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राजनीति
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पुतिन ने दिए यूक्रेन में सैन्य विकल्पों पर संकेत
रूस की अधिकतम मांगें और उसका न्यूनतावादी रुख एक ही है। जो बाइडेन जैसे राजनेता के लिए कोई रास्ता भी नहीं छोड़ती हैं। 
एम. के. भद्रकुमार
28 Dec 2021
Translated by महेश कुमार
Putin
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 24 दिसंबर, 2021 को मास्को के बाहर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कैबिनेट बैठक में भाग लेते हुए

मास्को में रोसिया 1 राज्य टेलीविजन ने आज यानि शुक्रवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण किया। यह रूसी-अमेरिकी संबंधों में पैदा हो रहे गंभीर संकट की एक अधिक विस्तृत तस्वीर पेश करता है, तो जिस पर रूसी मीडिया में सप्ताहांत में बैठक में हुई चर्चा के अंश पेश करने की क्या कोशिश करता है।

पुतिन ने पहली बार स्पष्ट रूप से चेतावनी दे दी है कि यदि अमेरिका और नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) मास्को द्वारा मांगी गई सुरक्षा गारंटी देने से इनकार करते हैं, तो उनकी भविष्य की कार्रवाई पूरी तरह से उन प्रस्तावों पर आधारित होगी जो हमारे रूस के सैन्य विशेषज्ञ मुझे देंगे।" जाहिर है, अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

जब वाशिंगटन ने वेनेजुएला या सीरिया में हस्तक्षेप किया था तो व्हाइट हाउस ने कहा था "सभी विकल्प मौजूद हैं” और जिसका कोई मतलब नहीं था। पुतिन का तात्पर्य है कि चूंकि रूस की राष्ट्रीय रक्षा के मुख्य मुद्दे यहां शामिल हैं, इसलिए सैन्य विचार सर्वोच्च होंगे।

कहने का तात्पर्य यह है कि रूस नाटो के पूर्व की ओर विस्तार और यूक्रेन और पूर्वी यूरोप में  अमेरिकी तैनाती या रूस की सीमाओं के साथ रूसी विरोधी देशों को खड़ा करने को स्वीकार नहीं कर सकता है। और रूस को उम्मीद है कि "दस्तावेजों पर राजनयिक वार्ता के ज़रिए कानूनी रूप से बाध्यकारी परिणाम निकलेंगे।"

अप्रत्याशित रूप से, पुतिन ने यह भी कहा कि रूस सुरक्षा गारंटी पर वार्ता में सकारात्मक परिणाम हासिल करने की कोशिश करेगा। मास्को जल्द बैठक की मांग कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रेखांकित किया है कि मास्को व्लादिमीर पुतिन और जो बाइडेन के बीच राष्ट्रपति स्तर की बैठक की मांग नहीं कर रहा है।  

संभावना कम है कि अमेरिका कानूनी रूप से बाध्यकारी शर्तों के आधार पर रूस को सुरक्षा की गारंटी देने के लिए सहमत होगा। रास्ते में बाधाएं हैं। एक शुरुआत के लिए, बाइडेन के पास कांग्रेस को रूस के साथ सामान्यीकरण की दिशा में ले जाने पर सुलह करने के लिए  राजनीतिक पूंजी नहीं है। नाटो विस्तार के पेचीदा मुद्दे पर भी, अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों के बीच एक आम सहमति तक पहुंचना कठिन है - यानी, यह मानते हुए कि वाशिंगटन रूस की मांगों के लिए उत्तरदायी है (जो कि यह नहीं है।)

रूसी विदेश मंत्रालय ने कल चेतावनी दी थी कि न केवल यूक्रेन और जॉर्जिया, बल्कि नाटो में स्वीडन और फिनलैंड के संभावित समावेश के भी "गंभीर" सैन्य और राजनीतिक परिणाम होंगे जिन्हे मास्को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगा। सीधे शब्दों में कहें तो रूस को उम्मीद है कि अमेरिका और उसके सहयोगी 1990 में मिखाइल गोर्बाचेव को दिए गए आश्वासन को पूरा करेंगे कि नाटो आगे "एक इंच" भी नहीं बढ़ेगा। (क्रेमलिन द्वारा वित्त पोषित आरटी ने शनिवार को प्रासंगिक अवर्गीकृत दस्तावेजों का प्रसार किया था।)

फिर भी, इस मामले का केंद्र यह है कि अफ़गानिस्तान में पराजय के तुरंत बाद, यूक्रेन से नाटो की वापसी इसकी विश्वसनीयता को अपूरणीय रूप से प्रभावित करेगी। वास्तव में, यदि नाटो विस्तार करना बंद कर देता है तो वह समाप्त हो सकता है। जब तक नाटो किसी "दुश्मन" पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं करेगा तो वह अपना आधार खो देगा और फिर इसके अस्तित्व के लिए कोई कारण नहीं बचेगा। यदि नाटो फिसलना शुरू कर देता है तो ट्रान्साटलांटिक प्रणाली अव्यवस्थित हो जाएगी। और नाटो अमेरिका की वैश्विक रणनीतियों की एंकर भी है। इसे समझना बहुत ही सरल है।

जहां तक यूक्रेन का संबंध है, तो पश्चिम ने काटा ज्यादा और चबाया कम जब सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) ने 2014 में कीव में राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए तख्तापलट किया था और इसे अमेरिका समर्थक सत्ता में बदल दिया था। शासन परिवर्तन के एजेंडे को बिना किसी वास्तविक समझ के धकेल दिया गया था कि वर्तमान यूक्रेन एक देश है, लेकिन एक राष्ट्र नहीं है।

यूक्रेन की रचना जोसेफ स्टालिन ने की थी। पिछले हफ्ते एक शानदार निबंध में, यूक्रेन: ट्रेजेडी ऑफ ए नेशन डिवाइडेड, राजदूत जैक मैटलॉक, मास्को में अमेरिकी दूत, जिन्होंने शीत युद्ध के अंत की बातचीत में रोनाल्ड रीगन और गोर्बाचेव के विश्वासपात्र के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ने आगाह किया है कि रूस की मदद के बिना यूक्रेन का कोई भविष्य नहीं है।

दूसरी ओर, अमेरिका में सैन्य व्यवस्था और बेल्टवे में विदेश और सुरक्षा नीति प्रशासन के बड़े हिस्से कल्पनाओं को आश्रय दे रहे हैं कि सीआईए रूस को यूक्रेन में एक दलदल में फंसा सकती है। पिछले हफ्ते, वाशिंगटन पोस्ट में डेविड इग्नाटियस ने मास्को को धमकी देते हुए एक कॉलम लिखा था कि अगर वह यूक्रेन में सैन्य रूप से हस्तक्षेप करने की हिम्मत करता है तो उसे अमेरिका द्वारा समर्थित एक पूर्ण विकसित गुरिल्ला युद्ध का सामना करना पड़ेगा। मैटलॉक का निबंध दिन में सपने देखने वालों के लिए एक ठंडे स्नान की तरह है। 

यहां मुख्य समस्या यह है कि बाइडेन खुद को व्यक्तिगत रूप से ठीक पाते हैं। यूक्रेन में शासन परिवर्तन परियोजना में बाइडेन की भूमिका थी। क्या राष्ट्रपति ओबामा ने गंदा काम बाइडेन को सौंपा दिया था या उन्होने इसके लिए कहा था, हम यह कभी नहीं जान पाएंगे। यह कहना काफी होगा, कि बिडेन को आज यूक्रेन में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी लेनी होगी, जिसे एक भ्रष्ट और आर्थिक रूप से लालची लोकतंत्र, और नव-नाज़ियों के गढ़ में बदल दिया है, जिसे एक टोकरी और अनैतिकता और भ्रष्टता के एक हौज़ में बदल दिया गया था। 

एक गलत कदम और यूरोप को उस देश से (जिसकी आबादी: 45 मिलियन है) बड़े पैमाने पर  शरणार्थियों को झेलना पड़ेगा, जो सीरिया को एक पिकनिक जैसा बना देगा - और यह ऐसे समय में होगा जब पहले से ही यूगोस्लाविया का भूत बाल्कन का पीछा कर रहा है .

समान रूप से, रूस के खिलाफ ओबामा की नियंत्रण रणनीति के प्रबल समर्थक होने के अपने पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, बाइडेन के लिए निगलने के लिए यह एक कड़वी गोली होगी यदि उन्हे रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा को कम करने या नियंत्रित करने के लिए चुने गए पश्चिमी नेता के रूप में जाना जाता है। और वह भी क्रेमलिन में व्लादिमीर पुतिन के साथ, एक ऐसा नेता जिसको लेकर ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच गहरी नफ़रत थी।

खुद बाइडेन रूसी नेता के प्रति अपनी नापसंदगी को बमुश्किल छुपा पाए हैं। बाइडेन अपनी विदेश नीति वाली उस टीम को अपने राष्ट्रपति पद के तहत लाए हैं, जिन्हे रूस के प्रति फोबिया है। राज्य के मौजूदा अवर गृह सचिव विक्टोरिया नूलैंड व्यक्तिगत रूप से 2014 में कीव में शासन परिवर्तन में शामिल थे और आज यूक्रेन पर नीतियों के प्रभारी हैं।

वाशिंगटन में नायक हमेशा से भ्रमपूर्ण रहे हैं। मूल रूप से, वे मानते थे कि रूस एक घटती हुई ताक़त है - एक टूटा हुआ, उदास, गुस्ताख़ देश जो अपनी महाशक्ति के प्रति खिन्न है। रूस के पतन की भयानक भविष्यवाणियों ने हाल ही में एक गंभीर स्वीकृति के लिए रास्ता खोल दिया है कि रूस एक सतत शक्ति है। रूस के पुनरुत्थान – का मतलब यह एक नरम और शक्ति के साथ-साथ काफी स्मार्ट शक्ति भी है – और इसने पश्चिम को आश्चर्यचकित कर दिया है।

पुतिन के नेतृत्व में रूस के परमाणु और पारंपरिक बलों के उन्नयन ने आश्चर्यजनक रूप से प्रभावशाली परिणाम दिए हैं। पुतिन ने राष्ट्र के गौरव को बहाल किया कि यह "एक पुरानी और स्थायी पहचान का उत्तराधिकारी है - पीटर द ग्रेट के समय में और सोवियत युग के माध्यम से - अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में" रूस रहा है - एंड्रयू लैथम की एक टिप्पणी से उद्धृत करते हुए जोकि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अमेरिकी प्रोफेसर हैं, जिनकी टिपणी का शीर्षक है कि रिपोर्ट ऑफ रसियाज़ डीकलाइन आर ग्रेटली इग्ज़ैजरेटड।

इस समय में ऐसा संकट क्यों? मामले की जड़ यह है कि अमेरिका ने फैसला किया है कि उसे चीन से मुकाबला करने से पहले रूस के पंख काटने होंगे। यद्यपि मॉस्को और बीजिंग के बीच कोई औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं है, रूस चीन को "रणनीतिक गहराई" देता है, केवल स्वतंत्र विदेश नीतियों का पालन करने वाली एक महान शक्ति होने के नाते और एक लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था के संदर्भ में तथाकथित उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक उसके साथ वैकल्पिक दृष्टि साझा करता है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और बहुध्रुवीयता पर आधारित है। रूस-चीन संबंध आज इतिहास में अपने उच्चतम स्तर पर हैं।

रूसी अभिजात वर्ग की व्यावहारिकता उसका लशकर है। अमेरिकियों ने स्पष्ट रूप से सोचा था कि क्रेमलिन को किसी तरह शांत किया जा सकता है। उन्हे पुतिन के बयानों से करारा झटका लगा होगा। मुद्दा यह है कि रूस की अतिवादी मांगें और न्यूनतावादी रुख एक ही हैं। यह बाइडेन जैसे घाघ राजनेता के लिए भी हिलने-डुलने का कोई रास्ता नहीं छोड़ता है।

पुतिन ने कहा, "हमारे पास पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है," नाटो यूक्रेन में मिसाइलों को तैनात कर सकता है तो उसे मास्को तक पहुंचने में सिर्फ चार या पांच मिनट लगेंगे। "उन्होंने हमें एक ऐसी रेखा पर धकेल दिया है जिसे हम पार नहीं कर सकते। वे इसे ऐसे बिंदु पर ले आए हैं जहां हमें उन्हें बस इतना कहना होगा: बस वहीं 'रुक जाओ!'"

अंग्रेज़ी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ा जा सकता है।

Putin Hints at Military Options in Ukraine

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