NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को विवादास्मक बिल पर भेजा नोटिस
इस आर्डिनेंस से सरकार संविधान की धारा 14,19 और 21 का उललंघन कर रही है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Oct 2017
राजस्थान सरकार

राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर शुक्रवार को केंद्र और राजस्थान सरकार को कुछ रिट पेटीशनों पर नोटिस भेजा है जो सरकार के द्वारा लाये गए एक आर्डिनेंस पर सवाल खड़े करते हैं. PUCL और राजस्थान कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने भी कोर्ट में राजस्थान सरकार के आर्डिनेंस को रद्द करने के लिए एक पेटीशन दायर किया था .

7 सितम्बर को राजस्थान सरकार ने विधानसभा “criminal laws (rajasthan Ordinance ) 2017 लागू किया.इस ऑर्डिनेंस के मुताबिक सरकार की स्वीकृति के बिना किसी भी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मेजिस्ट्रेट द्वारा जाँच नहीं हो सकती. इसके आलावा मीडिया भी किसी आरोपित पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ रिपोर्ट नहीं कर सकता और अगर ऐसा किया गया तो उसे 2 साल की सज़ा हो सकती है. इस ऑर्डिनेंस का विपक्षी पार्टियों , मानवाधिकार संगठनों और मीडिया से जुड़े लोग लगातार  विरोध कर रहे हैं  . विरोध के बावजूद 23 अक्टूबर को सरकार ने विधानसभा में ये बिल पेश किया. जस्टिस अजय रस्तोगी और दीपक महेश्वरी की एक डिवीज़न बेंच  ने ये नोटिस जारी किया है और नवम्बर 27 तक सरकार से जवाब माँगा है . पर नियमों के मुदाबिक , बिल सेलेक्ट कमिटी के सामने जा चूका है ,  यानी ये ऑडीनैन्स 5 दिसम्बर तक  लागू रहेगा .

सचिन पायलट का मानना है कि इस आर्डिनेंस से सरकार संविधान की धारा 14,19 और 21 का उललंघन कर रही है. आर्टिकल 14 कानून के आगे सबको बराबरी का अधिकार देता है और 19 अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार देता है .इससे पहले PUCL की राज्य सचिव कविता श्रीवास्तव ने भी कहा कि ये ऑर्डिनेंस मीडिया की आज़ादी पर रोक लगाने और मेजिस्ट्रेट की शक्तियों को सीमित करने के लिए लाया गया है और इससे मैजिस्ट्रेट द्वारा जाँच करवाने की सारी संभावनाएं ख़त्म हो जाएँगी.

इस पूरे प्रकरण से कई सवाल खड़े होते हैं , क्या सरकार लोगों के जनतांत्रिक अधिकारों का दमन करना चाहती है? क्या भारतीय लोकतंत्र ऐसे मुकाम पर आ खड़ा हुआ है कि एक प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत भर एक गुनाह हो गया है? क्या ऐसे ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ी जाएगी?

 

 

 

 

 

राजस्थान सरकार
विवादास्मक बिल
अभिव्यक्ति की आज़ादी
हाई कोर्ट राजस्थान

Related Stories

डीटीसी की हड़ताल सफल, सरकार ने वेतन कटौती का सर्कुलर वापस लिया

भाजपा शासित राज्य: सार्वजनिक परिवहन का निजीकरण

जिगनेश मेवानी को राजस्थान के नागौर जाने के रोका गया, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया विरोध

अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाये रखने के लिए पत्रकारों ने किया प्रदर्शन

राजस्थान किसानों के साथ बीजेपी का धोखा: हज़ारों उतरे सड़कों पर

सीकर: किसान अपनी माँगों पर अडिग

जयपुर कूच: सरकारी दमन के आगे नहीं झुकेंगे किसान

वसुंधरा राजे सरकार ने "काला कानून" वापस लिया

जन आन्दोलन के दबाव में राजस्थान सरकार ने स्कूलों के निजीकरण का निर्णय किया स्थगित

आने वाली नस्लों को 'शंभुओं' के बारे में जवाब देने के लिए हर तरह की हिंसा के विरोध में खड़े होने की जरूरत है!


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: कुछ भी मत छापो, श..श..श… देश में सब गोपनीय है
    10 Apr 2022
    एक कानून है, गोपनीयता का कानून। पहले से ही है। सरकारी गोपनीयता का कानून। बलिया में वह भंग कर दिया गया। तीन पत्रकारों ने उसे भंग किया।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    जय श्री राम बनाम जय सिया राम
    10 Apr 2022
    आज रामनवमी है, और इतवार भी। इसलिए ‘इतवार की कविता’ में आज पढ़ते हैं जय श्री राम और जय सिया राम का फ़र्क़ और मर्म बताती मुकुल सरल की यह छोटी सी कविता।
  • worker
    पुलकित कुमार शर्मा
    पिछले तीन सालों में दिहाड़ी 50 रुपये नहीं बढ़ी, जबकि महंगाई आसमान छू गयी    
    10 Apr 2022
    देश में 30 करोड़ से भी ज्यादा ग्रामीण कामगार कृषि और गैर कृषि पेशों से जुड़े हुए हैं। जिनकी दिहाड़ी में पिछले तीन सालों में मामूली सी बढ़ोतरी हुई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है।  
  • नाइश हसन
    उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां
    10 Apr 2022
    उर्दू अपना पहले जैसा मक़ाम हासिल कर सकती है बशर्ते हुकूमत एक खुली ज़ेहनियत से ज़बान को आगे बढ़ाने में साथ दे, लेकिन देखा तो यह जा रहा है कि जिस पैकेट पर उर्दू में कुछ छपा नज़र आ जा रहा है उस प्रोडक्ट से…
  • शारिब अहमद खान
    नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 
    10 Apr 2022
    केंद्र सरकार द्वारा दोनों चक्रों के विलय के फैसले से उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले हज़ारों छात्रों को धक्का लगा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License