NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
राजनाथ का मुस्लिम प्रेम या संघ का प्लान 'बी'!
राजनाथ सिंह ने नामांकन के बाद से लखनऊ के सभी मुस्लिम धर्मगुरुओं से सम्पर्क करना शुरू कर दिया था। अब तक वह सभी धर्मगुरुओं से उनके घरों पर जाकर मिल चुके हैं।
असद रिज़वी
02 May 2019
लखनऊ में मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगी महली के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह
लखनऊ में मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगी महली के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कट्टर हिंदुत्व के सहारे दोबारा सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पार्टी के उम्मीदवार राजनाथ सिंह अपनी छवि एक उदारवादी नेता की तरह बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

मोदी सरकार में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नामांकन के बाद से लखनऊ के सभी मुस्लिम धर्मगुरुओं से सम्पर्क करना शुरू कर दिया था। अब तक वह सभी धर्मगुरुओं से उनके घरों पर जाकर मिल चुके हैं।

पार्टी की कट्टर हिंदुत्व की नीति के विपरीत जाकर राजनाथ मुसलमानों से रिश्ते बनाने की कोशिश क्यूँ कर रहे हैं? यह वह भी जानते हैं कि धर्मगुरुओं से मुलाक़ात करने से बाद भी उनको मुसलमानो का वोट मिलने की सम्भावना कम ही है। लेकिन राजनाथ मीडिया को सूचना देकर धर्मगुरुओं के घरों पर जा रहे हैं। इसका अर्थ यह है की वह भी चाहते हैं की मुसलमान नेताओं से उनकी मुलाक़ात की चर्चा मीडिया में भी की जाए।

1cd85153-1bbb-4853-b025-9521615a6f93.jpg

मौलाना कल्बे जव्वाद के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी अभी तक लखनऊ में राजनाथ के प्रचार के लिए नहीं आये हैं। मोदी-शाह सारे देश में घूम-घूम कर पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं। लेकिन दोनों का राजनाथ के संसदीय क्षेत्र में नहीं आना साफ़ संकेत देता है की पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है।

राजनीति पर नज़र रखने वाले इसको दो तरह से देखते है। एक भाजपा की अंदरूनी कलह और दूसरे राजनाथ ख़ुद नहीं चाहते की उनके क्षेत्र में किसी तरह का ध्रुवीकरण करने वाले भाषण दिए जाए। इसका अर्थ यह नहीं है कि राजनाथ संघ के हिंदुत्व के एजेंडे के विरोधी है। बल्कि वह अपने लिए एक अलग पृष्ठभूमि तैयार कर रहे है। हालांकि वे ऐसी कोशिश काफी समय पहले से करते रहे हैं।

27ae9435-12f1-4f88-97ac-eb3c2a166c74.jpg

मुस्लिम युवाओं के साथ तस्वीर खिंचाते गृहमंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ एक उदारवादी नेता की तरह अपनी छवि बनाना चाहते हैं। यह सॉफ़्ट हिंदुत्व चुनाव के नतीजों के बाद में उनके लिए लाभदायक हो सकता है। क्योंकि अगर भाजपा की पूर्ण बहुमत से कम सीटें रहती हैं तो  नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) के सहयोगी दल भी मोदी जैसी कट्टर हिंदुत्व वाली छवि नेता को समर्थन देने में पीछे हट सकते हैं।

ऐसे में 1999 जैसे हालात होंगे जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। भाजपा के साथ क्षेत्रीय दल इसलिए आ गए थे क्यूँकि संघ में सारा जीवन बिताने और उसकी विचारधारा से पूर्ण प्रभावित होते हुए भी अटल ने अपनी छवि को सॉफ़्ट हिंदुत्व तक ही सीमित रखा था। शायद राजनाथ भी ऐसे ही किसी मौक़े की तलाश में हैं।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि 2014 में राजनाथ पार्टी अध्यक्ष थे जब भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई और गृह मंत्री बने। लेकिन राजनाथ जैसे वरिष्ठ नेता को भी दूसरे नेताओ की तरह मोदी-शाह नज़र अन्दाज़ करते रहे।

पत्रकार हुसैन अफ़सर कहते हैं कि राजनाथ का धर्मगुरुओं से मिलने का मक़सद मुसलमानो की परेशानियों पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि वह ख़ुद को संघ का उदारवादी चेहरा बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में मुसलमानो के ख़िलाफ़ जो भी हुआ उसकी राजनाथ ने कभी निंदा नहीं की यानी ख़ामोशी से हिंदुत्व के एजेंडे को समर्थन कर रहे थे।

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि राजनाथ कट्टर छवि दिखाकर अपना राजनीतिक नुक़सान नहीं करेंगे। पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप कपूर का कहना है कि राजनाथ संघ की टीम “बी” में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। अगर संघ को लगा की मोदी का नाम सहयोगियों को स्वीकार नहीं है तो तुरंत राजनाथ का नाम आगे किया जायेगा। इसी लिए राजनाथ कट्टर हिंदुत्व नहीं सॉफ़्ट हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं, वरना वह भी संघ की विचारधारा के हैं।

कई राजनीतिक विश्लेषक संघ के प्लान बी में नितिन गडकरी का नाम भी लेते हैं। वे भी मोदी से अलग अपनी उदार छवि बनाने की कोशिश करते रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राजनाथ ने लखनऊ मे इधर एक सप्ताह के भीतर सभी वरिष्ठ धर्मगुरुओं से मुलाक़ात की है। जिन धर्मगुरुओं से उन्होंने मुलाक़ात की है उनमें मौलाना हमीदुल हसन,  मौलाना कल्बे सादिक़, मौलाना कल्बे जव्वाद, मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगी महली,  मौलाना यासूब अब्बास आदि शामिल हैं। इसके अलावा राजनाथ मदरसों में भी जा रहे हैं।

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
UttarPradesh
Lucknow
rajnath singh
Narendra modi
Amit Shah
BJP-RSS
Muslims
vote politics

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License