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फिर आंदोलन, फिर आश्वासन : दिल्ली आ रहे किसान यूपी गेट से लौटे  
गन्ने के बकाया भुगतान, सस्ती बिजली और क़र्ज़ माफ़ी जैसी 15 मांगों को लेकर भारतीय किसान संगठन के हजारों सदस्य दिल्ली के किसान घाट जा रहे थे। भारतीय किसान संगठन के अध्यक्ष पूरन सिंह ने कहा कि सरकार ने उनकी 15 मांगों में से 5 को मान लिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Sep 2019
peasant movement

नई दिल्ली: किसानों-मजदूरों की समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से दिल्ली पैदल मार्च कर आए भारतीय किसान संगठन का आंदोलन शनिवार शाम समाप्त हो गया है। भारतीय किसान संगठन के अध्यक्ष पूरन सिंह ने कहा, 'सरकार ने उनकी 15 मांगों में से 5 को मान लिया है। इसके बाद किसानों ने वापस जाने का फैसला किया है। हालांकि बाकी मांगों के पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी। हम दस दिन बाद अपनी बाकी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगें। अगर सरकार हमारी बाकी मांगें मांग लेती है तो ठीक, नहीं तो हम सहारनपुर में फिर से प्रदर्शन शुरू करेंगे।'

इससे पहले दिल्ली के किसान घाट जा रहे किसानों को पुलिस ने यूपी गेट पर ही रोक दिया था। जिसके बाद सैकड़ों की तादाद में किसान दिल्ली बार्डर पर धरने पर बैठ गए थे। उनकी मांग थी कि सरकार उनसे बात करे या फिर उन्हें दिल्ली के किसान घाट जाने दिया जाए। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित ‘किसान घाट’ पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसानों के नेता चौधरी चरण सिंह की याद में बनाया गया है।

हालांकि बाद यूपी गेट से ही किसानों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कृषि भवन जाकर कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बातें रखीं। जिसमें से सरकार ने गन्ना के बकाये भुगतान, किसान के साथ साथ परिवार दुर्घटना बीमा, नदियों के प्रदूषण मुक्त करने जैसी पांच मांगों को मान लिया।
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आपको बता दें कि भारतीय किसान संगठन के नेतृत्व में यह 'किसान मजदूर अधिकार यात्रा' 11 सितंबर को सहारनपुर से शुरू हुई थी। इसे 21 सितंबर को दिल्ली स्थित किसान घाट तक जाना था। हालांकि इसे दिल्ली के बार्डर पर ही रोक दिया गया था। लेकिन किसानों के पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर थी।

दिल्ली बॉर्डर पर ही रोक दिए जाने को लेकर किसान मजदूर अधिकार यात्रा में शामिल होने आए मुजफ्फरनगर के किसान हरपाल सिंह सैनी ने कहा, 'शुक्रवार की रात तक हुई दोनों पक्षों में बातचीत के बाद यही निष्कर्ष निकला था कि अगर किसान दिल्ली पुलिस के निर्देशों के हिसाब से चलेंगे तभी उन्हें दिल्ली में प्रवेश मिल पाएगा। किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर सवार होकर आ रहे हैं। जो कि दिल्ली यातायात नियम के तहत गलत है। अधिकारियों ने कहा कि अगर किसान अपनी गाड़ियां बॉर्डर पर छोड़कर पैदल मार्च कर किसान घाट तक जाते हैं तो उन्हें जाने दिया जाएगा। ट्रैक्टर-ट्रॉली से किसानों को घाट तक जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन जब हम पैदल आए तब भी हमें दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया गया।'

वहीं, भारतीय किसान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष राधे ठाकुर ने कहा, 'मौजूदा समय में किसानों की हालत दयनीय है और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखे सो रही है। समय से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। योगी सरकार बिजली की दर बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ रही है और कर्ज के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इसी के चलते देश के किसान को दिल्ली पैदल आने के लिए मजबूर होना पड़ा है।'

रैली में शामिल होने आए ज्यादातर किसान गन्ने का बकाया भुगतान न मिलने और बिजली के दाम बढ़ने से परेशान नजर आए।

धरने में शामिल होने सहारनपुर से आए किसान तरसपाल सिंह सेंगर ने कहा, 'किसान आर्थिक संकट से घिरे हुए हैं। गन्ने का भुगतान एक साल से बकाया है। महंगाई बढ़ने के बाद भी गन्ने का दाम भी नहीं बढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार डीजल व बिजली बिलों में इजाफा कर उनकी कमर तोड़ने का काम कर रही हैं। ऐसे में हम किसान अपने बच्चों का पेट भरें या बढ़े बिजली बिलों को अदा करें। आर्थिक हालत इस कदर खराब हो गई है कि बच्चों की फीस तक नहीं दी जा रही है। दो वक्त की रोटी के लिए भी लाले पड़ रहे हैं।'

उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसानों की उपेक्षा कर रही बीजेपी सरकार में विपक्ष भी निष्क्रिय पड़ा है। कोई भी विपक्षी दल भी हमारी आवाज नहीं उठा रहा है।


किसान संगठन की ये थीं प्रमुख मांगें-

1. भारत के सभी किसानों के कर्जे पूरी तरह माफ हों।

2. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिले।

3. किसान व मजदूरों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मुफ्त।

4. किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन मिले।

5. फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय किए जाएं।

6. खेती कर रहे किसानों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए।

7. किसान के साथ-साथ परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले।

8. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट और एम्स की स्थापना हो।

9. आवारा गोवंश पर प्रति गोवंश गोपालक को 300 रुपये प्रतिदिन मिलें।

10. किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए।

11. समस्त दूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त कराया जाए।

12. भारत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो।

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