NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजधानी में आज भी सैकड़ों परिवार खुले में शौच जाने को मज़बूर हैं
दिल्ली की कई बस्तियों में जीने के लिए मूलभूत सुविधाओं के आभाव पर दायर एक जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए न्यायालय केंद्र और दिल्ली सरकार कोनोटिस भेजा है और जबाब माँगा हैI
मुकुंद झा
03 Aug 2018
स्वच्छ भारत अभियान
Image Courtesy:Live Cities

दिल्ली में झुग्गी और कलस्टर बस्ती में रहने वाले लोगों को खुले में शौच करने और उन्हें दयनीय स्थति में रहने के लिए मज़बूर किया जा रहा हैI इसी विषय पर लॉ विभाग के तीन छात्रों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जिसमें न्यायालय से अपील की सरकार को निर्देशित करे कि वो इन लोगों को शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएँ औरमहिलाओं एंव बच्चों के लिए आंगनवाड़ी की सुविधा मिले जिससे ये सुनिश्चित हो सके सभी को मूलभूत सुविधाएँ मिलेंI

इस याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने सुनवाई करते हुए स्वच्छ भारत अभियान के डारेक्टरI दिल्ली सरकार, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, DDA सहित दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस भेजा है और इस ममले में तीन सप्ताह में जबाब दाखिल करने को कहा हैI

याचिकाकर्त्ता ने न्यायालय को बताया कि ये बस्तियाँ दिल्ली के दिल की तरह हैं, ये दिल्ली के मुख्य सड़क रिंग रोड़ (महात्मा गाँधी मार्ग) के पास हैंI इन बस्तियों में मुलभूत सुविधाएँ जैसेशौचालय, स्नानघर, आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ भी नहीं हैंI

इस याचिका में कहा गया है कि जब पूरे देश में सरकार इतने बड़े स्तर पर ‘स्वच्छ भारत’ और ‘क्लीन इण्डिया’ योजना चला रही है, जिसमें हज़ारों करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे हैंI तो फिरकैसे देश की राजधानी दिल्ली में इन बस्तियों में दशकों से रह रहे सैंकड़ों परिवार आज भी खुले में शौच जाने को मज़बूर हैंI

इन छात्रों ने इन सब समस्या को लेकर सभी सम्बंधित विभागों के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान योजना के तहत वास्तविकता मेंज़मीन पर कुछ भी नहीं हो रहा हैं I

हल में ही आई कैग रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था जिसमें बताया गया है कि अक्टूबर 2014 में शुरू स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिल्ली में अब तक एक भीशौचालय का निर्माण नहीं हुआ हैI जबकि इसके तहत 40.31 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थेI इसे क्रियान्वित करने की ज़िम्मेदारी मुख्यतः तीनों नगर निगमों के साथ दिल्ली शहरी आश्रयसुधार बोर्ड की है, परन्तु 31 मार्च 2017 तक ये धनराशी खर्च नहीं हो पाई थीI

इसे भी पढ़े : कैग रिपोर्ट पर दिल्ली सरकार ने सफाई दी और साथ ही उप राज्यपाल पर भी निशान साधा

 

ये दिखाता है कि भाजपा ‘स्वच्छ भारत’ को लेकर कितनी गंभीर है? जहाँ एक ओर केंद्र की भाजपा सरकार स्वच्छ भारत के नाम पर करोड़ों रूपये बहा रही हैI वहीं भाजपा शासित  दिल्ली नगरनिगम स्वच्छता को लेकर कितना उदासीन है कि वो पिछले ढाई वर्षो में स्वच्छ भारत के तहत आवंटित कोष से एक भी शौचालय नहीं बना सकी हैI

याचिका के अनुसार की स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की वेबसाइट पर बताया गया है कि SBM (शहरी) के तहत लगभग शहर के 20% लोग खुले में शौच करते थे, परन्तु वो अब इसके विकल्पके रूप सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करते हैI लेकिन इनकी हालत भी बहुत खरब है कहीं पानी नहीं आता तो कहीं सीवर जाम रहते हैंI

याचिकाकर्ता ने अंत में ये भी कहा कि इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को संविधान ने गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार दिया है, जिसमें यह भी शामिल है कि सभी को ज़ीने केलिए साफसुथरा वातावरण मिलेI

 

 

Swachchh Bharat Abhiyan
Delhi
BJP
AAP Govt
Delhi High court

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'


बाकी खबरें

  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    RSF ने कश्मीर प्रेस क्लब को बंद करने की जम्मू-कश्मीर प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की
    20 Jan 2022
    एक तीखे वक्तव्य में रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने क्षेत्र में प्रशासन को उस पत्रकार समूह की मदद करने का आरोप लगाया है, जिसने प्रेस क्लब पर “क़ब्ज़ा” किया। कई लोगों ने इसे राज्य समर्थित “तख़्ता-पलट”…
  • birth rate
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपीः एनिमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, बाल मृत्यु दर चिंताजनक
    20 Jan 2022
    प्रदेश में 6 माह से 59 माह तक के 66.4 फीसदी बच्चे एनीमिया से ग्रसित पाए गए हैं। एनएफएचएस के इससे पहले वाले सर्वे अर्थात चौथे सर्वे में प्रदेश में एनिमिया से ग्रसित बच्चों का आंकड़ा 63.2 फीसदी था।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3.17 लाख नए मामले, एक्टिव मामले 20 लाख के क़रीब पहुंचे 
    20 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3 लाख से भी ज़्यादा यानी 3,17,532 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.03 फ़ीसदी यानी 19 लाख 24 हज़ार 51 हो गयी है।
  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान में तख़्तापलट विरोधी प्रदर्शन जारी, सात और लोग मारे गये और सौ से ज़्यादा घायल
    20 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से हिंसक दमन के बावजूद तख़्तापलट को मंज़ूर नहीं किये जाने को लेकर सूडान में सामूहिक हड़ताल और सिविल नाफ़रमानी की मुहिम जारी हैं।
  • Aaj Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अपर्णा के भाजपा में जाने और आजाद-अखिलेश अलगाव के मायने
    20 Jan 2022
    मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू अपर्णा बिष्ट यादव के भारतीय जनता पार्टी में जाने का किसको कितना नफ़ा-नुकसान होगा? इसी तरह भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद के अखिलेश यादव की अगुवाई वाले गठबंधन में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License