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भारत
राजनीति
फारुक अब्दुल्ला को पेश करने की याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस
अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Sep 2019
farooq abdullah
Image Courtesy: Live Law

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सोमवार को जवाब मांगा।

अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया और राज्यसभा सांसद एवं एमडीएमके नेता वाइको की याचिका पर सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की।

तमिलनाडु के एमडीएमके नेता वाइको की ओर से दायर याचिका में अब्दुल्ला को रिहा करने की मांग की गयी है ताकि वह चेन्नई में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकें। चार दशकों से वाइको अब्दुल्ला के करीबी दोस्त माने जाते हैं ।

वाइको ने दावा किया कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता को ‘‘बिना किसी कानूनी अधिकार के अवैध हिरासत’’ में लेकर, उन्हें संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा गया।

सूत्रों के मुताबिक फारूक अब्दुल्ला अब कड़े लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में हैं। सूत्रों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। इस कानून के तहत प्रशासन किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल के लिए हिरासत में ले सकता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक अब्दुल्ला (81) उस समय से नजरबंद हैं, जब पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब्दुल्ला पीएसए के तहत हिरासत में हैं। अब्दुल्ला पर रविवार को सख्त कानून लगाया गया।

आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता एम. वाई. तारिगामी को नयी दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। इससे पहले माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी सुप्रीम कोर्ट के ही हस्तक्षेप से उनसे मुलाकात कर पाए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने ही जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी को कश्मीर में उनसे मिलने की इजाजत दी थी। महबूबा भी अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद से नजरबंद हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Farooq Abdullah
Jammu and Kashmir
Justice Ranjan Gogoi
Sitaram yechury
mehbooba mufti
Article 370
CPM

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