NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
लेबनान में दोबारा शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में एक की मौत, कई अन्य घायल
लॉकडाउन के मानदंडों को धता बताते हुए विरोध प्रदर्शनों का ताज़ा मामला पिछले सप्ताह सरकार द्वारा लोगों की आर्थिक चिंताओं से निपटने में विफलता को लेकर शुरू हुआ।
पीपल्स डिस्पैच
29 Apr 2020
लेबनान

लेबनान के त्रिपोली में मंगलवार 28 अप्रैल को एक व्यक्ति की मौत हो गई। जब सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं तो कई अन्य लोग घायल हो गए जिसमें यह व्यक्ति भी शामिल था।

COVID-19 के ख़तरे और इसको लेकर कर्फ्यू व लॉकडाउन के बावजूद लेबनान के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों में विरोध प्रदर्शन किए गए।

देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों और मुख्य राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया, टायर जलाए और बैंकों के ख़िलाफ़ धावा बोला। बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाओं और बच्चों को त्रिपोली की सड़कों पर मार्च करते हुए देखा गया, जो 'रिवोल्यूशन' का नारा लगा रहे थे। जब सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों का सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष हो गया और इसकी प्रतिक्रिया में पत्थर और मोलोटोव कॉकटेल फेंके। पथराव करके कई बैंक की इमारतें को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि देश के लगभग हर हिस्से में पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें त्रिपोली, बेरूत, दक्षिणी सिडोन, ज़ाल्का (बेरूत के उत्तर), टायरे, ज़ौक मेसबेह, नामेह, दिब्येह, जेबिल और डैमर राजमार्ग, टेयूनेह, डोरा, जल एल-दिब और अन्य स्थान शामिल हैं।

लेबनान के रेड क्रॉस ने कहा कि त्रिपोली में हुए विरोध प्रदर्शनों में छह लोगों के घायल हो गए, आगे कहा कि उसने तीन लोगों को नज़दीक के अस्पताल पहुंचाया जबकि अन्य लोगों का विरोध स्थल पर इलाज किया गया। कई प्रदर्शनकारियों को भी सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया। लेबनान में बैंकिंग एसोसिएशन ने सुरक्षा कारणों से त्रिपोली में सभी बैंकों को मंगलवार से बंद कर दिया।

1990 में लेबनान के गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद से लेबनान अपने सबसे ख़राब आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। बड़े पैमाने पर मुद्रास्फीति और उच्च करों के चलते रोज़मर्रा की वस्तुओं और आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू लिए हैं। लेबनानी पाउंड ने पिछले एक साल में अपने मूल्य का लगभग 40% खो दिया है। यह वर्तमान में आधिकारिक तौर पर डॉलर के मुकाबले 1,500 के आसपास है, लेकिन अभी भी अमेरिकी डॉलर की कम उपलब्धता के कारण ब्लैक मार्केट में 4,000 के क़रीब विनिमय दर पर बेचा जा रहा है।

बैंकों ने एक महीने में वापस ली जा सकने वाली डॉलर की राशि को प्रतिबंधित करने वाले नियमों को लागू करके इस परेशानी को और बढ़ा दिया है। नतीजतन, ग़रीबी में 45% का इज़ाफा हो गया है, जबकि देश काफी ज़्यादा बेरोज़गारी पैदा हो गई है। लेबनान विश्व में जीडीपी अनुपात की तुलना में सबसे अधिक ऋण वाला देश है।

सत्तारूढ़ राजनीतिक वर्ग और व्यापारिक कुलीनों के ख़िलाफ़ विरोध अक्टूबर 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन हाल ही में कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण रुका हुआ था। हालांकि, लॉकडाउन के बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है, और आपराधिक सरकार की उपेक्षा, खाने पीने के वस्तुओं की कमी, वित्तीय सहायता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन फिर से शुरु हो गया है। कई लोगों को इस वायरस से पहले भूख से मरने का डर सता रहा है।

 

Lebanon Protest
COVID 19
corona virus outbreak
protests in Lebanon

Related Stories

बीड़ी कारोबार शरीर को बर्बाद कर देता है, मगर सवाल यह है बीड़ी मजदूर जाएं तो जाएं कहां?

लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल

कोविड-19 : दक्षिण अफ़्रीका ने बनाया अपना कोरोना वायरस टीका

स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए

वैक्सीन नीति पर बीजेपी के दावों का तथ्य, बिहार में बाढ़ से हज़ारों बेघर और अन्य ख़बरें

भारत एक मौज : कोरोना देवी मंदिर, रामदेव का वैक्सीन पर यू-टर्न, राम मंदिर ज़मीन घोटाला

निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन, निजी अस्पतालों को टीका आवंटन को लेकर सवाल और अन्य ख़बरें

कोरोना की वैक्सीन BJP की निजी जागीर नहीं

वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'

कोविड-19 से सबक़: आपदाओं से बचने के लिए भारत को कम से कम जोखिम वाली नीति अपनानी चाहिए


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 
    07 Apr 2022
    द रिपोर्टर्स कलेक्टिव के पत्रकार सोमेश झा ने सूचना के अधिकार के तहत हासिल दस्तावेज़ों की छानबीन कर यह पता लगाया है कि कैसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्वायत्तता को खत्म किया गया। कैसे रिज़र्व बैंक ऑफ़…
  • विजय विनीत
    सारनाथ के धमेक स्तूप की पूजा-प्रार्थना रोके जाने से पुरातत्व विभाग और बौद्ध धर्मावलंबियों में बढ़ा विवाद
    07 Apr 2022
    "अधीक्षण पुरातत्वविद अबिनाश मोहंती ने धमेक स्तूप की पूजा-ध्यान को धंधा बना लिया है। सख़्ती सिर्फ़ उन लोगों के साथ की जाती है जो सुविधा शुल्क नहीं देते। इनके दुर्व्यवहार से तंग आकर ताइवान, चीन, जापान,…
  • मनु मौदगिल
    भारतीय कैंपस के होस्टलों में ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अब भी जगह नहीं
    07 Apr 2022
    जेंडर स्पेसिफिक छात्रावास की ग़ैरमौजूदगी का मतलब ट्रांसजेंडर छात्रों को आवास सुविधाओं से वंचित कर दिया जाना होता है, और इस वजह से उनमें से कई छात्र कॉलेज छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
  • सोमा मारला
    ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोतरी से ग़रीबों पर बोझ न डालें, अमीरों पर लगाएं टैक्स
    07 Apr 2022
    केंद्र सरकार ग़रीबों पर टैक्स लगाकर अमीरों से वसूले जाने वाले टैक्स में कटौती कर रही है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीएपी और एनपीके खाद महंगी हुई, माकपा ने बताया मोदी सरकार का एक और किसान विरोधी फ़ैसला
    07 Apr 2022
    "कभी कभी तो लगता है जैसे यह सरकार किसानों से किसान आंदोलन का बदला ले रही हो।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License