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भारत
राजनीति
राजस्थान: भाजपा की रैली को सफल बनाने में लगा पूरा प्रशासन!
राजस्थान में भाजपा अपनी राजनीतिक रैली में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी संसाधनों से लोगों को सभा स्थल तक लाया जाएगा|
मुकुंद झा
02 Jul 2018
मोदी
Image Courtesy:oneindia.com

राजस्थान में भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 जुलाई को जयपुर में होने वाली रैली के लिए 4 लाख से ज़्यादा भीड़ लाने का लक्ष्य रखा है| राज्य की वसंधुरा सरकार की ओर से सभी ज़िला कलेक्टरों को इसके लिए लक्ष्य दिया गया है| पीएम की सभा में आने वाले लोगों की सूचि ज़िला कलेक्टरों को 30 जून तक मुख्य सचिव को देनी थी| एक ज़िले के कलेक्टर को  औसतन  9,300 लोग लाने को कहा गया है।

हैरानी की बात यह है कि भीड़ जुटाने के लिए यह सब हथकंडे उस यशस्वी प्रधानमंत्री की सभा के लिए किया जा रहा है, जिन्हें भाजपा के नेता आजतक के सबसे विश्वविख्यात प्रधानमंत्री बताते हैं| भाजपा के नेताओं का कहना है कि इस सभा का आयोजन उन लोगों के लिए है जिन्हें मोदी सरकार की योजनाओं से लाभ मिला है| इसीलिए ताज्जुब की बात है कि जिन्हें मोदी सरकार की योजनाओं से लाभ हुआ है, वे मोदी जी की रैली में अपने आप आने को तैयार नहीं और उन्हें इस तरह पकड़–पकड़ के सभा में लाना पड़ रहा है|  

ये कोई  पहली बार नहीं जब मोदी सरकार की राजनीतिक रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी तंत्र के दुरूपयोग का आरोप लगा हो| अभी पिछले दिनों ही मोदी की मध्यप्रदेश इंदौर दौरे के दौरान जब स्थनीय विधायकों ने अपने हाथ खड़े कर दिये थे, तब सभा में भीड़ लाने के लिए सरकारी तंत्र पर ही इसकी ज़िम्मेदारी डाल दी गई थी, जिसके बाद पूरा प्रशासन इस में लग गया कि सभा में भीड़ कैसे लायी जाए|

इंदौर के आहिल्या बाई विश्वविद्यालय के उप-कुलपति को 20,000 लोगों को लाने का लक्ष्य  दिया गया था| इसके लिए विश्वविद्यालय ने परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ा कर छात्रों को रैली में जबरन शामिल होने के लिए कहा|  इससे पहले भी मोदी के इंदौर में एक सभा के लिए मौसम विभाग से भारी बारिश की फर्ज़ी घोषणा कर दी गई जिससे लोगों को लाने के लिए अधिक-से-अधिक बसों को अधिकृत किया जा सके|

अभी 25 मई को पीएम धनबाद दौरे को लेकर कांग्रेस का आरोप लगाया था कि भीड़ जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया|  

इस संबंध में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने भी इसकी पुष्टि की कि अधिकारियों से केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सभा में ले जाने को कहा गया है, साथ ही कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को पार्टी सभा स्थल पर ले जाने की भी। सभा में लाने-ले जाने के लिए वाहनों की भी व्यवस्था  सरकार ने की है, साथ ही उनके खाने–पीने की भी व्यवस्था की गई है|

राजस्थान में सीपीएम के नेता और पूर्व विधायक अमराराम ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि, “राज्य की जनता केंद्र की मोदी और राज्य की महारानी राजे सरकार से पूरी तरह खफा है| इनकी जनसभाओं में जाने को  तैयार नहीं है| इनकी विश्वसनीयता जनता के बीच बिलकुल नहीं है| अब लोग भी इनके जुमलों से थक गये हैं इसलिए इन्हें  जनसभाओं में भीड़ के लिए पूरे सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर रहे है| यह पूरी तरह से नींदनीय है कि आप अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए पूरे सरकारी अमले का दुरूपयोग कर लोगों को जबरन जनसभा में लाने की कोशिश करे”|

 

यह घटनाएँ और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि अभी कुछ समय बाद ही राजस्थान, मध्यप्रदेश  और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हैं| अभी इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है, दो राज्यों में तो काफी लम्बे समय से भाजपा की सरकार है| राजस्थान और मध्यप्रदेश में भाजपा को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है| इन दोनों ही राज्य में एक लम्बा किसान आन्दोलन चला है जिसने भाजपा सरकार को पूरी तरह से हिला दिया है| 

राजस्थान में सीपीएम के नेतृत्व में किसानों ने हज़ारों की संख्या में सरकार के खिलाफ आन्दोलन किया था| वहाँ की वसुंधरा सरकार को उनकी माँगो के आगे झुकना पड़ा था, परन्तु बाद में सरकार अपने वायदे से पीछे हट गई| जिसको लेकर वहाँ के लोगों में भारी गुस्सा है|

यह भी पढ़े: जयपुर कूच: सरकारी दमन के आगे नहीं झुकेंगे किसान

इस तरह से मध्यप्रदेश में भी किसानों का लम्बा आन्दोलन चला था जिसमें सरकार झुकी तो सही लेकीन वो भी बाद में अपने वायदे से मुकर गई| जिसके बाद किसानों ने सरकार के वायदा खिलाफी के विरोध में शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रही थी| जिस पर वहाँ की शिवराज सरकार ने गोलियाँ चलवाईं| जिसके बाद से पूरे प्रदेश में भाजपा को लेकर भरी नाराज़गी देखी जा रही है|

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इसके साथ ही राजस्थान सरकार ने एक और अजीबो-गरीब आदेश दिया है कि सभी नौकरशाहों को मोदी चिन्तन पढ़ना है| इस चिन्तन में  प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों पर आधारित एक किताब है जिसे राजस्थान के अधिकारियों के बीच वितरित की गई है। गुजरात सरकार ने भाजपा शासित सभी राज्यों में यह किताबें भेजी हैं। इन पुस्तकों में प्रधानमंत्री के 2003 से 2011 तक के भाषण दिए हुए है।  भाजपा का कहना है कि यह कदम नौकरशाहों के कार्य में कुशलता और तेज़ी लाने में मदद करेगा परन्तु यह कैसे मदद करेगा इस पर कोई जवाब नहीं दिया|

इसे भी पढ़े : डेमोक्रेसी को लोकतंत्र नहीं, प्रजातंत्र कहने वाले हुक्मरानों के खिलाफ किसानों को एकजुट होना होगा

अमराराम का कहना है कि, “किसान को दिए हर धोखे और गोली का जबाब जनता आने वाले विधानसभा चुनावों में खुलकर देगी| यह तो पूरी तरह से तय है कि इस विधानसभा में प्रदेश पूरी तरह से भाजपा मुक्त होगा और महारानी का घमंड टूटेगा”|

 

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