NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
राइट आंख में मोतियाबिंद
“...आंखों में मोतियाबिंद है। दाहिनी (दक्षिणी) आंख में कुछ अधिक है पर बाईं (वाम) आंख में भी उतरने लगा है। इसीलिए विज़न कुछ धुंधला हो गया है, विशेष रूप से दक्षिण पक्ष का।”
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
14 Jul 2019
Symbolic Picture
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : Economic Times

अभी उन दिनों एक पुराने मित्र ने बुलवा भेजा। मित्र पुराने हैं। कभी साथ साथ पढ़ते थे। साथ साथ ही पढ़ाई खत्म की थी। पढ़ाई समाप्त कर लगभग साथ साथ ही काम काज शुरू किया था। मैं सरकारी नौकरी में चला गया और उन्होंने अपना पैत्रिक व्यवसाय सम्हाल लिया। खेले कूदे साथ साथ पर राहें कुछ जुदा ही थीं। बचपन से ही वे आरएसएस की शाखा में जाया करते थे। जब कॉलेज में पहुंचे, थोड़ा सीनियर हुए तो रैगिंग में जूनियर छात्रों के लिए आरएसएस की शाखा लगाने लगे। उसके बजाय छात्रों की थोड़ी बहुत रैगिंग ही कर लेते, तो अच्छा रहता। पर रैगिंग के नाम पर शाखा में बुला कर उन जूनियर छात्रों के साथ  जो बुरा किया, उनमें से बहुत से छात्र तो दादा नाना बन कर भी अभी तक उससे उबर नहीं पाये हैं।

अब उन्होंने बुलाया था तो जाना ही था। एक दो बार तो कुछ व्यस्तता का बहाना बना दिया। पर वे जुदा राह पर चल कर अब तक काफी बड़े बन चुके थे। हालांकि हम दोनों अलग अलग छोर पर खड़े थे पर उनकी अवहेलना करना संभव नहीं था। कभी संबंध बहुत बेतकल्लुफाना होते थे। लंगोटिया यार थे हम दोनों। नौकरी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी साथ साथ ही की थी। रात को पढ़ते पढ़ते थक जाते थे तो साथ ही सो भी जाते थे, उसके ही घर। उसका घर बड़ा था और हम वहीं पढ़ा करते थे। 

tirchi najar after change new_22.png

इस बार मिले तो बहुत दिन बाद मिले। संबंधों की बेतकल्लुफी अब नहीं थी। कुछ खुद की, परिवार की बातों के बाद ही वे बोले "बन्धु! तुम तो अब हमारी आलोचना पर भी उतर आये।" मुझे आश्चर्य हुआ। उनकी पार्टी की, उनके प्रधानमंत्री की, पार्टी अध्यक्ष की आलोचना मैंने बार बार की है पर उनकी तो छोड़ो, उनके विभाग की आलोचना करने से मैं दूर ही रहा हूँ। पर मैं समझ गया, उनकी निगाह में हाईकमान की आलोचना उनकी आलोचना करने से कम नहीं है। वे बोले "लगता है तुम्हें दृष्टि दोष हो गया है। हम जो कुछ करते हैं, तुम्हें उसमें कुछ अच्छा लगता ही नहीं है। बंधु, अपनी आंखें चेक करवाओ"। "पर मित्र, मैं आंखों से नहीं, दिमाग से लिखता हूँ। जो मस्तिष्क सोचता समझता है, वह लिखता हूँ। और जहां तक रही देखने की बात, मनुष्य तो राइट या लेफ्ट ही देख सकता है। बीच का व्यू तो सिर्फ भगवान शिव के पास है। सिर्फ़ वही तीसरी आंख (बीच में) रखते हैं।" मैंने मज़ाक में कहा

"पर मस्तिष्क भी तो वही देखता है बंधु, जो आंखें दिखाती हैं। लगता है, तुम्हारी आंखों पर साम्यवाद, समाजवाद, सेक्लयूरिज्म (थैंक गॉड, उन्होंने अपने अन्य साथियों की तरह से सिक्लयूरिज्म नहीं कहा) आदि का जाला छाया हुआ है। अपनी आखों की जांच करवाओ, जाला हटवाओ, और दृष्टि दोष ठीक कराओ। जब दृष्टि दोष ठीक करा हमारा चश्मा पहनोगे, हमारी निगाह से देखोगे तो सब ठीक दिखाई देगा।" कहते हुए उन्होंने अपनी जान पहचान के एक नेत्र विशेषज्ञ का कार्ड बढ़ा दिया।

खैर उनकी सलाह मान मैं उन नेत्र विशेषज्ञ के पास पहुंचा। उन्होंने आंखों का परीक्षण निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि आंखों में मोतियाबिंद है। दाहिनी (दक्षिणी) आंख में कुछ अधिक है पर बाईं (वाम) आंख में भी उतरने लगा है। इसीलिए विज़न कुछ धुंधला हो गया है, विशेष रूप से दक्षिण पक्ष का। वाम पक्ष में भी धुंधलापन है पर अभी उतना नहीं है। पहले राइट आई का ऑपरेशन करेंगे। पहले राइट विज़न को ही राइट करेंगे। लेफ्ट का विज़न बाद में देखा जायेगा। हम ऑपरेशन की तारीख निश्चित कर घर लौट आए।

अगले दिन ही उन मित्र का फोन आ गया। बोले "पहले ही कहा था न, नज़र ही कमजोर है। इसीलिए सब कुछ साफ साफ नहीं देख पा रहे थे। अब ऑपरेशन करवाओ, और हमारा चश्मा लगाओ और फिर देखो, सब कुछ राइट ही राइट दिखाई देगा। अभी तक कुछ राज्यों की पचास फीसदी के करीब जनता अपना ऑपरेशन करवा हमारे ही चश्मे से देख रही है।"

अब मैं प्रतीक्षा में हूं कि कब मेरा ऑपरेशन हो, मैं उनका चश्मा पहनूं और उनकी निगाह से देख, सोच और लिख पाऊं। पर इस बीच ही अपनी कम दृष्टि वाली आंखों से ही देख पा रहा हूँ कि तबरेज़ की मॉब लिंचिंग हो गई है, आकाश विजयवर्गीय ने सरकारी ड्यूटी निभाने गये अफसर को क्रिकेट बैट से पीट दिया है। वहां इंग्लैंड में क्रिकेट विश्वकप चल रहा है। बल्लेबाज बल्ले से गेंद को पीट रहे हैं और यहां हमारे राजनेता बल्ले से अपनी ड्यूटी निभा रहे अफसरों को पीट रहे हैं। उधर तेलंगाना में सरकारी जमीन पर पेड़ लगाने गई वन विभाग की अधिकारी की भी लोगों ने पीट पीट कर हड्डी पसली तोड़ दी है। महाराष्ट्र में एक विधायक ने अधिकारी पर कीचड़ उड़ेल दी। बरेली के भाजपा एमएलए के खिलाफ उनकी बेटी ने ही जान के खतरे की शिकायत दर्ज कराई है। क्योंकि उसने एक दलित से विवाह कर लिया है। हरिद्वार जिले के एक विधायक तमंचा लहराते हुए देखे गए। कोई भी पीछे नहीं रहना चाह रहा है।

एक बात और : ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर साहब ने बताया है कि एक आंख का ऑपरेशन करवाने के बाद जब तक दूसरी आंख का ऑपरेशन नहीं होगा, दो दो  दिखाई देंगे (Diplopia)। हे राम! एक तो बरदाश्त नहीं हो रहा है, दो दो को झेलना पड़ेगा।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Political satire
Satire
cataracts
dron sharma
BJP-RSS
Hindutva
TABREZ ANSARI

Related Stories

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License