NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान चुनाव: क्या इस बार महिलाएं बीजेपी के खिलाफ वोट करेंगी ?
बीजेपी सरकार ने पिछले पाँच सालों में महिला सशक्तिकरण के बड़े बड़े वादे तो किए लेकिन ज़मीन पर कोई बदलाव नज़र नहीं आता ।
ऋतांश आज़ाद
30 Nov 2018
 women in rajasthan

राजस्थान के समाज में गहरी सामंतवादी जड़ें होने के कारण यह एक पिछड़ा हुआ प्रदेश रहा है । यही वजह है कि महिला सशक्तिकरण में आज भी यह सबसे पिछड़े प्रदेशों में शुमार होता है । बीजेपी सरकार ने पिछले पाँच सालों में महिला सशक्तिकरण के बड़े बड़े वादे तो किए लेकिन ज़मीन पर कोई बदलाव नज़र नहीं आता । 7 दिसम्बर को होने वाले चुनावों में महिलाओं के मत बहुत अहम होंगे और महिला जनसंगठनों से जुड़ीं नेताओं की माने तो  महिलाएं बीजेपी के खिलाफ वोट करेंगी ।

केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की वसुंधरा सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया था, लेकिन राजस्थान की स्थिति देखने पर यह पूरी तरह खोखला नज़र आता है । जैसा की पहले के लेखों में बताया गया है राजस्थान सरकार ने एकीकरण के नाम पर करीब 20000 सरकारी स्कूलों को बंद किया । निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए 300 स्कूलों को निजी हाथों में देने के भी बहुत प्रयास हुए । सरकारी स्कूलों के बंद होने से लड़कियों को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है । गरीब घरों से आने वाली बच्चियों को शिक्षा से वंचित करके शायाद सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का अपना वादा निभा रही है । यह तब है जब 2011 के सेंसस के हिसाब से राजस्थान की महिला अक्षरता दर सिर्फ 52.66 % है जो कि देश में सबसे खराब दर है । 15 से 17 की उम्र के बीच लड़कियों के स्कूल जाने की दर 72.1% है यह भी देश में सबसे खराब है ।ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन एससोसिएशन (ऐडवा )के द्वारा दिये गए आंकड़ों के हिसाब से राजास्थान में बच्चियों में पिछले साल ड्रौपआउट दर 37॰4 % थी । यह बेहद चिंताजनक है ।

जहां तक बेटियों को बचाने की बात है तो लिंग अनुपात में भी राजस्थान सबसे पिछड़े राज्यों में आता है । राजस्थान में 1000 लड़कों पर 888 लड़कियां हैं , यह बेहद एक शर्मनाक स्थिति है । नेशनल फेडेरेशन ऑफ इंडियन वुमेन की राजस्थान सचिव निशा सिद्धू कि माने तो इन हालातों को बदलने के लिए सरकार ने खास कुछ नहीं किया है , बल्कि पिछले पाँच सालों में हालात खराब ही हुए हैं ।

महिलाओं के स्वास्थ की बात करें तो राज्य यहाँ भी पिछड़ा हुआ है । प्रदेश में 21.1 % बच्चियाँ कुपोषित हैं और 51 % महिलाओं में खून की कमी है । यह स्थिति राजस्थान में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की खराब हालत की ओर भी इशारा करती है । निशा सिद्धू का कहना है कि राज्य में काँग्रेस की सरकार में सरकारी दुकानों से कुछ दवाइयाँ सस्ते दरों पर और कुछ दवाएं मुफ्त मिल जाया करती थीं।

कांग्रेस सरकार के अंतर्गत निशुल्क दवाओं और जांच करने की स्कीम चालू की गयी थी। लेकिन जन स्वास्थ्य अभियान केडॉ. नरेंद्र के अनुसार यह अब ठीक ढंग से लागू नहीं की जा रही है। होता यह है कि निशुल्क दवाओं के बजाय डॉक्टर अब दूसरी दवाएं लिख देते हैं और अब इसकी ठीक ढंग से निगरानी नहीं की जा रही है। इस वजह से सबसे ज़्यादा असर भी महिलाओं पर ही पड़ा है , क्योंकि उनके स्वास्थ्य पर वैसे भी किसी का ध्यान नहीं जाता ।

महिला सुरक्षा की यह हालत है कि महिलाओं पर हिंसा के मामले में राजस्थान आंकड़ों के हिसाब से चौथे नंबर पर आता है । 2016 की एक रिपोर्ट के हिसाब से राज्य में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 27442 मामले सामने आए थे । इसी साल रेप के 3291 मामले सामने आए ।

ऐडवा की राजस्थान सचिव सुमित्रा चोपड़ा ने कहा “राजस्थान में महिला सुरक्षा ही हालत बद से बदतर हो गयी है । चार साल पहले महिला अपहरण के प्रतिदिन 14 मामले सामने आते थे वहीं अब यह आंकड़ा 17 हो गया है । इसी तरह 2014 से 2015 के बीच बच्चियों से 5995 यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। पीड़ितों के लिए सरकार ने पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई है और न ही उन्हें तुरंत मुआवज़ा मिलता है ।’’

जहाँ तक महिलाओं में रोज़गार की स्थिति है तो यहाँ भी राज्य की हालत खराब है । हाल में बेरोज़गारी पर आई अज़ीमप्रेम जी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार 100 पुरुषों पर सिर्फ 29 महिलाएं काम करती हैं यह राष्ट्रीय बेरोज़गारी औसत से भी कम है । ऐडवा के द्वारा दिये गए आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश की 2 लाख महिलाएं आंगनवाड़ी केन्द्रों और आशा सहियोगियों के तौर काम करती हैं । देश भर की तरह यहाँ भी उन्हे सिर्फ 1320 रुपये मिलते हैं और वह भी साल में सिर्फ 10 महीने । निशा सिद्धू का कहना है “ यह महिलाएं कई बार अपने हक़ के लिए सड़कों पर उतर चुकी हैं लेकिन उनका हक़ उन्हे देने के बजाए सरकार उन पर लठियाँ बरसाती है।’’

 जैसा की पहले के लेखों में भी बताया गया है कि राजस्थान में नरेगा के तहत अब काम बहुत कम मिलता है । जानकार बताते हैं कि इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं महिलाएं, जो कि नरेगा के तहत मिलने वाले काम से छोटी मोती कमाई कर लिया करतीं थीं ।

जानकारों का कहना है कि इन सब मुद्दों की वजह से ऐसा लग रहा है कि महिलाओं का वोट बीजेपी के खिलाफ जायेगा ।

rajasthan government
Women Rights
AIDWA
NFIW
condition of women
rajasthan Assembly elections

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

अजमेर : ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह के मायने और उन्हें बदनाम करने की साज़िश

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

कर्नाटक : देवदासियों ने सामाजिक सुरक्षा और आजीविका की मांगों को लेकर दिया धरना

त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है


बाकी खबरें

  • putin
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध; अहम घटनाक्रम: रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश 
    28 Feb 2022
    एक तरफ पुतिन ने रूसी परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है, तो वहीं यूक्रेन में युद्ध से अभी तक 352 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • mayawati
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है
    28 Feb 2022
    एसपी-आरएलडी-एसबीएसपी गठबंधन के प्रति बढ़ते दलितों के समर्थन के कारण भाजपा और बसपा दोनों के लिए समुदाय का समर्थन कम हो सकता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 8,013 नए मामले, 119 मरीज़ों की मौत
    28 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 2 हज़ार 601 हो गयी है।
  • Itihas Ke Panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी: आज़ादी की आखिरी जंग
    28 Feb 2022
    19 फरवरी 1946 में हुई रॉयल इंडियन नेवल म्युटिनी को ज़्यादातर लोग भूल ही चुके हैं. 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में इसी खास म्युटिनी को ले कर नीलांजन चर्चा करते हैं प्रमोद कपूर से.
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर में भाजपा AFSPA हटाने से मुकरी, धनबल-प्रचार पर भरोसा
    27 Feb 2022
    मणिपुर की राजधानी इंफाल में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचीं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह। ज़मीनी मुद्दों पर संघर्षशील एक्टीविस्ट और मतदाताओं से बात करके जाना चुनावी समर में परदे के पीछे चल रहे सियासी खेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License