NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान : कर्ज़ माफ़ी कांग्रेस की नहीं किसान आंदोलन की उपलब्धि
अशोक गहलोत की काँग्रेस सरकार ने ऐलान किया है कि वह प्रदेश के किसानों के दो लाख तक के कर्ज़ को माफ कर देगी । कर्ज़ माफी इस साल नवंबर तक के कर्ज़ो तक के लिए होगी ।
ऋतांश आज़ाद
20 Dec 2018
rajasthan

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम सरकार के बाद अब राजस्थान सरकार ने भी  किसानों की कर्ज़ माफी का ऐलान कर दिया है । इसे देश और प्रदेश में लाल झंडे के नेतृत्व में चल रहे किसान आंदोलन की जीत माना जा रहा है ।  किसान नेताओं का कहना है कि हालांकि यह आंदोलन की जीत है, लेकिन कर्ज़ माफी की पिछली घोषणाओं का अनुभव ज़्यादा अच्छा नहीं रहा है । इसीलिए इसे देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए ।

सरकार में आते ही काँग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी घोषण पर अमल किया है । अशोक गहलोत की काँग्रेस सरकार ने ऐलान किया है कि वह प्रदेश के किसानों के दो लाख तक के कर्ज़ को माफ कर देगी । कर्ज़ माफी इस साल नवंबर तक के कर्ज़ो  के लिए होगी । मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें सरकार के कुल 18000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह ऐलान राष्ट्रीय,सहकारी और दूसरे बैंकों से लिए गए कर्ज़ों के लिए है ।

अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश उपसचिव संजय माधव ने कहा “यह किसान आंदोलन की जीत है, लेकिन यह सम्पूर्ण जीत नहीं है । किसान सभा समपूर्ण कर्ज़ माफी की मांग कर रही है और इसमें उन कर्ज़ो की बात भी है जो साहूकारों से लिए गए हैं। साथ ही हम लाभकारी समर्थन मूल्य देने और स्वामीनाथन कमीशन की बाकी सिफ़ारिशों को लागू करने की भी मांग कर रहे हैं । कर्ज़ माफी कुछ राहत तो देती है लेकिन यह कृषि संकट का हल नहीं है। अगर लाभकारी मूल्य और बाकी सिफ़ारिशें नहीं मानी गयीं तो किसान फिर से कर्ज़ों में डूब जाएगा ।’’

राजस्थान में पिछले साल से ही ज़बरदस्त किसान आंदोलन चल रहा है । किसान सभा और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में किसान कर्ज़ माफी , लाभकारी समर्थन मूल्य, पेंशन और पशु व्यापार को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं । इसी के चलते पिछली बीजेपी सरकार ने किसानों के 50000 रुपये तक के कर्ज़ माफ किए थे लेकिन यह सिर्फ सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज़ों के लिए था । इस कर्ज़ माफी में दूसरे बैंक और साहूकारों से लिए कर्ज़ शामिल नहीं थे । इससे कुछ राहत तो मिली लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि बहुत किसानों इस लाभ से बाहर रहे ।

प्रदेश के किसान देश भर के किसानों की तरह ख़ासी परेशानी झेल रहे हैं । प्रदेश में लहसुन किसानों ने आत्महत्या तक की है । इसकी वजह है निज़ी बैंकों से लिए क़र्ज़ का माफ न होना और लाभकारी मूल्यों पर फसल की खरीद न होना ।

मई में न्यूज़क्लिक कि रिपोर्ट के हिसाब से पिछले साल जहाँ एक क्विंटल लहसुन की कीमत 2850 रुपये थी वहीं इस साल लहसुन की कीमत 200 से 700 रुपये क्विंटल हो गयी थीI ये समस्या और भी भयावह रूप इसीलिए ले रही थी क्योंकि इस साल लहसुन की बम्पर फसल हुई थीI हालात ये थे कि किसानों को लागत के आधे दाम भी नहीं मिल पा रहे थेI किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने एक क्विंटल लहसुन का दाम 3400 रुपये तय किया था लेकिन वह इस दाम पर लहसुन खरीद नहीं रही है I

यह एक बड़ी समस्या रही है, सरकार अगर ठीक ठाक मूल्य देने को तैयार भी होती जाती है तो खरीद नहीं करती ।

किसान आंदोलन के चलते ही किसानों का मुद्दा विधानसभा चुनावों का मुख्य मुद्दा बना और जानकारों की माने तो किसानों की अनदेखी के चलते ही बीजेपी हारी । काँग्रेस ने इसी आंदोलन का फायदा उठाया और किसान आंदोलन से कोसों दूर रहने के बावजूद सत्ता में आई । किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाली माकपा भी राज्य में दो सीटों पर जीतने में कामियाब रही ।

किसान आंदोलन और माकपा के नेता बलवान पूनिया ने चुनाव जीतने के बाद कहा था कि अगर काँग्रेस ने कर्ज़ माफी का वादा नहीं निभाया तो वह फिर से आंदोलन करेंगे ।

काँग्रेस सरकार की 2 लाख तक की कर्ज़ माफी के ऐलान पर किसान सभा के नेताओं का कहना है कि वह आंदोलन जारी रखेगी । जैसा की पहले कहा जा चुका है किसान सभा सम्पूर्ण कर्ज़ माफी और लाभकारी मूल्य की मांग कर रही है । उन्होने बताया कि बाकी कार्यवाही 23 दिसंबर को किसान सभा की बैठक में तय की जाएगी 

उनका कहना है कि जब तक नवउदारवादी नीतियों को पूरी तरह पीछे नहीं लिया जाता यह लड़ाई जारी रहेगी । इसी कड़ी में 8 और 9 जनवारी को देश भर के किसान और मज़दूर संगठनों ने हड़ताल का आवाहन किया है ।

 

Rajasthan
Congress
ashok gehlot
CPI(M)
AIKS
farmers movement

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ


बाकी खबरें

  • modi
    विजय विनीत
    बनारस में फिर मोदी का दौरा, क्या अब विकास का नया मॉडल होगा "गाय" और "गोबर"? 
    23 Dec 2021
    मोदी ने बनारस दौरे पर दिए अपने भाषण में यह नहीं बताया कि डबल इंजन की सरकार के विकास से किस वर्ग के लोगों की आमदनी बढ़ी? चाहे वो किसान हो, मजदूर हो या फिर व्यापारी, कोई इस स्थिति में नहीं है कि वो यह…
  • paul
    कैप्टन पॉल वाटसन
    पृथ्वी पर इंसानों की सिर्फ एक ही आवश्यक भूमिका है- वह है एक नम्र दृष्टिकोण की
    23 Dec 2021
    जहाँ एक तरफ दुनिया के महासागर, गैर-मानवीय जानवर और पेड-पौधे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को बरक़रार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं हम इसे नुकसान पहुंचाने के लिए इतने आतुर क्यों हैं?
  • dharm sansad
    अजय कुमार
    हरिद्वार में ‘धर्म संसद’ के नाम पर तीन दिन तक चलते रहे अल्पसंख्यक विरोधी भाषण, प्रशासन मौन! 
    23 Dec 2021
    ‘धर्म संसद' नाम का इस्तेमाल कर उत्तराखंड के हरिद्वार में 17 दिसंबर से लेकर 19 दिसंबर तक एक ऐसी सभा का आयोजन हुआ जिसमें सब कुछ अपवित्र और आपत्तिजनक था।
  • mid day meal
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    उत्तराखंड : दलित भोजन माता की नियुक्ति और विवाद का ज़िम्मेदार कौन है?
    23 Dec 2021
    चंपावत के सूखीढांग इंटर कॉलेज मामले में कई बड़े झोल सामने आ रहे हैं। कभी भोजन माता की नियुक्ति को अवैध बताया जा रहा है, तो कभी जातिवाद का मुद्दा हावी हो रहा है। बहरहाल, मामला जो भी हो ज़िम्मेदारी और…
  • Saudis
    पीपल्स डिस्पैच
    यमन में युद्ध अपराध की जांच कर रहे यूएन इंवेस्टिगेटर की जासूसी के लिए सऊदी ने किया पेगासस का इस्तेमाल
    23 Dec 2021
    सऊदी अरब ने यमन में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के सदस्यों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश करते हुए स्वतंत्र पैनल द्वारा एक रिपोर्ट जारी करने से हफ्तों पहले ही संयुक्त राष्ट्र के एमिनेंट…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License