NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
आंदोलन
पर्यावरण
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
पुरी एयरपोर्ट : भूमि अधिकारों के लिए दलित एवं भूमिहीन समुदायों का संघर्ष जारी
एक अनुमान के मुताबिक हवाई अड्डे के लिए पांच लाख पेड़ों को काटा जाना है, जबकि स्थानीय लोग पिछले दो दशकों से अपने भूमि अधिकारों को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सुमेधा पॉल
10 Jul 2021
puri protest

जैसा कि उड़ीसा सरकार ने पुरी जिले के समुद्र तट के साथ लगे सिपासरूबलि क्षेत्र में एक नए हवाई अड्डे के निर्माण की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की, विभिन्न समुदायों की ओर से इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं क्योंकि वे इस प्रयास को उनके द्वारा पिछले दो दशकों से चल रहे भूमि अधिकार के संघर्ष को हथियाने की एक और कोशिश के रूप में देखते हैं।

जहां एक तरफ सरकार ने दावा किया है कि 1,500 एकड़ में फैले इस हवाई अड्डे को 2022-23 तक चालू कर दिया जायेगा, वहीं दलित एवं भूमिहीन समुदायों के लिए यह उनके प्राकृतिक आवास एवं भूमि अधिकारों के लिए एक नए सिरे से खतरे की घंटी के समान है।

3 जुलाई को, सैकड़ों की संख्या में लोगों ने पुरी के सिपासरुबली मौजा में उपाकुलिया जामी ओ जंगल सुरक्षा समिति (यूजेजेएसएस) के झंडे तले एक हवाईअड्डे के निर्माण के लिए इस तटीय भूमि को कॉरपोरेट्स को सौंपने के सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ एक विरोध रैली और सभा की। इस आंदोलन का उद्देश्य परियोजना को निरस्त करना है क्योंकि यह स्थानीय लोगों की आजीविका एवं सांस्कृतिक पहचान को संकट में डालने वाली परियोजना है। 

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए याचिकाकर्ताओं में से एक प्रफुल्ल सामंत, जिन्होंने शामुका इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट को स्थगित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ने बताया: “पिछले दो दशकों से इस भूमि पर निवास करने वाले समुदायों ने इस तटीय क्षेत्र के नियम-कानूनों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों को रोक रखा है। सरकार द्वारा अपने तमाम प्रयासों के जरिये इस बात को सुनिश्चित किया जाता रहा है कि यह भूमि समुदायों को न दी जा सके, बल्कि वह इसे कॉरपोरेट्स को सौंपने के लिए बैचेन नजर आती है; पहले एक इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट के जरिये और अब बेहद संवेदनशील तटीय भूमि पर एक हवाईअड्डे के निर्माण के नाम पर, जिसने चक्रवात जैसे खतरों के खिलाफ एक बाधा के रूप में काम किया है।

सिपासरूबलि में भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत 1994 में हो चुकी थी, जब ओडिशा उच्च न्यायालय ने राज्य को 214 एकड़ और एक अन्य 33 एकड़ सीलिंग अधिशेष भूमि को गरीबों को जमीन के स्वामित्व के साथ वितरित किये जाने के निर्देश दिए थे। लैंड कॉन्फ्लिक्ट वॉच का इस बारे में कहना है कि “सिर्फ कुछ परिवारों को ही पट्टे दिए गए, लेकिन जमीन नहीं दी गई।” इसके अलावा, 25 साल पहले शुरू की गई शामुका टूरिज्म प्रोजेक्ट, जिसे करीब 3,000 एकड़ जमीन पर पुरी से करीब दस किलोमीटर दक्षिण में सिपासरूबलि के निकट, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर तैयार किया जाना था। उपर्युक्त प्राधिकारी से आवश्यक मंजूरी हासिल करने के बाद चार और पांच सितारा होटलों एवं एक गोल्फ कोर्स के लिए निविदाएं आमंत्रित किये जाने की योजना बना ली गई थी। इसी प्रकार से पहले चरण के क्रियान्वयन के दौरान 304 एकड़ भूमि में फैले गोल्फ विला के साथ एक गोल्फ कोर्स के लिए निवादाओं की योजना तैयार कर ली गई थी। निरंतर विरोध प्रदर्शनों के बाद जाकर, एनजीटी ने 2015 में इस परियोजना पर रोक लगा दी थी। 

हालांकि, इन समुदायों को इस आंदोलन के दौरान क्रूर कार्यवाइयों एवं दमन का सामना करना पड़ा है। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कार्यकर्ता श्रीकांत मोहंती ने बताया: “हमारे अनुमानों के मुताबिक, हवाई अड्डे के लिए पांच लाख से अधिक की संख्या में पेड़ों को काटा जाना है। इसके अलावा, इससे हमारे पर्यावरण और आजीविका के लिए अपूरणीय क्षति होने जा रही है। समुदाय को इस क्षेत्र के भूमाफिया से भी गंभीर हमलों का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ राज्य द्वारा हमारे आंदोलन को रोकने के प्रयास में कई लोगों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल में डाल दिया गया है। हम इन दोनों ही परियोजनाओं के खिलाफ हैं। हमारे भूमि अधिकार हमें दिए जाएं को सुनिश्चित करने के लिए हमारा आंदोलन इन परियोजनाओं के खिलाफ में खड़ा है।

इससे पूर्व जून में एक विरोध प्रदर्शन के उपरांत, यूजेजेएसएस के सदस्यों में इसके संयोजक बटाकृष्ण स्वेन सहित बिदेशी नायक, कालू भोई, मनोज भोई, कुमार बराल और बिजय भोई को गिरफ्तार कर लिया गया था।

उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। स्वेन का कहना था “हमें इसलिए आरोपी बनाया गया था क्योंकि हम सभी भूमिहीन एवं दलित समुदाय से आते हैं और हमारा एकमात्र अपराध यह है कि हम अपने उन भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं, जिसे सत्ता में आने वाली तमाम सरकारों ने सौंपने से इंकार कर दिया है।”

स्वेन ने कहा “हम मांग करते हैं कि यहां पर हवाई अड्डे का निर्माण न किया जाये। इससे प्राकृतिक पर्यावरण के साथ-साथ जंगल भी नष्ट हो जायेंगे। इससे हमें कौन सा फायदा होने वाला है? हम अपनी जमीन, जंगल और पर्यावरण की खातिर संघर्ष कर रहे हैं; हम सभी लोग इन तीनों को चाहते हैं। हम इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि हमारी जमीनें हमसे छीनी जा रही हैं। पुलिस आज भी हमारे खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर रही है।”

इस वर्ष अप्रैल माह में, सीपासरूबलि क्षेत्र की बीस महिला सदस्यों पर तब हमला किया गया था, जब वे सरकारी भूमि से काजू तोड़ने के लिए जा रही थीं, जिस पर ये गरीब परिवार 20 या उससे भी अधिक वर्षों से आश्रित हैं। महिला सदस्यों ने जिले में कुख्यात भू-माफिया के खिलाफ तत्काल कार्यवाई किये जाने के सिलसिले में पुरी जिलाधिकारी व एसपी को ज्ञापन सौंपा था। हालांकि, इस बारे में कोई कार्यवाई नहीं की गई है

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

https://www.newsclick.in/puri-airport-dalit-landless-communities-continue-struggle-land-rights

Puri
Odisha
Dalits
Land rights
Displacement

Related Stories

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

बागपत: भड़ल गांव में दलितों की चमड़ा इकाइयों पर चला बुलडोज़र, मुआवज़ा और कार्रवाई की मांग

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया

मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में सैलून वाले आज भी नहीं काटते दलितों के बाल!


बाकी खबरें

  • Auroville
    सत्यम श्रीवास्तव
    विकास की बलि चढ़ता एकमात्र यूटोपियन और प्रायोगिक नगर- ऑरोविले
    16 Dec 2021
    ऑरोविले एक ऐसा ही नगर है जो 1968 से धीरे-धीरे बसना शुरू हुआ। इस छोटे से नगर को पूरी दुनिया में एक प्रायोगिक शहर के तौर पर देखा जाता है। इस नगर को यूटोपियन यानी सुंदर कल्पना के तौर पर भी पूरी दुनिया…
  • Milind Naik
    राज कुमार
    यौन शोषण के आरोप में गोवा के मंत्री मिलिंद नाइक का इस्तीफ़ा
    16 Dec 2021
    महिला के यौन शोषण के आरोप के चलते भाजपा नेता और गोवा के शहरी विकास और समाज कल्याण मंत्री मिलिंद नाईक को इस्तीफा देना पड़ा है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि मिलिंद नाइक का इस्तीफा…
  • bank strike
    रूबी सरकार
    निजीकरण को लेकर 10 लाख बैंक कर्मियों की आज से दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल
    16 Dec 2021
    बैंक कर्मियों की इस हड़ताल का समर्थन बीमा कर्मचारियों ने भी किया है। किसान आंदोलन की सफलता के बाद अब श्रमिक संगठनों को भी उम्मीद जगी है।
  • Nirbhaya
    सोनिया यादव
    निर्भया कांड के नौ साल : कितनी बदली देश में महिला सुरक्षा की तस्वीर?
    16 Dec 2021
    हर 18 मिनट में बलात्कार का एक मामला, निर्भया कांड के न्यायिक नतीजे से आने वाले व्यापक सामाजिक बदलावों की उम्मीद पर कई सवाल खड़े करता है।
  • Van Gujjar community
    प्रणव मेनन, तुइशा सरकार
    उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में वन गुर्जर महिलाओं के 'अधिकार' और उनकी नुमाइंदगी की जांच-पड़ताल
    16 Dec 2021
    वन गुर्जर समुदाय के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार के आलोक में समुदाय की महिलाओं के अधिकार
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License