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र में पहले से ही इसके लिए अन्य सुझाव हैं।

(लेखक एक मीडिया अकादमिक और स्तंभकार हैं और वर्तमान में पर्ल अकादमी, दिल्ली और मुंबई के मीडिया डीन हैं। लेखक द्वारा व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)
 


 

pulwama attack
CRPF Jawan Killed
rdx bomb
some question
BJP
national confrence
Kashmir crises

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • AUKUS May put NATO’s Future into Question
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    नाटो के भविष्य को संकट में डाल सकता है एयूकेयूएस 
    25 Sep 2021
    इस डील के परिणामस्वरूप दो ऐतिहासिक साझीदारों, अमेरिका एवं फ्रांस के संबंधों में गंभीर दरार आ गई है। इससे नाटो को भी आनुषांगिक रूप से घाटा हो सकता है।
  • Tamil Nadu
    नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु के मछुआरे समुद्री मत्स्य उद्योग विधेयक के ख़िलाफ़ अपना विरोध तेज़ करेंगे
    25 Sep 2021
    मछुआरे समुदाय का आरोप है कि विधेयक और ब्ल्यू इकॉनमी मसौदा नीति कॉर्पोरेट संस्थाओं के हितों का पक्षपोषण करती है।
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या शांति की ओर बढ़ रहा है अफ़ग़ानिस्तान?
    25 Sep 2021
    अफ़गान अर्थव्यवस्था को उबारने में चीन की तत्परता एक बिल्कुल नया कारक है। अब बाइडेन प्रशासन अफ़गानिस्तान और मध्य एशिया में और अधिक उलझावों में शामिल नहीं होना चाहता है, इन हालत में अफ़गानिस्तान के पड़ोसी…
  • Kannur University
    सुचिंतन दास
    नहीं पढ़ने का अधिकार
    25 Sep 2021
    नफ़रत और कट्टरता से भरी बातों को पढ़ने से इनकार कर के कन्नूर विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस सिलेबस की समीक्षा करने और इसके ज़रिये शासन की विस्तारात्मक नीति का  विरोध कर अहम राजनीतिक कार्य को अंजाम…
  • Harshil farmers
    वर्षा सिंह
    हर्षिल के सेब किसानों की समस्याओं का हल क्यों नहीं ढूंढ पायी उत्तराखंड सरकार
    25 Sep 2021
    हर्षिल के काश्तकारों ने इस महोत्सव का सीधे तौर पर बायकॉट कर दिया। महोत्सव शुरू होने के चार रोज़ पहले से ही हर्षिल में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया था। महोत्सव के दिन हर्षिल में किसानों ने ढोल-दमाऊं जैसे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License