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राजीव गांधी हत्याकांड: दोषियों की रिहाई का विरोध करने वाली याचिका ख़ारिज
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले से जुड़ी संविधान पीठ के फ़ैसले में सभी पहलुओं पर विचार किया गया था, इसलिए इस मामले में कुछ नहीं बचा है।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 May 2019
राजीव गांधी हत्याकांड: दोषियों की रिहाई का विरोध करने वाली याचिका ख़ारिज
Image Courtesy: India Today

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के 2014 के फ़ैसले का विरोध करने वाली याचिका गुरुवार को ख़ारिज कर दी।

पूर्व प्रधानमंत्री के साथ 1991 में मारे गए लोगों के परिजनों ने याचिका दायर कर तमिलनाडु सरकार के इस फ़ैसले का विरोध किया था।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले से जुड़ी संविधान पीठ के फ़ैसले में सभी पहलुओं पर विचार किया गया था, इसलिए इस मामले में कुछ नहीं बचा है।’’

2014 में तत्कालीन जयललिता सरकार ने मामले के सात दोषियों को रिहा करने का फ़ैसला किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बदुर में 21 मई 1991 को हत्या कर दी गई थी।

आपको बता दें कि इस हत्याकांड से जुड़े 7 अपराधियों के नाम इस प्रकार है- नलिनी, रोबर्ट पायस, एस जयकुमार, सनथान, श्रीहरण (नलिनी के पति), एजी पेरारीवेलन, और रविचंद्रन।

अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी इस मामले को भुलाना चाहते हैं। उन्होंने ये भी सुझाव दिया की उनके पिता के हत्यारों को रिहा कर दिया जाए।

2018 में लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम के चीफ़ प्रभाकरन की मौत पर दुःख जताते हुए कहा था, “जब मैंने जाफ़ना (श्री लंका) में प्रभाकरन को समुद्र तट पर लेटे हुए देखा तो मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि मैं उनकी जगह पर अपने पिता को देख रहा था और उनके बच्चों को अपनी जगह पर”।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साज़िश रचने और उसे अंजाम देने के लिए दोषी ठहराए जाने वाले श्रीलंका के एक उग्रवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) के अध्यक्ष प्रभाकरन थे।
 
यही नही, यहाँ तक कि राहुल गांधी की बहन प्रियंका गाँधी वाडरा, 19 मार्च को वेल्लोर सेंट्रल जेल में राजीव गांधी की हत्या की मुख्य अपराधी नलिनी से मिलने भी गयी थीं। 
उनका कहना था, “हिंसा और नुक़सान जो मैंने अनुभव किया है उसके साथ शांति लाने का ये मेरा तरीक़ा था।"
    
(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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