NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पंजाब में आम आदमी पार्टी का प्रचंड बहुमत तय, केवल मुहर लगना बाक़ी
पंजाब के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी 117 में से 90 सीटों पर आगे चल रही है। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि किसान आंदोलन की वजह से पंजाब में भाजपा और उसके सहयोगी दलों का जीतना असंभव था।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
10 Mar 2022
kej

पंजाब की अवाम ने आम आदमी पार्टी को अपना अगुआ चुन लिया है। केवल आधिकारिक मुहर लगनी बाकी है। पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीटें हैं। बहुमत हासिल करने के लिए 59 का आंकड़ा पार करना होता है। खबर लिखने तक आम आदमी पार्टी 90 सीटों पर आगे चल रही हैं। कांग्रेस 15 सीटों पर आगे चल रही हैं। शिरोमणि अकाली दल 8 सीटों पर आगे चल रही है। भाजपा का गठबंधन 4 सीटों पर आगे चल रहा है। कुल मिलाजुकर कहा जाए तो आम आदमी पार्टी ने पंजाब में अपना झंडा गाड़ दिया है। पार्टी बहुमत के आंकड़े से पार कर चुकी है। दूसरे नंबर के लिए कांग्रेस और अकाली दल के बीच टक्कर चल रही है।

2017 के चुनाव में कुल 117 सीटों में से कांग्रेस ने कब्ज़ाईं थीं 77, जबकि आम आदमी पार्टी के हिस्से आईं थीं 20, शिरोमणि अकाली दल 15 सीटों पर विजय हुई, जबकि पंजाब में उसकी जूनियर पार्टनर भाजपा सिर्फ़ तीन सीटें ही जीत पाई। लोक इंसाफ़ पार्टी यानी एलआईपी के खाते में आईं दो सीटें। एलआईपी, आम आदमी पार्टी से मिलकर चुनाव लड़ी थी।

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हिस्से आया था 38.5 फीसद वोट शेयर, जबकि आप ने हासिल किया 23.72 फीसद और उसकी सहयोगी लोक इंसाफ़ पार्टी ने पाया 1.23 फीसद वोट।

जबकि शिरोमणि अकाली दल को मिला 25.24 फीसद और उसकी सहयोगी भाजपा को 5.39 फीसद वोट। इन चुनाव में इन दोनों पार्टियों की राह अलग है।

चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि किसान आंदोलन की वजह से पंजाब में भाजपा और उसके सहयोगी दलों का जीतना असंभव था। पंजाब में जिस तरह की शासन प्रणाली चलाई गईं उससे पंजाब की पूरी जनता सरकार को लेकर निराश में जा चुकी थी।

वहां पर जाकर नई पार्टी के तौर पर आम आदमी पार्टी ने माहौल बनाया और लोगों का भरोसा जीत लिया। आम आदमी पार्टी को लेकर वहां शुरू से माहौल बन रहा था। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली मॉडल का प्रचार डोर टू डोर कैपेन कर किया। उनका यह सिक्का बहुत अच्छे तरीके से चलने में कामयाब रहा। सबसे बड़ी बात उन्होंने खुद को पंजाब की परंपरागत पार्टियों से अलग करने में कामयाब हासिल की और लोगों को बीच पंजाब को लेकर अपना सपना बेचने में कामयाब रहे।

हालांकि इसी पार्टी ने साल 2017 में 20 सीटें जीती थीं। इसमें से केवल 10 रह गए और 10 इधर उधर भटक गए। यानी पार्टी को एकजुट रखने में आम आदमी पार्टी कामयाब नही हो पाई थी। लेकिन इस बार इतना बड़ा बहुमत है जिसकी वजह से उम्मीद बन रही है कि आम आदमी करती धूमधाम से सरकार चलाने में सफल रह पायेगी।

कांग्रेस को लेकर दिल्ली की मीडिया में हो हल्ला था लेकिन क्षेत्रीय मीडिया में कांग्रेस के अंदरूनी कलह की चर्चा थी। साथ में कांग्रेस के कामकाज का हाल इतना बेकार था कि चन्नी दलित चेहरा और काबिल नेता दिखते हुए वोट बटोरने में नाकामयाब  रहे। लोगों ने उनपर भरोसा नहीं किया।

punjab election2022
Arvind Kejriwal
AAP
Congress
NDA

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

ख़बरों के आगे-पीछे: MCD के बाद क्या ख़त्म हो सकती है दिल्ली विधानसभा?


बाकी खबरें

  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    09 Mar 2022
    जो चैनल भाजपा गठबंधन को बहुमत से 20-25 सीट अधिक दे रहे हैं, उनके निष्कर्ष को भी स्वयं उनके द्वारा दिये गए 3 से 5 % error margin के साथ एडजस्ट करके देखा जाए तो मामला बेहद नज़दीकी हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License