NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
फेल हो रहा है सरकार का कैशलेस मिशन, डिजिटल पेमेंट महंगा होने से कैश पेमेंट को मिल रही तरजीह
निजी ही नहीं सार्वजनिक संस्थान भी डिजिटल पेमेंट करने पर एक से दो फीसदी ज्यादा कीमत वसूलते हैं।
सबरंग इंडिया
25 Nov 2017
digital payments
Image Courtesy: Businessline

भले ही मोदी सरकार देश में डिजिटल पेमेंट का ढिंढोरा पीट रही हो लेकिन हकीकत यही है कि महंगा होने की वजह से लोग इससे कतरा रहे हैं। कार्ड से पेमेंट करना लोगों को महंगा पड़ रहा है। निजी ही नहीं सार्वजनिक संस्थान भी डिजिटल पेमेंट करने पर एक से दो फीसदी ज्यादा कीमत वसूलते हैं।

नेशनल पेंशन स्कीम से लेकर स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल  मोड से पेमेंट करने पर शुल्क वसूला जा रहा है। एनईएफटी, आरटीजीएस और आईएमपीएस से लेनदेन पर शुल्क वसूला जा रहा है। इससे डिजिटल वॉलेट, पेमेंट बैंक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट महंगा पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही सरकार भले ही नकदी विहीन इकोनॉमी का जाप करे लेकिन वह इस मामले में गंभीर नहीं है। प्राइवेट सेक्टर में डिजिटल भुगतान पर एमडीआर शुल्क वसूला जाना ग्राहकों और उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए कारोबारी कैश पेमेंट को तरजीह देते हैं।

इसी तरह विभिन्न बैंकों ने क्रेडिट कार्ड पर अपना शुल्क तय कर रखे हैं। पेमेंट बैक से कैश निकालने पर 0.65 फीसदी शुल्क वसूला जाता है वहीं पैसा ट्रांसफर पर 0.5 फीसदी शुल्क देना पड़ता है। हालांकि यूपीआई, भीम और आधार से भुगतान का कोई शुल्क नहीं है। लेकिन डिजिटल पेमेंट या ट्रांसफर करने में लोग इन सरकारी डिजिटल मोड का कम ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि ज्यादातर कारोबारी कहते हैं कि कार्ड से पेमेंट करने पर आपको एक से दो फीसदी ज्यादा देना पड़ेगा। ऐसे ही ग्राहक अशोक सिंह ने सबरंगइंडिया को बताया  कि 5800 का मोबाइल खरीदने के बाद डिजिटल पेमेंट करने में उन्हें दो फीसदी ज्यादा 116 रुपये ज्यादा लग रहा था। वो घाटा क्यों सहते? लिहाजा उन्होंने कैश पेमेंट करना उचित समझा। सिंह के अनुभव को देखते हुए यह साफ कहा जा सकता है कि डिजिटल पेमेंट से सिर्फ सरकार और डिजिटल पे कंपनियों को फायदा हो रहा है उपभोक्ताओं या ग्राहकों को नहीं। 

Courtesy: सबरंग इंडिया ,
Original published date:
22 Nov 2017
digital payments
digital economy
modi sarkar

Related Stories

मतदाता पहचान कार्ड, सूची को आधार से जोड़ने सहित चुनाव सुधार संबंधी विधेयक को लोकसभा की मंजूरी

लखीमपुर खीरी कांड: गृह राज्य मंत्री टेनी दिल्ली तलब

मंत्रिमंडल ने तीन कृषि क़ानून को निरस्त करने संबंधी विधेयक को मंज़ूरी दी

अबकी बार, मोदी जी के लिए ताली-थाली बजा मेरे यार!

वैश्विक भुखमरी इंडेक्स में भारत की ‘तरक़्क़ी’: थैंक्यू मोदी जी!

युवाओं ने दिल्ली सरकार पर बोला हल्ला, पूछा- 'कहां है हमारा रोज़गार?'

अखिल भारतीय चिकित्सा शिक्षा कोटा के तहत ओबीसी को मिला आरक्षण, छात्र संगठनों ने कहा संघर्ष की हुई जीत!

झारखण्ड : फादर स्टैन स्वामी की मौत से जनता में रोष, न्याय के लिए छिड़ी मुहिम

बात बोलेगी : सहकारिता मंत्रालय के पीछे RSS के विस्तार की रणनीति !

मोदी मंत्रिमंडल फेरबदलः चुनावी तीर के साथ नाकामी छुपाने के लिए मेकअप


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License