NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
ट्रंप के भाषण को रोकने की कोशिश में जुटे सैकड़ों प्रदर्शनकारी
लोकप्रिय स्थानीय बैंड टीओबी के मुखिया ने चिल्लाकर कहा, ‘‘हमें उम्मीद है ट्रंप कि आप हमें सुन रहे होंगे। बैंड ने व्हाइट हाउस की तरफ बढ़ते हुए गो-गो संगीत ज़ोर से बजाया।
एपी
28 Aug 2020
ट्रंप

वाशिंगटन: रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के बतौर अपने नामांकन स्वीकार करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए जा रहे भाषण को बाधित करने के मकसद से सैकड़ों प्रदर्शनकारी बृहस्पतिवार रात को व्हाइट हाउस के इर्द-गिर्द जुटे।

इसे प्रदर्शन को “शोर प्रदर्शन और डांस पार्टी” करार दिया गया था।

लोकप्रिय स्थानीय बैंड टीओबी के मुखिया ने चिल्लाकर कहा, ‘‘हमें उम्मीद है ट्रंप कि आप हमें सुन रहे होंगे। बैंड ने व्हाइट हाउस की तरफ बढ़ते हुए गो-गो संगीत (स्थानीय संगीत जिसमें लाइव दर्शकों से प्रतिक्रिया की अपील की जाती है) जोर से बजाया।

ट्रंप रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन (आरएनसी) के अंतिम दिन व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अपना स्वीकृति भाषण दे रहे थे। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने पोस्टर लहराया जिसपर लिखा था, “पेनसिल्वानिया एवेन्यू पर भयावह अनुभव।’’ यह वह मार्ग है जहां व्हाइट हाउस स्थित है।

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के प्रकोप मद्देनजर प्रदर्शनकारियों ने मास्क तो पहने थे, लेकिन शारीरिक दूरी का कोई ख्याल नहीं रखा गया था।

प्रदर्शन के आयोजक जस्टिन जॉनसन ने कहा, “ट्रंप को रोकना चाहते हैं तो आवाज उठाएं।”

कार्यक्रम के दौरान पुलिस बड़ी संख्या में मौजूद थी लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। जॉनसन ने एक मौके पर पुलिस को बैंड एवं प्रदर्शनकारियों को अवरोधक के पार जाने देने के लिए धन्यवाद भी दिया। भीड़ की तरफ से हौसलाअफजाई मिलने के बाद उन्होंने कहा, “बस इतना ही। उन्हें इतना ही चाहिए था।”

Donald Trump
US
trump speech stopped by protestors

Related Stories

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

बाइडेन ने फैलाए यूक्रेन की सीमा की ओर अपने पंख

यमन के लिए यूएन का सहायता सम्मेलन अकाल और मौतों की चेतावनियों के बीच अपर्याप्त साबित हुआ

नेपाल ने अमेरिका के MCC अनुदान समझौते को विरोध प्रदर्शनों के बीच दी मान्यता, अब आगे क्या?

हम यूक्रेन की निष्पक्षता पर बातचीत करने के लिए प्रतिनिधि मंडल भेजने को तैयार- रूस

मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License