NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
फसल की कीमतों में आई भारी गिरावट से कृषि संकट हुआ गहरा
पिछले तीन वर्षों में कृषि उत्पादों के दाम काफी गिर गए हैं जिसकी वजह से किसान गहरे संकट से घिर गया है लेकिन सरकार के पास इसका कोई समाधान नहीं है ।

सुबोध वर्मा
12 Jun 2018
Translated by महेश कुमार
agrarian crises

यह शायद हमारे समय का ही प्रतीक है, और इस सरकार का आम लोगों से अलगाव इतना है, कि कृषि उत्पादन की कीमतों में भारी गिरावट के बारे में वह पूरी तरह से अनजान है, और यह तब है जब प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी किसानों की आय को दोगुना करने के प्रति अपनी वचनबद्धता पर जोर दे रहे हों।

आइये देखे रबी (सर्दी) की फसलों के साथ क्या हुआ। 2016 से गेहूं की कीमतों में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। थोक बाजारों (मंडियों या एपीएमसी) में किसानों को बंगाल ग्राम और मसूर दाल की कीमतों के लिए क्रमशः 37 प्रतिशत और 24 प्रतिशत नीचे की कीमत आंकी गयी। संफ्लोवेर की कीमत 8 प्रतिशत ऊपर है जबकि सरसों 8 प्रतिशत नीचे है। जौ (जौ) की कीमतें 5 प्रतिशत नीचे हैं। सालाना मूल्य वृद्धि औसत वार्षिक मुद्रास्फीति दर, इन वर्षों में 4-5 प्रतिशत रही है और स्पष्ट रूप से, किसानों द्वारा प्राप्त कीमतों में छोटी वृद्धि को द्रास्फीति ने धो कर रख दिया है।

agrarian crises

वास्तव में, किसानों द्वारा उपयोग किए जाने वाली मशीनों या यंत्रों से लागत भी बड़ी है - जैसे कि पंप और मशीनों के लिए अपने जेनरेटर चलाने के लिए डीजल आदि - औसत मुद्रास्फीति से कहीं अधिक बढ़ गयी है। उदाहरण के लिए, मोदी सरकार के चार वर्षों में डीजल की कीमतों में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जिससे किसान की लागत बढ़ रही है।

पिछली खरीफ (मानसून) की फसल में भी इसी तरह की कहानी देखी गई थी। हालांकि 2017 में धान की कीमतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई और ज्वार में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, बाजरा में 5 प्रतिशत की गिरावट आई, अरहर 36 प्रतिशत मूंग में 19 प्रतिशत, उड़द में 44 प्रतिशत, मूंगफली  में 5 प्रतिशत, सोयाबीन में 8 प्रतिशत और कपास में 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी।

agrarian crises

ये किसानों द्वारा वास्तव में प्राप्त कीमतें हैं जो सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं हैं। जिन्हें अक्सर छोड़ दिया जाता है (गेहूं और धान में छोड़कर) क्योंकि: ए) किसान त्वरित रिटर्न चाहते हैं इसलिए वे सरकार की बकवास करने की प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं जिसमें सरकारी भी एजेंट हैं, और बी) सरकार का अधिग्रहण विचित्र है और अक्सर दालों के लिए नहीं किया जाता है।

किसानों की त्रासदी यह है कि सरकार के पास इस समस्या को हल करने के लिए कोई दृष्टि या नीति नहीं है। जुमले से भरे भाषणों के जरिए वादे करना मुफ्तखोरी का काम है और यही वह वजह है कि प्रधान मंत्री से लेकर नीचे तक सभी यही कर रहे हैं। हर वक्त, कीमतों में गिरावट आती है, जो करोड़ों किसानों को बर्बाद कर देते है।

आश्चर्य की बात नहीं है, ऐसा नहीं है कि उपभोक्ताओं को इन गिरने वाले कृषि उपज की कीमतों से फायदा हो रहा है। मध्यस्थों की एक लंबी और घुमावदार श्रृंखला वस्तुओं की कीमतों को चिह्नित करती रही है क्योंकि उनकी पहुँच खेतों से भोजन कक्ष तक जाती हैं। इसलिए, मोदी के शासन में खुदरा कीमतें वास्तव में 21 प्रतिशत की औसत से बढ़ी हैं।

कुल मिलाकर, सरकार की कृषि नीति ने पिछले चार वर्षों में 3 प्रतिशत से कम की औसत वृद्धि देखी है, किसानों के बढ़ते कर्ज, खेती को बड़े पैमाने पर त्याग और गैर-कृषि छोटे कामों की तरफ बढना, स्थिर कृषि मजदूरी। क्या यही'अछे दिन' का मतलब यही है?

agrarian crises
farmers distress
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • farmers
    चमन लाल
    पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए
    10 Jan 2022
    तथ्य यह है कि मौजूदा चुनावी तंत्र, कृषि क़ानून आंदोलन में तमाम दुख-दर्दों के बाद किसानों को जो ताक़त हासिल हुई है, उसे सोख लेगा। संयुक्त समाज मोर्चा को अगर चुनावी राजनीति में जाना ही है, तो उसे विशेष…
  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License